तो इसलिए अधिक खाती हैं महिलाएं

By  , ओन्‍ली माई हैल्‍थ सम्पादकीय विभाग
May 04, 2013

to isliye adhik khaati hai mahilaye

एक नए शोध के अनुसार महिलाएं जैविक रूप से भोजन संबंधी विकार की अधिक शिकार होती हैं।

ब्रिटिश अखबार डेली मेल की खबर के अनुसार, महिला चूहों पर किए गए अध्ययनों में पाया गया कि वे अपने पुरुष साथियों की अपेक्षा अधिक खाती हैं। इसके बाद यह बात सामने आई है कि इसके लिए केवल सांस्कृतिक दबावों को ही दोष देना सही नहीं है।

लिंग आधारित यह खाने की मात्रा को लेकर जानवरों पर किया गया यह अपनी तरह का पहला शोध है। और शोधकर्ताओं का कहना है कि यह मनुष्यों  के लिए भी निहितार्थ है।

जो लोग इटिंग डिसऑर्डर के शिकार होते हैं, वे अधिक मात्रा में भोजन खाते हैं और खाते समय उनका स्वयं पर कोई नियंत्रण नहीं रहता।

महिलाओं में पुरुषों की अपेक्षा इटिंग डिसऑर्डर होने का खतरा 10 गुना तक अधिक होता है।

मिशिगन स्टेपट यूनिवर्सिटी के साइकोलॉजिस्ट प्रोफेसर कैले क्ल म्पअ के अनुसार, ' अधिक सिद्धांत जो महिलाओं के अधिक खाने के संदर्भ में बताए गए हैं, वे इसका कारण उन पर पड़ने वाले सामाजिक और मनोवैज्ञानिक दबाव ही बताते हैं। लेकिन इस शोध में बताया गया है कि इसके पीछे जैविक कारण भी होते हैं। क्योंकि मादा चूहों पर मनुष्यों की तरह पतले रहने का मनोवैज्ञानिक दबाव नहीं होता।' इस शोध में महिलाओं के अधिक खाने के संबंध में कई मजबूत तथ्य पेश किए गए हैं।

प्रोफेसर क्लेम्पा और उनके साथियों ने साठ चूहों पर दो हफ्तों तक एक तजुर्बा किया, इनमें से आधी महिलाएं थीं। इसमें खाने की गोलियों को समय-समय पर वेनिला फ्रोस्टिंग के साथ बदला गया। उन्होंंने खाया कि अधिक खाने की प्रवृति में महिला चूहे अपने पुरुष साथियों की अपेक्षा छह गुना आगे रही।

शोधकर्ता अब चूहों की आगे जांच कर यह पता लगाने की कोशिश कर रहे हैं कि क्या महिलाओं का मस्तिष्क‍ रिवार्ड पाने के प्रति अधिक उत्तेजित होता है। और इसके लिए वे अधिक वसा और चीनी वाला खाने की ओर आकर्षित होती हैं। इसके साथ ही वैज्ञानिक उस कैमिकन का भी पता लगाने में जुटे हैं जो इस व्यवहार को बढ़ावा देता है।

इन सवालों के जवाब उन महिलाओं के लिए काफी मददगार साबित हो सकते हैं जो अतिक्षुधा से परेशान हैं। प्रोफेसर क्ल म्पम कहते हैं, ' इस रिसर्च से पता चला है कि शायद महिलाओं और पुरुषों में कोई ऐसा जैविक अंतर है, जिसे जानना हमारे लिए जरूरी है ताकि हम कई अन्य संभावित खतरों के लिए तैयार हो सकें।

 

 

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