फेफड़ों का खतरनाक रोग है सीओपीडी, अस्थमा जैसे होते हैं लक्षण

By  , ओन्‍ली माई हैल्‍थ सम्पादकीय विभाग
Oct 26, 2018
Quick Bites

  • 2020 तक सीओपीडी विश्व में मौत का तीसरा सबसे बड़ा कारण होगा।
  • अस्थमा और सीओपीडी के मिलते हैं लक्षण मगर होता है अंतर।
  • लगातार खांसी, सांस में परेशानी और सांस फूलने को नजरअंदाज न करें।

सांस लेने में परेशानी, सीने में तेज दबाव और खांसी जैसे लक्षणों को देखकर हमारा पहला ध्यान अस्थमा की तरफ जाता है। लेकिन क्या आपको पता है कि ये सभी लक्षण फेफड़ों से संबंधित दूसरी गंभीर बीमारी सीओपीडी के भी हो सकते हैं। आपको जानकर हैरानी होगी कि सन् 2000 में विश्व स्वास्थ्य संगठन के अनुसार सीओपीडी मौत का छठवां सबसे बड़ा कारण था जबकि 2020 तक ये दुनियाभर में मौत का तीसरा सबसे बड़ा कारण होगा।

जी हां, सीओपीडी यानी क्रॉनिक ऑब्सट्रक्टिव पल्मोनरी डिजीज फेफड़े से संबंधित एक गंभीर रोग है, जिसके कुछ लक्षण अस्थमा से मिलते हैं।  इसलिए लोग अक्सर इन दोनों बीमारियों में कंफ्यूज हो जाते हैं। यहां तक कि कई बार चिकित्सक भी इन बीमारियों में कंफ्यूज हो जाते हैं। अगर आप सीओपीडी की समस्या में अस्थमा का इलाज करते हैं या इलाज नहीं करते हैं, तो स्थिति गंभीर हो सकती है। आइए आपको बताते हैं क्या है इन बीमारियों में अंतर और सीओपीडी से कैसे संभव है बचाव।

क्या है सीओपीडी

सीओपीडी वास्तव में हमारे फेफड़ों और श्वसन-तंत्र से संबंधित समस्या है। जिसे सामान्य बोलचाल की भाषा में क्रॉनिक ब्रोंकाइटिस कहा जाता है। हमारे शरीर में फेफडे फिल्टर की तरह काम करते हैं। फेफड़ों में छोटे-छोटे वायु-तंत्र होते हैं, जिन्हें एसिनस कहा जाता है। जब हम सांस लेते हैं तो फेफड़े का यही हिस्सा शुद्ध ऑक्सीजन को छान कर उसे हार्ट (हृदय) तक पहुंचाता है। फिर हृदय से ऑक्सीजन युक्त रक्त का प्रवाह पूरे शरीर में होता है। इसके बाद बची हुई हवा को फेफड़े दोबारा फिल्टर करके उसमें मौजूद नुकसानदेह तत्वों को सांस छोडने की प्रक्रिया के माध्यम से बाहर निकालते हैं। जब फेफड़े के इस कार्य में बाधा पहुंचती है तो इससे सीओपीडी की समस्या पैदा होती है।

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क्या है सीओपीडी और अस्थमा में अंतर

अस्थमा और सीओपीडी दोनों बीमारियां श्वसन की प्रक्रिया में रुकावट के कारण होती हैं। एक्सपर्ट्स के मुताबिक सीओपीडी का खतरा उन लोगों को ज्यादा होता है, जिनकी उम्र 40 साल से अधिक है और जो धूम्रपान करते हैं या लंबे समय तक धूम्रपान करने के बाद इसे छोड़ चुके हैं। सीओपीडी के मामले में फेफड़ों में सूजन हो जाती है और वायु का दबाव कम हो जाता है। ऐसे में सीटी स्कैन द्वार सीओपीडी का पता लगाया जा सकता है।

क्या हैं सीओपीडी के लक्षण

सीओपीडी के प्राथमिक लक्षणों की पहचान करना बहुत ही आसान है। अगर बलगम वाली खांसी लगातार दो महीने से अधिक बनी रहती है और मौसम बदलने पर पिछले दो साल से ऐसा हो रहा हो तो आपको डॉक्टर से तुरंत संपर्क करने की जरूरत है। खांसी के सामान्य सिरप और दवाएं इसमें कारगर नहीं होती। हालांकि ज्‍यादातर मामलों में सीओपीडी के लक्षण 35 साल की उम्र के बाद ही नजर आते हैं। ये लक्षण दिखें तो तुरंत चिकित्सक से संपर्क करें।

  • लगातार होने वाली खांसी
  • लम्बे समय तक कफ बलगम और कफ बनना
  • सर्दियों में खांसी होना
  • कार्य करते समय सांस फूलना।
  • धूम्रपान करते व्यक्ति में यह लक्षण बार-बार होने से सीओपीडी रोग की शुरूआत होती है।

सीओपीडी से कैसे संभव है बचाव

  • मोटापे की वजह से सांस की नलियां अवरुद्ध हो जाती हैं, जिससे व्यक्ति के शरीर में ऑक्सीजन का प्रवाह कम हो जाता है। इसलिए नियमित एक्सरसाइज और संतुलित खानपान से बढ़ते वजन को नियंत्रित रखें।
  • सीओपीडी होने पर नियमित चेकअप कराएं और सभी दवाएं सही समय पर लें।
  • धूम्रपान कभी न करें। ये सीओपीडी और अस्थमा दोनों का मुख्य कारण है।
  • सीओपीडी होने पर आइसक्रीम, कोल्ड ड्रिंक्स, दही और फ्रिज में रखी चीजों से बचें। सर्दियों में गुनगुना पानी पीएं।
  • ज्यादा गंभीर स्थिति होने पर डॉक्टर की सलाह पर घर पर ही नेबुलाइजर, पल्स ऑक्सीमीटर, ऑक्सीजन सिलिंडर या कंसंट्रेटर की व्यवस्था रखें। अगर पल्स ऑक्सीमीटर में ऑक्सीजन का सैचुरेशन 88 प्रतिशत से कम हो तो मरीज को ऑक्सीजन देने की जरूरत पडती है। परिवार का कोई भी सदस्य मरीज को आसानी से ऑक्सीजन दे सकता है।

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