
विदेश मंत्री सुषमा स्वराज किडनी फेल होने के बाद इलाज के लिए दिल्ली के एम्स में भर्ती हैं। सोशल मीडिया पर लोगों की मदद करने में आगे रहने वाली सुषमा ने खुद ट्विटर पर अपनी खराब तबीयत की जानकारी देते हुए ट्वीट किया। उन्होंने ट्वीट में बताया, 'मैं किडनी फेल होने के कारण एम्स में भर्ती हूं। अभी डायलिसिस पर हूं। किडनी ट्रांसप्लांट के लिए टेस्ट किए जा रहे हैं। मैं भगवान कृष्ण से दुआ मांगती हूं कि जल्द सब ठीक हो।
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I am in AIIMS because of kidney failure. Presently, I am on dialysis. I am undergoing tests for a Kidney transplant. Lord Krishna will bless
— Sushma Swaraj (@SushmaSwaraj) November 16, 2016
संसद के शीतकालीन सत्र से पहले सुषमा स्वराज की तबीयत खराब हो गई थी, किडनी संबंधी दिक्कतों के चलते 7 नवंबर को उन्हें एम्स में भर्ती करवाया गया था। सुषमा स्वराज का डायलिसिस किया जा रहा है। 
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सुषमा स्वराज की किडनी फेल का कारण
सुषमा का किडनी ट्रांसप्लांट किया जाएगा इसलिए फिलहाल उनके कुछ जरूरी टेस्ट किए जा रहे हैं। सुषमा अगले कुछ दिनों तक अस्पताल में ही रहेंगी। डायबिटीज की पुरानी बीमारी के कारण उनकी किडनी में दिक्कतें आ रही हैं। सुषमा पिछले 20 सालों से डायबीटीज से पीड़ित हैं। उनका डायलिसिस किया जा रहा है। एम्स में डॉक्टरों की एक टीम उनका ख्याल रख रही है।
किडनी की बीमारी के कारण
हर साल किडनी की बीमारी के चलते लाखों लोग अपनी जान गंवा बैठते हैं। लेकिन सबसे खतरनाक बात यह है कि अधिकतर लोगों को इसकी जानकारी तब होती है जब बहुत देर हो चुकी होती है। दरअसल किडनी की बीमारी के लक्षण उस वक्त उभरकर सामने आते हैं, जब किडनी 60 से 65 प्रतिशत डैमेज हो चुकी होती है। इसलिए इसे साइलेंट किलर भी कहा जाता है। इसलिए समय रहते इसके लक्षणों की पहचान किया जाना बहुत जरूरी होता है।
किडनी शरीर का एक ऐसा अंग होता है जो शरीर से विषाक्त पदार्थों को छानकर यूरीन के माध्यम से शरीर से बाहर निकालता है। लेकिन डायबिटीज जैसी बीमारियों, खराब जीवनशैली और कुछ दवाओं के कारण किडनी के ऊपर बुरा प्रभाव पड़ता है।
डायबिटीज और ब्लड प्रेशर किडनी फेल होने के सबसे बड़े कारण हैं। डायबिटीज के 30 से 40 प्रतिशत मरीजों की किडनी खराब होती है। इनमें से 50 प्रतिशत मरीज ऐसे होते हैं, जिन्हें बहुत देर से इस बीमारी का पता चलता है और फिर उन्हें डायलिसिस या किडनी ट्रांसप्लांट करवाना पड़ता है।
किडनी फेल होने लक्षण
- हाथ पैरों व आंखों के नीचे सूजन
- कमजोरी
- थकान
- शरीर में खुजली
- बार-बार यूरीन आना
- भूख न लगना या कम लगना
- उल्टी व उबकाई आना
- पैरों की पिंडलियों में खिंचाव आदि
किडनी की बीमारी से बचाव के उपाय
किडनी की बीमारी से बचने का सबसे अच्छा उपाय यह है कि
- ब्लड प्रेशर और शुगर पर कंट्रोल करना बहुत जरूरी है।
- हर 3 से 6 महीने में यूरीन टेस्ट करवाएं।
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