स्कूलों में सेक्स शिक्षा

By  , ओन्‍ली माई हैल्‍थ सम्पादकीय विभाग
Sep 16, 2011

Schoolo me sex shiksha in hindiबहुत समय से ये बहस का मुद्दा है कि स्कूल प्रोग्राम में यौन शिक्षा को जोड़ा जाना चाहिए कि नहीं। इस मुद्दे पर कुछ समिति और संस्थाओं का कहना है कि यौन शिक्षा पश्चिमी सभ्यता और संस्कृति में ही ठीक है भारतीय समाज में नहीं। लेकिन क्या आप जानते हैं सेक्स की जानकारी टीनेजर्स को होना बहुत जरूरी है। यह जन स्‍वास्‍थ्‍य के लिए बहुत लाभकारी है। आइए जानें स्कूलों में सेक्स शिक्षा के बारे में।

  • आज के समय में स्कूलों के प्रिंसिपल्स‍ तक ये बात मानते हैं कि स्कूलों में सेक्स शिक्षा देना जरूरी है लेकिन उसके साथ ही यह भी जरूरी है कि सेक्स की जानकारी किशोरों को ट्रेंड स्टाफ से ही दिलवानी चाहिए।
  • स्कूलों में सेक्स शिक्षा के साथ ही जरूरी है कि अभिभावकों को भी इसके बारे में सही-सही जानकारी दी जाएं तभी बच्चों को सही रूप में सेक्स शिक्षा मिल पाएगी, क्योंकि बहुत से अभिभावक ऐसे हैं जो नहीं जानते कि उन्हें अपने बढ़ते बच्चों को कब किस बारे में जानकारी देनी चाहिए।
  • किशोरावस्था में शारीरिक विकास के साथ ही मानसिक विकास भी होता है, ऐसे में जरूरी है कि किशोरों को सही समय पर सही ज्ञान दिया जाए फिर वह सेक्स ज्ञान ही क्यों न हो।
  • हाल ही में हुए सर्वे में खुलासे हुए हैं कि आज के समय में सिर्फ अभिभावक ही नहीं बल्कि युवावर्ग और टीचर्स तक का मानना है कि स्कूलों में यौन शिक्षा पाठ्यक्रम आरंभ कर देना चाहिए।
  • स्कूलों में यौन शिक्षा के माध्यम से न सिर्फ भविष्य में यौन संक्रमित बीमारियों से बचा जा सकता है बल्कि असुरक्षित यौन संबंधों से भी बचा जा सकता है।
  • समाज में आ रहे बदलावों के चलते और एड्स जैसी बीमारियों के फैलने से भी सेक्स शिक्षा की जरूरत लगातार बढ़ रही है।
  • यौन शिक्षा न मिलने से भी आए दिन बलात्कार, अनुचित यौन संबंध, बिनब्याहे माँ-बाप, बिखरते रिश्तों इत्यादि देखने-सुनने को मिल जाते है। ऐसे में समाज को सुचारू रूप से चलाने के लिए भी सेक्स शिक्षा स्कूलों में होनी चाहिए।
  • बढ़ती उम्र में बच्चों की हर चीज को जानने की इच्छा होती है, ऐसे में उनके मन में कई सवाल भी उठते हैं। बच्चों को यदि सही समय पर उनका जवाब न दिया जाए तो बच्चा अपने सवालों के जवाब जानने के लिए गलत तरीके भी अपना सकता है। ऐसे में बच्चों को सही समय पर यौन शिक्षा देना भी जरूरी हो जाता है।
  • एकल परिवारों के चलन के कारण मां-बाप अपने बच्चे पर अधिक ध्यान नहीं दे पाते, कई बार पेरेंट्स बच्चों के आगे सेक्स संबंधी बातों का जिक्र करना अच्छा नहीं समझते ऐसे में बच्चे इंटरनेट या कुछ गलत किताबों के माध्यम से जानकारी पाते हैं जो कि बच्चों के लिए नुकसानदायक हो सकती है।

 


 

 

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