समय पूर्व प्रसव से सीखने की क्षमता पर असर

By  , ओन्‍ली माई हैल्‍थ सम्पादकीय विभाग
Nov 15, 2012
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samay purb prasav se shikhne ki chhamta par asar

ऑस्ट्रेलियाई शोधार्थियों के एक अध्ययन में दावा किया गया है कि उम्र बढ़ने के साथ-साथ होने वाली याददाश्त एवं सीखने की समस्या का संबंध समय पूर्व प्रसव से होता है।

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जर्नल ऑफ न्यूरोसाइंस में प्रकाशित इस अध्ययन में उन लोगों को शामिल किया गया जो मस्तिष्क संबंधी समस्याओं से ग्रस्त थे। एबीसी की रिपोर्ट के अनुसार, एडीलेड यूनिवर्सिटी की शोधार्थी जूलिया पिचर ने कहा कि 37 सप्ताह की अवधि से पूर्व जिनका जन्म होता है उनको प्लास्टिसिटी की समस्या होती है।
   
शोधकर्ताओं ने कहा गर्भावस्था में 20 वें सप्ताह से 37 वें सप्ताह के बीच मस्तिष्क का विकास तेजी से होता है। समय से पूर्व प्रसव होने पर मस्तिष्क की सूक्ष्म संरचना, उनकी तंत्रिकाओं का संपर्क और तंत्रिका रसायन में परिवर्तन हो जाता है।
   
पिचर ने कहा कि व्यायाम एवं तनाव पैदा करने वाले कार्टिसोल हार्मोन का स्तर बढ़ाने सहित मस्तिष्क की कार्यप्रणाली में सुधार के अन्य तरीके हो सकते हैं जिनसे सीखने में मदद मिलती है।

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उन्होंने कहा लोगों को लगता है कि कार्टिसोल में वृद्धि का संबंध तनाव से होता है लेकिन 24 घंटे में कार्टिसोल की मात्रा कम या ज्यादा होती रहती है। सीखने की प्रक्रिया, नई स्मतियों को सहेजने तथा पुरानी स्मतियों को ताजा करने में इसकी अहम भूमिका होती है।
   
पिचर ने कहा कि यह घटनाक्रम न्यूरोप्लास्टिसिटी की समस्या से छुटकारा पाने के लिए थैरेपी विकसित करने में मददगार हो सकता है।

 

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