मेडिटेशन करने के वैज्ञानिक कारण

मेडिटेशन न सिर्फ अध्‍यात्‍म से जुड़ा है बल्कि ये विज्ञान से भी जुड़ा है। इसके नियमित अभ्‍यास से शरीर को फायदा होता है, यह बात विज्ञान ने भी स्‍वीकार किया है और वैज्ञानिक शोधों के जरिये इन बातों की पुष्टि हुई है कि नियमित मेडिटेश

Pooja Sinha
तन मनWritten by: Pooja SinhaPublished at: Feb 25, 2015
मेडिटेशन करने के वैज्ञानिक कारण

मेडिटेशन यानी ध्‍यान न सिर्फ अध्‍यात्‍म से जुड़ा है बल्कि ये विज्ञान से भी जुड़ा है। इसके नियमित अभ्‍यास से शरीर को फायदा होता है, यह बात विज्ञान ने भी स्‍वीकार किया है और वैज्ञानिक शोधों के जरिये इन बातों की पुष्टि हुई है कि नियमित मेडिटेशन करने से दिमाग स्‍वस्‍थ होता है और याद्दाश्‍त बढ़ती है। साथ ही यह शरीर को स्थिर कर मजबूत बनाता है। तो अब न केवल अध्‍यात्मिक कारणों से बल्कि वैज्ञानिक कारणों से भी मेडिटेशन को अपनी दिनचर्या में आप जरूर शामिल करें।

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व्यक्तित्व के विकास में सहायक

पेनीसिल्‍वेनिया विश्विविद्यालय के शोधकर्ताओं द्वारा किए गये एक शोध के अनुसार, मेडिटेशन व्‍यक्तित्‍व के विकास में सहायक होता है। इस शोध के अनुसार, मेडिटेशन द्वारा मस्तिष्क को तीन चरणों में एकाग्रचित किया जा सकता है। साथ ही सक्रिय रहते हुए मस्तिष्‍क को प्रत्येक बिंदु पर क्रियाशील बनाया जा सकता है। इस शोध के दौरान प्रतिभागियों को एक महीने तक 30 मिनट की मेडिटेशन करने के लिए कहा गया। एक महीने के पश्चात उनके मस्तिष्क की क्रियाओं को मापा गया और उनकी मानसिक गतिविधियों का निरीक्षण किया गया। इस शोध के निष्कर्ष स्वरूप इन प्रतिभागियों के मस्तिष्क और व्यवहार में काफी सकारात्मक परिवर्तन सामने आए।

 

तनाव कम करने में मददगार

योग गुरु सदियों से इस बात को मानते हैं कि महज एक महीने के मेडिटेशन से दिमागी को दुरुस्त किया जा सकता है। लेकिन हाल ही में किए गए एक अध्ययन ने भी उनकी बातों को माना है। अध्ययन से पता चला है कि मेडिटेशन के जरिये कई दिमागी बीमारियों को ठीक किया जा सकता है। अमेरिका के वैज्ञानिकों ने यूनिवर्सिटी के छात्रों के दो समूह पर किए गए अध्ययन में पाया कि महज चार हफ्तों के प्रशिक्षण से उनके दिमाग में अहम बदलाव आया। उनके दिमाग का नर्व फाइबर घना हुआ और दिमाग से ज्यादा संकेत मिलने शुरू हो गए।

अध्ययन के दौरान मस्तिष्‍क के व्यवहार को नियंत्रित करने वाले हिस्से में भी अच्छे बदलाव पाये गये। इस हिस्‍से में नसों की खराब गतिविधियां ही दिमागी बीमारियों यानी एकाग्रता में कमी, डिमेंशिया, अवसाद और सिजोफ्रेनिया का कारण बनती हैं। इसके अलावा जर्नल हेल्‍थ साईकोलॉजी में हाल ही में हुए शोध के अनुसार मेडिटेशन से तनाव मुक्ति और शांति पाने का सबसे कारगर उपाय है। मेडिटेशन से शरीर से कोर्टिसोल नामक हार्मोंन का स्राव सही मात्रा में होता है, जिससे आपका दिमाग शांत रहता है और आपको तनाव मुक्‍त रहने में मदद मिलती है।

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रोगों से बचाव

डेविड क्रेज्वेल, एसिटेंट प्रोफेसर साइकोलोजी द्वारा किये गए हाल के शोध के अनुसार, जहां मेडिटेशन से मन और मस्तिष्क को नई उर्जा मिलती है वहीं दूसरी ओर इससे हमारे शरीर को भी लाभ मिलता है। मेडिटेशन से हमारे शरीर में नयी शक्ति का संचार होता है। और इस शक्ति के कारण हम स्‍वयं को पहले से अधिक स्‍वस्‍थ महसूस करने लगते हैं। इसके अलावा मेडिटेशन से उच्च रक्तचाप नियंत्रित होता है। सिरदर्द दूर होता है।

शरीर में प्रतिरक्षा प्रणाली मजबूत होती है, जिससे बीमारियों से लड़ने की हमारी क्षमता में इजाफा होता है। मेडिटेशन से शरीर में स्थिरता बढ़ती है जिससे शरीर मजबूत होता है। क्रेज्वेल का मानना है कि बुजुर्गों में अकेलापन उनके स्वास्थ्य के लिए धूम्रपान के समान ही खतरनाक है और एक बड़ी समस्या भी है। इस अध्ययन से यह बात साबित हुई है कि ध्यान, बुजुर्गों में होनेवाले अकेलेपन के अहसास को कम करने में मददगार होता है जिससे उन्हें एल्जाइमर, डायबिटीज जैसी अन्य कई स्थितियों से मुकाबला करने बड़ी मदद मिलती है।

इस तरह से स्वास्थ्य लाभ प्राप्त करने वाली प्राचीन विधि को अब वैज्ञानिकों ने भी स्‍वीकार किया है।


Image Courtesy : Getty Images

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