पुरूषों में ब्रेस्ट कैंसर का निदान

By  , ओन्‍ली माई हैल्‍थ सम्पादकीय विभाग
May 08, 2012

Purusho me breast cancer ka nidaan

महिलाओं की तुलना में पुरूषों में ब्रेस्ट कैंसर होने की संभावना कम होती है। लेकिन पुरूषों द्वारा स्वास्‍थ्‍य के प्रति बरती जा रही लापरवाही के कारण ब्रेस्ट कैंसर के मामले बढे हैं। समय पर ब्रेस्ट कैंसर का पता लग जाए तो मरीज पुके ठीक होने की संभावना बढ जाती है। पुरूषों में ब्रेस्ट कैंसर के लक्षण सामान्य और अस्पष्ट भी हो सकते हैं। कैंसर की गांठ या ट्यूमर किसी भी उम्र के पुरूष में हो सकती है लेकिन आमतौर पर यह 60-70 साल की उम्र पार कर चुके लोगों में ही देखने को मिलती है। पुरूषों में ब्रेस्ट कैंसर का सबसे आम लक्षण स्तन में गांठ का उभरना है जो दर्द रहित होता है।

 

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पुरूषों में स्तन कैंसर का निदान -
पुरूषों में ब्रेस्ट कैंसर की पहचान अगर जल्दी हो जाए तो इसका निदान बहुत आसान हो जाता है। अगर ब्रेस्ट कैंसर का पता देरी से लगता है तो यह जानलेवा हो सकता है। स्तन कैंसर का निदान निम्न टेस्ट को कराकर किया जा सकता है :
 

मैमोग्राफी -
मैमोग्राफी में एक्स-रे द्वारा स्तन की पिक्चर ली जाती है। इसमें स्तन के दो एक्स-रे तस्वीरें ली जाती हैं जिसे अलग-अलग कांच के प्लेट में रखा जाता है। पहली तस्वीर स्तन के ऊपर से और दूसरी स्तन के साइड से ली जाती है। चिकित्सक इन तस्वीरों को देखकर ब्रेस्ट कैंसर के लक्षणों को निर्धारित करता है।

 

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अल्ट्रासाउंड -
अल्ट्रासाउंड में ज्यादा फ्रीक्वेंसी वाली ध्वनि तरंगें ब्रेस्ट के अंदर जाती हैं जो कि तस्वीरों में बदल जाती हैं और मॉनीटर के स्क्रीन पर यह छवियां दिखती हैं। अल्ट्रासाउंड अन्य टेस्ट का पूरक है। यदि मैमोग्राफी में स्तनों में कुछ असमानता दिखती है तो अल्ट्रासाउंड में यह दिख जाती है। लेकिन अल्ट्रासाउंड यह निर्धारित नहीं करता है कि जो गांठ है वह कैंसर की ही गांठ है।

मैग्नेटिक रेजोनेंस इमेजिंग (एमआरआई) –
एमआरआई में एक्स-रे तरंगो की अपेक्षा रेडियो तरंगों का प्रयोग किया जाता है। स्तन कैंसर की एमआरआई में बेहतर परिणाम के लिए स्कैन से पहले गैडोलिनियम नाम के तरल पदार्थ को नस में डाला जाता है। एमआरआई स्कैन में एक घंटे से ज्यादा समय लगता है। एमआरआई से ब्रेस्ट में कैंसर की गांठ के वास्तविक आकार का पता लगता है।

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बायोप्सी –
बायोप्सी के जरिए कैंसर के ऊतकों और सामान्य ऊतकों में अंतर देखा जा सकता है। यदि ब्रेस्ट कैंसर के ऊतक मौजूद हैं तो बायोप्सी के जरिए चिकित्सक यह निर्धारित कर सकते हैं। बायोप्सी कई प्रकार की होती हैं।

  • फाइन निडिल बायोप्सी – यह बायोप्सी का सबसे आसान और जल्दी निदान करने वाली तकनीक है। इसमें डॉक्टर एक पतली सूई के द्वारा ब्रेस्ट के संदिग्ध जगह से (जहां पर कैंसर के गांठ होने की आशंका है) ऊतकों के कुछ नमूनों को लेता है। माइक्रोस्कोप के जरिए इन नमूनों का परीक्षण किया जाता है।

 

  • कोर निडिल बायोप्सी – ब्रेस्ट में माइक्रोस्कोप से जो असमानता दिखती है डॉक्टर उन ऊतकों को सूई के जरिए निकाल देते हैं। इसमें थोडा बडी सुई का प्रयोग किया जाता है। इसमें नमूने के लिए ऊतकों का ज्यादा हिस्सा लिया जाता है इसलिए यह कैंसर के निदान के सही जानकारी देता है।

 

  • सर्जिकल या ओपेन बायोप्सी - कभी-कभी माइक्रोस्कोप के जरिए दिखे कैंसर के ऊतको को निकालने के लिए सर्जरी की आवश्यकता होती है। सर्जरी से कैंसर ग्रस्त सभी हिस्से को निकाल दिया जाता है। कोर और फाइन बायोप्सी की तुलना में सर्जिकल बायोप्सी‍ का ज्यादा प्रयोग किया जाता है।

 

दरअसल झिझक के कारण पुरूष अपनी समस्याओं के बारे में बात करने से घबराते हैं। जिसके कारण बीमारी बढ़ जाती है, यदि महिलाओं की तरह पुरूष भी अपने स्तनों में होने वाले बदलावों के बारे में डॉक्टर से सलाह लेगे तो निश्चित रूप से समय रहते ब्रेस्ट कैंसर से बचाव किया जा सकता है। 

 

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