पुरुषों में रजोनिवृति क्‍या होती है

By  , ओन्‍ली माई हैल्‍थ सम्पादकीय विभाग
Dec 11, 2012

pursho me rajonivrati kya hoti haiहार्मोन्स में बदलाव सिर्फ महिलाओं में ही नहीं पुरुषों में भी होते हैं। चिकित्सकों के मुताबिक कई बार पुरुष भी उन्हीं लक्षणों को महसूस करते हैं जिन्हें रजोनिवृति के दौरान महिलाएं महसूस करती हैं। पुरुषों में रजोनिवृति को एंड्रोपॉज के नाम से भी जाना जाता है। इससे पुरुषों में टेस्टोस्टेरोन के स्तर में क्रामिक गिरावट देखी जाती है। यह हार्मोन पुरुषों व महिलाओं दोनों में सेक्स की इच्छा बढ़ाता है। ऐसा जरूरी नहीं है कि सभी पुरुषों में रजोनिवृति के लक्षण पाए जाएं।

[इसे भी पढ़ें: रजोनिवृति के लक्षण]

 

क्या होता है एंड्रोपॉज

एंड्रोपॉज पुरुषों में उम्र बढ़ने के साथ होने वाले भावनात्मक और शारीरिक परिवर्तन को कहते हैं। उम्र बढ़ने के साथ ही पुरुषों के कुछ विशेष किस्म के हार्मोनों में बदलाव देखे जाते हैं। एंड्रोपॉज को मेल मेनोपॉज, उम्र बढ़ने के साथ एंड्रोजन के गिरने से या वीरोपॉज भी कहा जाता है। विशेषज्ञों के मुताबिक दरअसल एंड्रोपॉज सही शब्द नहीं है, क्योंकि यह प्रक्रिया मेनोपॉज की तरह सभी पुरुषों में नहीं देखी जाती। न ही यह प्रजनन क्षमता समाप्त होने पर अचानक आ जाती है। यह उम्र बढ़ने के साथ कई पुरुषों में होने वाली सामान्य प्रक्रिया है और यह उम्र बढ़ने के साथ-साथ बढ़ती जाती है।

 

[इसे भी पढ़ें: पुरुषों में रजोनिवृति के लक्षण]

 

पुरुषों में रजोनिवृति की उम्र

40 से 49 साल की उम्र में 2 से 5 प्रतिशत इसी तरह 50 से 59 के बीच की अवस्था के साथ 6 से 40 प्रतिशत, 60-69 में 20 से 45 प्रतिशत, 70-79 में 3 से 4 और 70 प्रतिशत के बीच बढ़ती जाती है। इसी तरह 80 साल की उम्र में हाईपोगोनेडिज्म के गिरने की दर 91 प्रतिशत तक होती है।

रोजनिवृति के कारण

पुरुषों में रजोनिवृति की पहचान स्वभाविक रुप से हो सकती है। ज्यादातर मामलों में रजोनिवृति की पहचान डिप्रेशन, डिमेंशिया व मोटापे की वजह से होती है। कुछ बीमारियां जो हृदय व फेफड़ों पर हमला करती हैं जिससे टेस्टोस्टेरोन हार्मोन पर असर पड़ता है। जिन पुरुषों को कैंसर होता है उनमें टेस्टोस्टेरोन के स्तर में गिरावट का खतरा बढ़ जाता है।

 

[इसे भी पढ़ें: पुरुष रजोनिवृति की संभावित अवधि]

 

पुरुषों में रजोनिवृति के लक्षण

पुरुषों व महिलाओं में रजोनिवृति के लक्षण एक ही जैसे होते हैं, बस पुरुषों के लक्षण ज्यादा तीव्र नहीं होते हैं। रात को पसीना आना, चक्कर आना, हॉट फलैशेज, जोड़ो में दर्द साथ ही पुरुषों में भावनात्मक लक्षण भी दिखाई देते हैं जैसे मूड में बदलाव, चिडचिड़ापन, डिप्रेशन आदि।

 

क्‍या होते हैं बदलाव

हार्मोनों में बदलाव होता है जिससे सेक्स क्षमता पर असर होता है। 80 प्रतिशत पुरुषों में टेस्टोस्टेरोन के स्तर के गिरने से लीबीदो (सेक्स इच्छा को नियत्रिंत करता है) पर सीधा प्रभाव पड़ता है। ऐसी अवस्था में पुरुषों को तुरंत डॉक्टरों से संपर्क करना चाहिए। इससे पुरुषों को इस समस्या से निकलने में आसानी हो सकती है।

 

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