प्रोटीन की कमी से बुढ़ापे में मसूड़ों की परेशानी

By  , ओन्‍ली माई हैल्‍थ सम्पादकीय विभाग
Oct 03, 2012

protein ki kami se budhaape me masoodo ki pareshani

 

Protein ki kami se budhaape me masoodo ki pareshani 
प्रोटीन की कमी से बुढ़ापे में मसूड़ों की परेशानी 
अगर आपके शरीर में प्रोटीन की कमी है तो आपको बुढापे में मसूडों की बीमारी हो सकती है। हालांकि मसूडों की समस्या किसी भी उम्र में हो सकती है लेकिन प्रोटीन की कमी के कारण ज्यादातर मसूडों की समस्या बुढापे में ही होती है। यदि शरीर में डेल-1 प्रोटीन का स्तर कम है तो बुढापे में पेरियोडोंटाइटिस नामक मसूडों की बीमारी हो सकती हैं। इसमें मसूडों से खून निकलता है और दांतों के आसपास की हड्डियां कमजोर हो जाती हैं। इस बीमारी में मुंह के कीटाणुओं के प्रति अवरोधक तंत्र ज्यादा सक्रिय हो जाता है। 


शोध के अनुसार – 
लंदन में हुए एक शोध के अनुसार पेरियोडोंटाइटिस एक सामान्य बीमारी है जो कि उम्र बढने के साथ होती है। लेकिन शरीर में डेल-1 प्रोटीन की कमी के कारण मसूडों की यह बीमारी होती है। डेल-1 प्रोटीन शरीर में प्रतिरोधक तंत्र को रोकने का काम करता है। यह प्रोटीन रोग-प्रतिरोधक क्षमता मजबूत करता है। डेल-1 प्रोटीन श्वेत रक्त कोशिकाओं को मुंह के ऊतकों से चिपकने और मसूडों पर हमला करने से रोकता है। इसके अलावा डेल-1 प्रोटीन की कमी से हड्डियां भी कमजोर हो जाती हैं। 

प्रोटीन की कमी से मसूडों की अन्य बीमारियां – 

पेरियोडोंटाइटिस-  

यह मसूडों की सबसे गंभीर बीमारी है जो कि 35 की उम्र के बाद लोगों को होती है। पेरियोडोंटाइटिस की समस्या ज्यादातर प्रोटीन की कमी के कारण भी होती है लेकिन, जिंजिवाइटिस का अगर उपचार न किया जाए तो यह गंभीर रूप लेकर पेरियोडोंटाइटिस में बदल जाती है। पेरियोडोंटाइटिस से पीड़ित व्यक्ति में मसूड़ों की अंदरूनी सतह और हड्डियां दांतों से दूर हो जाती हैं और दांतों के बीच ज्यादा गैप बन जाते हैं। दांतों और मसूड़ों के बीच स्थित इस छोटी-सी जगह में गंदगी इकट्ठी होने लगती है, जिससे मसूड़ों और दांतों में संक्रमण फैल जाता है। यदि ठीक से उपचार न किया जाए तो दांतों के चारों ओर मौजूद ऊतक नष्ट होने लगते हैं और दांत गिरने लगते हैं।

जिंजिवाइटिस-  

यह मसूड़ों की सबसे आम समस्या है। इसमें मसूड़े सूखकर लाल हो जाते हैं और कमजोर पड़ जाते हैं। कई लोगों में दांतों के बीच में उभरा हुआ तिकोना क्षेत्र बन जाता है जिसे पेपीले कहते हैं। इसका मुख्य कारण सफेद रक्त कोशिकाओं का जमाव, बैक्टीरिया का संक्रमण और प्लॉंक हो सकता है। जिंजिवाइटिस से बचने के लिए जरूरी है कि मुंह की साफ-सफाई का खास ख्याल रखा जाए। यह प्रोटीन की कमी के कारण होता है। 


पायरिया- 
अगर ब्रश करने या खाना खाने के बाद मसूड़ों से खून बहता है तो यह पायरिया के लक्षण हैं। इसमें मसूड़ों के ऊतक सड़कर पीले पड़ने लगते हैं। इसका मुख्य कारण दांतों की ठीक से सफाई न करना है। गंदगी की वजह से दांतों के आसपास और मसूड़ों में बैक्टीरिया पनपने लगते हैं। पायरिया से बचने के लिए जरूरी है कि मुंह की सफाई का विशेष ध्यान रखा जाए। कुछ भी खाने के बाद ब्रश करने की आदत डाल लीजिए।


मसूड़ों की बीमारी किसी भी उम्र में हो सकती है। लेकिन प्रोटीन की कमी से बुढापे में मसूडों की बीमारी का खतरा बढ जाता है। प्रोटीन की कमी से हर चार में से तीन लोग मसूड़ों की बीमारी से पीड़ित होते हैं। इससे बचने के लिए प्रतिदिन 1000 मिलीग्राम प्रोटीन और विटामिन का सेवन करना चाहिए हैं। मसूडों की समस्या से निपटने के लिए अपने चिकित्सक से संपर्क कीजिए। 

अगर आपके शरीर में प्रोटीन की कमी है तो आपको बुढापे में मसूडों की बीमारी हो सकती है। हालांकि मसूडों की समस्या किसी भी उम्र में हो सकती है लेकिन प्रोटीन की कमी के कारण ज्यादातर मसूडों की समस्या बुढापे में ही होती है। यदि शरीर में डेल-1 प्रोटीन का स्तर कम है तो बुढापे में पेरियोडोंटाइटिस नामक मसूडों की बीमारी हो सकती हैं। इसमें मसूडों से खून निकलता है और दांतों के आसपास की हड्डियां कमजोर हो जाती हैं। इस बीमारी में मुंह के कीटाणुओं के प्रति अवरोधक तंत्र ज्यादा सक्रिय हो जाता है। 

 

[इसे भी पढ़े : मसूड़ों की बीमारी]

 

शोध के अनुसार – 

लंदन में हुए एक शोध के अनुसार पेरियोडोंटाइटिस एक सामान्य बीमारी है जो कि उम्र बढने के साथ होती है। लेकिन शरीर में डेल-1 प्रोटीन की कमी के कारण मसूडों की यह बीमारी होती है। डेल-1 प्रोटीन शरीर में प्रतिरोधक तंत्र को रोकने का काम करता है। यह प्रोटीन रोग-प्रतिरोधक क्षमता मजबूत करता है। डेल-1 प्रोटीन श्वेत रक्त कोशिकाओं को मुंह के ऊतकों से चिपकने और मसूडों पर हमला करने से रोकता है। इसके अलावा डेल-1 प्रोटीन की कमी से हड्डियां भी कमजोर हो जाती हैं। 

 

[इसे भी पढ़े : प्रोटीन की कमी से मसूड़ों की परेशानी]

 

प्रोटीन की कमी से मसूडों की अन्य बीमारियां – 

 

पेरियोडोंटाइटिस-  

यह मसूडों की सबसे गंभीर बीमारी है जो कि 35 की उम्र के बाद लोगों को होती है। पेरियोडोंटाइटिस की समस्या ज्यादातर प्रोटीन की कमी के कारण भी होती है लेकिन, जिंजिवाइटिस का अगर उपचार न किया जाए तो यह गंभीर रूप लेकर पेरियोडोंटाइटिस में बदल जाती है। पेरियोडोंटाइटिस से पीड़ित व्यक्ति में मसूड़ों की अंदरूनी सतह और हड्डियां दांतों से दूर हो जाती हैं और दांतों के बीच ज्यादा गैप बन जाते हैं। दांतों और मसूड़ों के बीच स्थित इस छोटी-सी जगह में गंदगी इकट्ठी होने लगती है, जिससे मसूड़ों और दांतों में संक्रमण फैल जाता है। यदि ठीक से उपचार न किया जाए तो दांतों के चारों ओर मौजूद ऊतक नष्ट होने लगते हैं और दांत गिरने लगते हैं।

 

 

जिंजिवाइटिस-  

यह मसूड़ों की सबसे आम समस्या है। इसमें मसूड़े सूखकर लाल हो जाते हैं और कमजोर पड़ जाते हैं। कई लोगों में दांतों के बीच में उभरा हुआ तिकोना क्षेत्र बन जाता है जिसे पेपीले कहते हैं। इसका मुख्य कारण सफेद रक्त कोशिकाओं का जमाव, बैक्टीरिया का संक्रमण और प्लॉंक हो सकता है। जिंजिवाइटिस से बचने के लिए जरूरी है कि मुंह की साफ-सफाई का खास ख्याल रखा जाए। यह प्रोटीन की कमी के कारण होता है। 

 

[इसे भी पढ़े : हल्के में मत लीजिए मसूड़ों की बीमारी को]

 

पायरिया- 

अगर ब्रश करने या खाना खाने के बाद मसूड़ों से खून बहता है तो यह पायरिया के लक्षण हैं। इसमें मसूड़ों के ऊतक सड़कर पीले पड़ने लगते हैं। इसका मुख्य कारण दांतों की ठीक से सफाई न करना है। गंदगी की वजह से दांतों के आसपास और मसूड़ों में बैक्टीरिया पनपने लगते हैं। पायरिया से बचने के लिए जरूरी है कि मुंह की सफाई का विशेष ध्यान रखा जाए। कुछ भी खाने के बाद ब्रश करने की आदत डाल लीजिए।

 

 

मसूड़ों की बीमारी किसी भी उम्र में हो सकती है। लेकिन प्रोटीन की कमी से बुढापे में मसूडों की बीमारी का खतरा बढ जाता है। प्रोटीन की कमी से हर चार में से तीन लोग मसूड़ों की बीमारी से पीड़ित होते हैं। इससे बचने के लिए प्रतिदिन 1000 मिलीग्राम प्रोटीन और विटामिन का सेवन करना चाहिए हैं। मसूडों की समस्या से निपटने के लिए अपने चिकित्सक से संपर्क कीजिए। 

 

 

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