गर्भावस्‍था में अत्‍यधिक रक्‍तस्राव और अहसनीय सिरदर्द को न करें नजरअंदाज

By  , ओन्‍ली माई हैल्‍थ सम्पादकीय विभाग
Nov 27, 2012
Quick Bites

  • तीसरे महीने में सरदर्द, साफ न दिखना, पेट में सूजन को नजरंअदाज न करें। 
  • फीटल किकिंग कम हो जाये तो चिकित्‍सक से संपर्क करना बहुत जरूरी है।
  • डायरिया, गले में दर्द, सर्दी, खांसी, कमज़ोरी, उल्टियां फ्लू के संकेत हैं।
  • अधिक रक्‍तस्राव होने से मिसकैरेज की संभावना बहुत अधिक रहती है।

गर्भवती होने के बाद आपाके विशेष ध्‍यान रखने की जरूरत होती है, क्‍योंकि इस दौरान हार्मोन में बदलाव होने कारण शरीर में भी कई तरह के बदलाव होते हैं। बहुत सी महिलाआं में गर्भावस्‍था बिना किसी परेशानी के सामान्य तरीके से होती है और कुछ महिलाओं में यह बहुत ही गंभीर बेचैनी होती है।

यह ज़रूरी है कि प्रेग्नेंसी के साथ ही आप प्रेग्नेंसी के खतरों को पहचान लें। लेकिन एक सवाल जो कि हर प्रेग्नेंट महिला करती है वो यह है कि तत्काल चिकित्सा के लक्षण और डाक्टर से मिलने तक की प्रत्याशा को अलग कैसे किया जाये। विशेषज्ञ ऐसी सलाह देते हैं कि कुछ ऐसे लक्षणों को नज़रअंदाज नहीं करना चाहिए। आइए हम आपको उसकी जानकारी देते हैं।

 

गर्भावस्‍था और समस्‍यायें

गर्भधारण के बाद तीसरे महीने के दौरान असहनीय सरदर्द, कभी कभी आंखों से साफ ना दिखना, पेट में सूजन और तेज़ दर्द को बिलकुल भी नजरअंदाज न करें। इस प्रकार के लक्षण आपके लिए नुकसानदेह हो सकते हैं। इस प्रकार के लक्षण ब्लड प्रेशर के बढ़ने से या यूरीन में प्रोटीन की अधिक मात्रा से हो सकते है और यह लक्षण अकसर प्रेग्नेंसी के 20 वें हफ्ते में होते है।

 

बच्‍चे का मोशन

बच्चे के घूमने की तीव्रता कम हो जाये तो यह इसे बिलकुल भी नजरअंदाज न करें। अगर बच्चा गर्भ में अधिक घूम नहीं रहा है तो इसका अर्थ है कि उसे प्लेसेन्टा से पर्याप्त मात्रा में आक्सीजन नहीं मिल रही है। बच्चे के प्रहार को गिनकर भी आप बच्चे की गति का अंदाज़ा लगा सकते हैं लेकिन ऐसी कोई निश्चित गिनती नहीं है कि बच्चे को कितनी बार प्रहार करना चाहिए। मोटे तौर पर आपको सिर्फ बच्चे की गति पर ध्यान देना चाहिए। बच्चे की गति में किसी अजीब परिवर्तन की स्थिति में डाक्टरी सलाह लेना ज़रूरी हो जाता है।

 

पानी का आना

कभी-कभी ऐसा एहसास होता है जैसे यूरीन की जगह पानी आ रहा है लेकिन यह सिर्फ यूटेरस के सूजे होने की वजह से और ब्लैडर के भारीपन से होता है। वास्तव में यह अलग अलग स्थितियों पर निर्भर करता है।  कभी-कभी यह पानी की भाप की तरह निकलता है। अगर पानी अधिक समय तक निकलता है तो शायद आपका पानी का बैग फट गया है और ऐसे में आपको तुरंत अस्पताल जाना चाहिए।


उल्टियां और कमज़ोरी

बार बार इस प्रकार उल्टियों का आना कि आप कोई भी काम ना कर सकें खतरनाक हो सकता है। विशिष्ट विशेषज्ञों का ऐसा मानना है कि ऐसी स्थितियों में आप कुपोषण के शिकार हो सकते हैं। इससे आगे चल कर पानी कि कमी हो सकती है और बच्चे के जन्म के दौरान परेशानियां भी हो सकती हैं। लेकिन ऐसी स्थितियों में हमेशा डाक्टर के सम्पर्क में रहने की सलाह दी जाती है। विशेषज्ञ ऐसी स्थितियों में आपको उपयुक्त आहार लेने का तरीका बता सकते हैं जिससे कि मां और होने वाले बच्चे दोनों का स्वास्थ्य अच्छा रहे।

 

फ्लू के संकेत

ऐसा माना गया है कि प्रेग्नेंट महिलाओं में फ्लू का खतरा सामान्य लोगों की तुलना में अधिक रहता है।  इसका सामान्य कारण है प्रेग्नेंसी से शरीर की प्रतिरोध प्रणाली में तनाव उत्पन्न होता है।  ऐसे में फ्लू से होने वाली परेशानियां भी बढ़ जाती हैं। फ्लू के सामान्य लक्षण हैं - डायरिया, गले में दर्द, सर्दी, खांसी और सर्दी, कमज़ोरी, उल्टियां। 

 

रक्त की कमी

विशेषज्ञ ऐसी सलाह देते हैं कि प्रेग्नेंसी के दौरान रक्त अलग अलग समय पर अलग परिभाषा देता है। अगर आपको मेंस्रूअल जैसा दर्द होता है या पेट में बहुत तेज़ दर्द होता है तो यह अस्थानिक प्रेग्नेंसी के लक्षण हो सकते हैं।  विशेषज्ञ ऐसा बताते हैं कि इस तरह की प्रेंग्नेंसी तब होती है जब अण्डे यूटेरस के बाहर फर्टिलाइज़्ड हो और इससे शुरूवात के 3 महीनों के दौरान सुस्ती का अनुभव होता है। ब्लीडिंग हमेशा ही एक गंभीर समस्या रहती है लेकिन अगर यह दर्द के साथ होती है तो मिसकैरेज की बहुत अधिक सम्भावना रहती है।

 

प्रेग्नेंसी के दौरान हमेशा ही व्यक्ति स्थितियों को लेकर निश्चिंत नहीं रह सकता। अगर आप बहुत ही असहज महसूस कर रहे हैं तो ऐसे में अपनी आंतरिक भावनाओं को समझें और अपने स्वास्थ्य सेवा प्रदाता से सम्पर्क करें। इससे ना केवल आप निश्चित रहेंगे बल्कि आप असुरक्षित लक्षणों को भी पहचान सकेंगे।

 


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