प्‍लास्टिक के कप में चाय, नुपंसकता को बुलावा

By  , ओन्‍ली माई हैल्‍थ सम्पादकीय विभाग
Sep 13, 2012

plastic ke cup me chai napusankta ko bulawa

अक्‍सर हम दुकानों पर प्‍लास्टिक के बर्तनों में चाय पीते हैं। या फिर घर पर भी प्‍लास्टिक की परत चढ़े बर्तनों में खाना खाते हैं। लेकिन, ऐसा करना हमारी सेहत के लिए बेहद खतरनाक है। ताजा शोध के मुताबिक प्‍लास्टिक के कप में चाय पीना और प्‍लास्टिक कोटेड बर्तनों में भोजन करना नपुंसक बना सकता है।

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एक बड़े हिन्‍दी दैनिक ने इस खबर को छापा है। समाचार पत्र के मुताबिक बीएचयू के बायो केमिस्ट्री डिपार्टमेंट के शोधकर्ता प्रो. एस.पी.सिंह ने इस बात से पर्दा हटाया है। इस शोध में यह बात निकलकर सामने आई है कि प्लास्टिक में किसी भी गर्म चीज को खाने या पीने से उसमे से बिस फिनाल ए नाम का एक रसायनिक तत्त्‍व निकलता है, जो नपुंसक बना सकता है। चूहों पर इसका परीक्षण करने के बाद ही इस बात की पुष्टि की जा रही है।

शोध के नतीजे चौंकाने वाले हैं। 21 दिनों तक जिस चूहे को लगातार विस फिनाल ए दिया गया उसकी स्पर्म की मात्रा बेहद घट गई। और प्रजनन के बाद नंबर आफ बेबी की संख्या भी साधारण चूहों से आधी हो गयी। बिस फिनाल ए ने चूहों के जननांग कोशिकाओं को भी बेहद नुकसान पहुंचाया। इन नतीजों के दम पर शोधकर्ता दावा कर रहे हैं कि यही नियम इंसानों पर भी लागू होते हैं। उनका कहना है कि अगर इंसान भी प्‍लास्टिक के कप में चाय या प्‍लास्टिक कोटेड बर्तनों में लंबे समय तक खाना खाएंगे तो उनकी सेहत पर भी यही नकरात्‍मक असर पड़ेगा। नपुंसकता के साथ ही प्‍लास्टिक के ये कप डाईबेटिस, ब्रेन पर इफेक्ट या फिर हार्ट-अटैक का भी खतरा पैदा करते हैं।

प्लास्टिक में बिस फिनाल ए एक ऐसा रासायनिक तत्व होता है जो रक्त कणिकाओं में आसानी से मिलकर ये खतरे पैदा करता है। यह इतना मानव शरीर के कई हिस्सों में धीरे-धीरे असर करता है। पूरा रिसर्च अमेरिका के अफसेट बुक में भी प्रकाशित हो चुका है। विदेशों में भी अब इस विषय पर चर्चा की जा रही है।

 

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