अगर आप भी हैं ओवर-एक्टिव थायरॉइड की बीमारी से परेशान, तो करें ये 4 एक्सरसाइज

जिन लोगों का थायरॉइड ग्लैंड ज्यादा एक्टिव होने के कारण ज्यादा मात्रा में हर्मोन बनाने लगता है, उन्हें हायपरथायरॉइडिज्म का शिकार कहते हैं। थायरॉइड की इस समस्या में आपको एक्सरसाइज से काफी फायदा मिलता है। जानें कौन सी एक्सरसाइज हैं थायरॉइड में फायदेम

Anurag Anubhav
Written by: Anurag AnubhavUpdated at: Oct 15, 2019 15:22 IST
अगर आप भी हैं ओवर-एक्टिव थायरॉइड की बीमारी से परेशान, तो करें ये 4 एक्सरसाइज

थायरॉइड एक गंभीर बीमारी है, जो आपके शरीर को कई तरह से प्रभावित करती है। 'थायरॉइड' गले में मौजूद एक विशेष ग्रंथि है, जो थायरॉक्सिन नाम का हार्मोन बनाती है। ये हार्मोन आपके शरीर के ढेर सारे फंक्शन्स के लिए महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। अगर किसी व्यक्ति की थायरॉइड ग्रंथि ओवर-एक्टिव हो जाए और बहुत ज्यादा मात्रा में थायरॉक्सिन हार्मोन बनाने लगे, तो उसे हायपरथायरॉइडिज्म की समस्या कहते हैं। अगर आप इस बीमारी से प्रभावित हैं, तो दवा के साथ-साथ आपको कुछ एक्सरसाइज का भी अभ्यास करते रहना चाहिए। इन एक्सरसाइज को करने से आपका थायरॉइड शांत होता है और हार्मोन की मात्रा कंट्रोल होने लगती है। इससे आप जल्दी ठीक होते हैं और आपको स्वास्थ्य संबंधी खतरे भी नहीं होते हैं।

हायपरथायरॉइडिज्म ग्रस्‍त लोगों के लिए व्‍यायाम बहुत जरूरी होता है। थायराइड ग्रंथि के ज्‍यादा सक्रिय होने से मेटाबॉलिज्‍म का स्‍तर भी कम हो जाता है। व्‍यायाम करने से थायराइड ग्रंथि के प्रति संवेदनशील टिशूज ज्‍यादा सक्रिय हो जाते हैं। कुछ ऐसे व्‍यायाम हैं जिनको करने से ओवरएटिव थायरॉइड फंक्‍शन सुचारु होता है।

हायपरथायरॉइडिज्म और एक्‍सरसाइज के तरीके

स्‍टेप एरोबिक्‍स

हायपरथायरॉइडिज्म के लिए स्‍टेप एरोबिक बहुत ही फायदेमंद व्‍यायाम है। इसके स्‍टेप्‍स को हायपरथायरॉइडिज्म के बहुत कम स्‍तर पर किया जा सकता है। इसके लिए सबसे पहले अपने शरीर को सीधा रखिए, फिर धीरे-धीरे अपने दाहिने पैर को ऊपर उठाइए। उसके बाद बाएं पैर को ऊपर उठाइए। शुरुआत में अपने पैरों को कम ऊपर उठाइए उसके बाद पैरों को ज्‍यादा से ज्‍यादा ऊपर उठाने की कोशिश कीजिए। इस व्‍यायाम को करते वक्‍त आपके कदम सही पड़ें इसके लिए संगीत का सहारा भी लिया जा सकता है। इस व्‍यायाम को 10-15 मिनट तक किया जा सकता है।

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पुश-अप्स

हायपरथायरॉइड के लिए पुश-अप एक अच्‍छा व्‍यायाम का प्रकार है। चूंकि हायपरथायरॉइडिज्‍म में आदमी का वजन घटता है इसलिए पुश-अप से वजन बढ़ाया जा सकता है। इस एक्‍सरसाइज को करने के लिए पैर और हाथ के सहारे जमीन पर टिका दीजिए, आपका पूरा शरीर सीधा होना चाहिए। ध्‍यान रहे कि आपकी बॉडी जमीन को न छुए। आपकी कोहनी लगभग 90 डिग्री का कोण बना रही हो। फिर अपने सीने को हाथों के सहारे धीरे-धीरे जमीन के पास लाइए। शुरूआत में इस एक्‍सरसाइज को 10 से बार कीजिए, उसके बाद अपनी सुविधानुसार इसे धीरे-धीरे बढ़ाइए।

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चाइल्‍ड पोज

इस कसरत को करने से न केवल हायपरथायरॉइडिज्‍म में फायदा होता है बल्कि तनाव भी समाप्‍त होता है। इस पोज के लिए सबसे पहले घुटनों के बल झुक जाइए, दोनों पैरों की उंगलियां एक दूसरे को छूएं। उसके बाद फर्श पर अपने माथे को रखिए, इस बीच आपके दोनों हाथ सिर के दोनों साइड में हों।

कुर्सी आसन

हायपरथायरॉइडिज्‍म में योगा के कुछ मुद्राओं को भी अपनाया जा सकता है। योगा की ये मुद्राएं हायपरथायरॉइडिज्‍म में सुधार कर सकती हैं। इस मुद्रा को करने के लिए सबसे पहले अपने दोनों पैरों को सीधा करके खड़े हो जाइए। अपने दोनों हाथों को सर के ऊपर उठा लीजिए, दोनों हाथों की हथेलियां एक दूसरे से चिपकी हुई होनी चाहिए। फिर सांसों को अंदर की तरफ खींचते हुए आगे की तरफ झुककर घुटनों को छूने की कोशिश कीजिए, उसके बाद सांसों को बाहर निकालते हुए सामान्‍य मुद्रा में आइए। इस क्रिया को 10 से 12 बार दोहराइए।

हायपरथायरॉइड को कंट्रोल करने के लिए व्‍यायाम से अच्‍छा तरीका नहीं हो सकता है। व्‍यायाम के इन आसनों को करने से पहले एक बार अपने एक्‍सपर्ट ट्रेनर से सलाह अवश्‍य लीजिए।

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