नस्लवाद से मानसिक स्वास्थ्य पर होता है असर

By  , ओन्‍ली माई हैल्‍थ सम्पादकीय विभाग
Nov 22, 2012

nasalwaad se manshik swastha par hota hai asar

नस्लवाद का सामना करने वालों के मानसिक स्वास्थ्य पर इसका बुरा असर होता है। ऑस्ट्रेलिया में किया गया एक सर्वेक्षण इस बात की पुष्टि करता है। 

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विक्टोरिया प्रांत में मेलबर्न विश्वविद्यालय, आव्रजन विभाग और कुछ अन्य संस्थाओं की ओर से विभिन्न मूल के प्रवासियों के बीच यह सर्वेक्षण कराया गया। इस सर्वेक्षण में सबसे अहम बात यह निकलकर आई कि किसी भी तरह के नस्ली बुरे बर्ताव का असर सीधा मस्तिष्‍क पर पड़ता है।

शोधकर्ताओं का कहना था कि महीने में या इससे कम मियाद में नस्लवाद से दो-चार होते हैं वे दूसरे लोगों के मुकाबले अधिक तनाव में रहते हैं।

करीब 1140 लोगों पर किए गए इस सर्वेक्षण के अनुसार करीब दो तिहाई लोगों ने माना कि बीते साल उन्‍हें नस्‍लवाद का शिकार बनना पड़ा। 65 फीसदी से अधिक लोगों ने यह भी माना कि नस्‍लवाद के चलते उनके जीवन पर बुरा असर पड़ा है।

इसमें 45 फीसदी से अधिक लोगों ने नस्लवाद को लेकर काफी चिंतित रहने की बात भी स्‍वीकारी। सर्वेक्षण रिपोर्ट के अनुसार ज्यादातर लोगों ने एक से अधिक बार नस्ली र्दुव्‍यवहार का सामना किया। 40 फीसदी लोगों को एक साल के भीतर छह या इससे अधिक बार नस्लवाद का सामना करना पड़ा।

सर्वेक्षण में यह भी कहा गया कि 35 फीसदी लोगों ने सार्वजनिक स्थानों, 32 फीसदी लोगों ने कार्यस्थलों, 30 फीसदी लोगों ने दुकानों और 29 फीसदी लोगों ने सरकारी यातायात में नस्लवाद का सामना किया। शिक्षा से जुड़े स्थानों पर 22 फीसदी लोगों ने नस्लवाद का सामना किया, जबकि खेल स्थलों पर 20 फीसदी तथा आवासीय इलाकों में 18 फीसदी लोगों को नस्ली बुरे बर्ताव का सामना करना पड़ा।

रिपोर्ट में कहा गया है, महिला की तुलना में पुरुषों के नस्लवाद का सामना करने की अधिक आशंका होती है। शहरी इलाकों में रहने वालों को भी नस्ली दुर्व्‍यवहार का अधिक सामना करना पड़ता है।

 

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