मोबाइल से ज्‍यादा करीबी अच्‍छी नहीं

By  , ओन्‍ली माई हैल्‍थ सम्पादकीय विभाग
Mar 04, 2013
मोबाइल और इंटरनेट की लत कितनी खतरनाक है, इसका अंदाजा शायद आपको न हो। अमेरिका के मीडिया संस्‍थानों ने गैजेट्स के साइड-इफेक्‍ट्स गिनाए हैं। 

mobile se zyada kareebi achchhi nahi'न्‍यूयार्क टाइम्‍स' ने विशेषज्ञों के हवाले से लिखा है कि सेलफोन से दिन भर चिपके रहना, एसएमएस भेजना व फेसबुक-ट्विटर पर अपडेट लिखना, सूचनाओं का आदान-प्रदान कम और ध्‍यान भटकाना अधिक है। लोग जब फोन या इंटरनेट के जरिए औरों के संपर्क में रहते हैं तो वे मतलब की बातें कम और इधर-उधर की गपशप अधिक करते हैं। इससे उनका दिमाग बेमतलब की बातों में उलझ जाता है और वे किसी एक काम को भी ढंग से नहीं कर पाते। 




अखबार ने यह भी कहा कि फेसबुक और ट्विटर जैसी सोशल साइट्स का अत्‍यधिक इस्‍तेमाल लोगों को 'सोशल मीडिया एंक्‍जाइटी डिस्‍ऑर्डर' का मरीज बना दिया है। इस बीमारी में इनसान अपनी तुलना दूसरों से करने लगता है। स्‍टेटस अपडेट या फोटो पर औरों से कम लाइक मिलने तथा फोन कॉल या ईमेल के अनदेखा रह जाने पर उसे बेचैनी महसूस होने लगती है। वह खुद को औरों से कमतर आंकने लगता है। 'एबीसी न्‍यूज' के अनुसार मोबाइल और इंटरनेट नींद में खलल के लिए भी जिम्‍मेदार हो सकते हैं। जो लोग रात में सोने से पहले इनका इस्‍तेमाल करते हैं उनकी आंख देर से लगती है। 




चैनल ने विशेषज्ञों के हवाले से बताया कि मोबाइल की स्‍क्रीन से नीला प्रकाश निकलता है जो मस्तिष्‍क को मुस्‍तैद रहने की हिदायत देता है। इससे शरीर में स्‍लीप-हॉर्मोन मेलाटोनिन का स्राव देरी से होता है और व्‍यक्ति देरी से सोता है। 'फोर्ब्‍स' मैगजीन ने 2012 में हुए एक अध्‍ययन का जिक्र किया है, जिसमें मोबाइल और इंटरनेट के इस्‍तेमाल को रचनात्‍मकता में गिरावट से जोड़कर देखा गया है।




Read More Articles on Health News in Hindi.
Loading...
Is it Helpful Article?YES39 Votes 4977 Views 0 Comment
संबंधित जानकारी
  • सभी
  • लेख
  • स्लाइडशो
  • वीडियो
  • प्रश्नोत्तर
I have read the Privacy Policy and the Terms and Conditions. I provide my consent for my data to be processed for the purposes as described and receive communications for service related information.
This website uses cookie or similar technologies, to enhance your browsing experience and provide personalised recommendations. By continuing to use our website, you agree to our Privacy Policy and Cookie Policy. OK