मेनोपॉजल ऑस्टियोपोरोसिस के कारण हो सकती है महिलाओं को घुटनों में दर्द की समस्या

By  , ओन्‍ली माई हैल्‍थ सम्पादकीय विभाग
Apr 06, 2018
Quick Bites

  • उम्र बढ़ने के साथ घुटनों के बीच मौजूद कार्टिलेज घिस कर सूखने लगता है।
  • मेनोपॉज के बाद स्त्रियों के शरीर में फीमेल हॉर्मोन एस्ट्रोजेन का स्राव कम हो जाता है।
  • शरीर का अधिक वजन भी इस समस्या के लिए जिम्मेदार है।

आजकल ज्यादातर लोग घुटने के दर्द से परेशान रहते हैं, इसकी वजह से उनकी रोजमर्रा की दिनचर्या भी प्रभावित होती है। अगर पहले से ही सजगता बरती जाए तो इस समस्या से बचाव संभव है। पहले ऐसा माना जाता था कि घुटने का दर्द बढती उम्र की समस्या है, पर आजकल युवाओं में भी इसके लक्षण नजर आने लगे हैं। आधुनिक जीवनशैली की व्यस्तता और खानपान की गलत आदतों की वजह से आबादी का बड़ा हिस्सा इसकी गिरफ्त में आ रहा है।

क्या है समस्या

उम्र बढ़ने के साथ घुटनों के बीच मौजूद कार्टिलेज घिस कर सूखने लगता है। इससे घुटने मोड़ने और चलने-फिरने में तकलीफ होती है। 60 साल की उम्र के बाद ज्य़ादातर लोगों को ऐसी परेशानी का सामना करना पडता है। इसे प्राइमरी ऑस्टियो ऑथ्राइटिस कहा जाता है। आजकल एक्सरसाइज की कमी, बढते वजन, खानपान में कैल्शियम और विटमिन डी-3 के अभाव की वजह से युवाओं को भी घुटने का दर्द परेशान करने लगा है। ऐसी समस्या को रुमेटाइड आर्थराइटिस कहा जाता है।

इसे भी पढ़ें:- महिलाओं को होता है इन 10 बीमारियों का सबसे ज्यादा खतरा

मेनोपॉज के बाद समस्या

इसके अलावा मेनोपॉज के बाद स्त्रियों को भी ऐसी समस्या होती है, जिसे पोस्ट मेनोपॉजल ऑस्टियोपोरोसिस कहा जाता है। दरअसल मेनोपॉज के बाद स्त्रियों के शरीर में फीमेल हॉर्मोन एस्ट्रोजेन का स्राव कम हो जाता है। यह हॉर्मोन उनकी हड्डियों के लिए सुरक्षा कवच का काम करता है। इसकी मात्रा घटने की वजह से हड्डियों से कैल्शियम का रिसाव होने लगता है। यह शरीर का अपना मेकैनिज्म है, जब खून में कैल्शियम की कमी होती है तो उसे पूरा करने के लिए हड्डियों से रक्त कैल्शियम खींचने लगता है, नतीजतन हड्डियां कमजोर पड़ जाती हैं। इसके अलावा कैल्शियम के मेटाबॉलिज्म में भी यह हॉर्मोन मददगार साबित होता है।

यूट्रस रिमूवल सर्जरी

यूट्रस रिमूवल सर्जरी की वजह से भी स्त्रियों के शरीर में एस्ट्रोजन हॉर्मोन की कमी हो जाती है, जो अंतत: घुटने के दर्द का कारण बन जाती है। जब शरीर में एस्ट्रोजेन की कमी हो जाती है तो खानपान में कैल्शियम की मात्रा बढाने पर भी उसका लाभ हड्डियों को नहीं मिल पाता। इसी वजह से मेनोपॉज के बाद स्त्रियों को घुटने के दर्द की समस्या परेशान करने लगती है।

इसे भी पढ़ें:- महिलाओं को यूटीआई में कभी नहीं करनी चाहिए ये 6 गलतियां

वजन ज्यादा होना

शरीर का अधिक वजन भी इस समस्या के लिए जिम्मेदार है। दरअसल अधिक वजन के दबाव से शॉक एब्जॉर्विंग आर्टिक्यूलर कार्टिलेज घिसने लगते हैं। कार्टिलेज प्रोटीन से बना एक कोमल पदार्थ है, जो घुटने की दोनों हड्डियों के बीच लचीली गद्दी का काम करता है। यह लगभग एक सेंटीमीटर मोटा होता है। इसके घिसने से हड्डियां आपस में टकराने लगती हैं, जिससे पैरों के जोड अंदर की ओर झुक जाते हैं, जिससे उनकी बनावट में टेढापन आ जाता है और पैरों में दर्द भी होता है। इसके लिए आनुवंशिक कारण भी जिम्मेदार हैं। उठने-बैठने और खानपान के गलत तरीके और सही फुटवेयर का चुनाव न करने की वजह से भी यह समस्या होती है।

दर्द का निदान

घुटनों का दर्द होने पर पहले मरीज को दवाओं, संतुलित आहार और फिजियोथेरेपी की मदद से आराम दिलाने की कोशिश की जाती है। कई तरह की एक्सरसाइज व एलाइनमेंट करेक्शन थेरेपी की मदद से घुटने का अलाइनमेंट भी ठीक किया जा सकता है। दर्द असहनीय न हो तो सबसे पहले घुटने की झिल्ली साइनोवियल मेंब्रेन को हटाकर और आर्थोस्कोपी की मदद से जोड़ के प्रभावित हिस्से को साफ करने से ही मरीजों को काफी राहत मिल जाती है। यदि कार्टिलेज कम क्षतिग्रस्त है और घुटने के जोड़ का अलाइनमेंट बिगड़ गया हो तो हाई टिबियल ऑस्टियोटॉमी  की मदद से जोड़ों को सीधा किया जाता है। इस छोटे से ऑपरेशन से कुछ वर्षों तक दर्द से काफी राहत मिल जाती है।

ऐसे अन्य स्टोरीज के लिए डाउनलोड करें: ओनलीमायहेल्थ ऐप

Read More Articles On Women Health in Hindi

Loading...
Is it Helpful Article?YES1286 Views 0 Comment
संबंधित जानकारी
  • सभी
  • लेख
  • स्लाइडशो
  • वीडियो
  • प्रश्नोत्तर
I have read the Privacy Policy and the Terms and Conditions. I provide my consent for my data to be processed for the purposes as described and receive communications for service related information.
This website uses cookie or similar technologies, to enhance your browsing experience and provide personalised recommendations. By continuing to use our website, you agree to our Privacy Policy and Cookie Policy. OK