खुदकुशी रोकने की बनेगी दवा

By  ,  दैनिक जागरण
Sep 09, 2011

Suicideहर साल दुनिया भर में लाखों लोग तनाव और अवसाद का शिकार होकर अपनी जिंदगी खत्म कर लेते हैं। उनके इस भयानक इरादे का करीबी लोगों को भनक तक नहीं लगती।

 

लेकिन अब इस दिशा में बड़ी उम्मीद जगी है। अब यह जानना संभव हो सकेगा कि व्यक्ति कहीं आत्महत्या जैसा कदम उठाने की ओर तो नहीं बढ़ रहा। ऐसा शरीर में मौजूद एक खास प्रोटीन का स्तर जान कर किया जा सकता है। वैज्ञानिकों ने इस प्रोटीन की पहचान कर ली है।

 

कनाडा के शोधकर्ताओं ने उस रहस्य को सुलझा लेने का दावा किया है जिसके कारण लोग आत्महत्या करते हैं या बहुत गहरे अवसाद का शिकार हो जाते हैं। एक अध्ययन के दौरान शोधकर्ताओं ने पाया कि जो लोग आत्महत्या करते हैं, उनके दिमाग में एक खास तरह की प्रोटीन का स्तर बढ़ जाता है।

 

यूनिवर्सिटी आफ वेस्टर्न ओंटारियो के माइकल पोल्टर और चा‌र्ल्टन यूनिवर्सिटी के हाइमी एनिसमैन के नेतृत्व वाले एक अंतरराष्ट्रीय शोध दल ने अपने अध्ययन के दौरान पाया कि उस खास प्रोटीन का स्तर बढ़ने का उस विशेष जीन पर प्रभाव पड़ता है जो तनाव और चिंता को नियंत्रित करता है।

शवों के पोस्टमार्टम के दौरान इन लोगों ने पाया कि अन्य कारणों से मरने वालों की तुलना में आत्महत्या करने वालों में उस खास प्रोटीन का स्तर अधिक था जो तनाव और चिंता को नियंत्रित करने वाले जीन को प्रभावित करता है। शोधकर्ताओं ने बताया कि इस प्रोटीन से उस विशेष  जीन में रासायनिक परिवर्तन होता है जिसे हम 'इपिजेनोमिक रेगुलेशन' प्रणाली के रूप में जानते हैं। इस परिवर्तन का परिणाम यह होता है कि तनाव को नियंत्रित करने वाले जीन या तो काम करना बंद कर देते हंै या फिर गलत ढंग से काम कराना शुरू कर देते हंै। इस तरह तनाव से लड़ने की व्यक्ति की क्षमता को यह बर्बाद कर देता है और व्यक्ति आत्महत्या कर लेता है।

 

शोधकर्ताओं का कहना है कि यह खास जीन दिमाग के क्रियाकलाप को नियंत्रित करने में विशेष भूमिका निभाता है।
पोल्टर के अनुसार, इसके रासायनिक बदलाव की प्रकृति दीर्घकालिक होती है। इसकी परिणति अवसाद के रूप में होती है। उन्होंने कहा कि इस अध्ययन के परिणाम ने पूरी तरह से शोध का एक नया रास्ता खोल दिया है। इस खोज से आत्महत्या की प्रवृत्ति से निजात दिलाने वाली दवा विकसित करने में भी मदद मिलेगी।
अध्ययन का यह परिणाम चल रहे उस शोध का हिस्सा है जिसमें इस बात की जांच की जा रही है कि किस तरह जीन में परिवर्तन की अभिव्यक्ति होती है।

 

वैज्ञानिकों के अनुसार एक खास प्रोटीन का स्तर बढ़ने से व्यक्ति आत्महत्या के लिए प्रेरित होता है।

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