मधुमक्‍खी के डंक से दूर होगी बीमारियां

By  , ओन्‍ली माई हैल्‍थ सम्पादकीय विभाग
May 23, 2013

madhumakkhi ke dunk se bhagegi bhimariya dur

शहद ही बीम‍ारियों के लिए गुणकारी नही है बल्कि मधुमक्‍खी के डंक का जहर भी स्‍वास्‍थ्‍य के लिए लाभकारी है, यह बात एक सर्वे में साबित हुई है।

 

मधुमक्खी के डंक से निकला जहर गठिया के लिए काफी लाभप्रद है। एक शोध से पता चला है कि मधुमक्खी के डंक के जहर के साथ एक, दो रासायनिक पदार्थ मिलाकर लगाने से गठिया ठीक हो सकता है। यही नहीं मधुमक्खी के ‘रायल जेली’ की मदद से एड्स जैसी घातक बीमारियों के साथ ही सेक्सुअल मेडिसिन भी तैयार की जाती है।

 

सेन्ट्रल बी रिर्सच इन्स्टीट्यूट पुणे के सहायक निदेशक आर के सिंह ने यूनीवार्ता को बताया कि मधुमक्खी पालन से किसानों के आथरक हालात में जहां खासा परिवर्तन हो सकता है वहीं इसकी एक-एक चीज मानव स्वास्थ्य के लिए बेहद गुणकारी है। श्री सिंह ने बताया कि हाल ही में आयोजित एक सेमिनार से निष्क्रिय निकलकर सामने आया कि सभी तरीकों के स्वास्थ्य सेवाओ से जुडें डाक्टर मानते है कि मधुमक्खी का शहद ही नहीं इसकी प्रत्येक चीज मानव उपयोग मे आ सकती है। उनका कहना था कि सेमिनार मे आये विद्वानो ने माना कि रायल जेली एड्स मे बेहद गुणकारी है।

 

उन्होने बताया कि पलास के फूलों से तैयार शहद उक्त रक्तचाप मे रामबाण का काम करता है। उनका कहना था कि उत्तर प्रदेश के मुजफफरनगर और सहारनपुर मे इंस्टीट्यूट की शाखाएं है। इन्हे भी उच्चीकृत किये जाने की योजना है।

 

एक सवाल के जवाब मे उन्होंने बताया कि देश मे करीब 85 हजार मीटि्रक टन शहद की खपत है। कोशिश है कि दिनचर्या मे शहद के प्रयोग के साथ ही दवाओ मे भी इसकी उपयोगिता बढायी जाये। उन्होने बताया कि जिन छत्तों से शहद निकल जाता है उसका प्रयोग मोम बनाने के साथ ही कई अन्य कार्यो मे किया जाता है। श्री सिंह ने बताया कि मधुमक्खी के छत्तो से कफ और ठंडक से भी निजात पाया जा सकता है। उनका कहना था कि मधुमक्खी के रहन सहन को समाजवाद से जोडा जा सकता है क्योंकि लाखों मधुमक्खियां एक साथ न सिर्फ रहती है बल्कि स्थान भी एक ही साथ बदलती है।

 

उन्होंने कहा कि एक छत्ते से एक वर्ष मे सात आठ किलोग्राम शहद दो बार निकाला जा सकता है। शहद का स्वाद मधुमक्खियां जिस फूल से मकरंद लाती है उसी के अनुसार होता है। उन्होने बताया कि मकरंद की कमी होने पर मधुमक्खियो को कृत्रिम भोजन से भी शहद बनाने की सुविधा दी जाती है। इसके लिए उन्हे चीनी का घोल दिया जाता है जिसे लेकर वह छत्ते मे शहद बनाती है हालांकि इस विधा को प्राकृतिक शहद नहीं कहा जा सकता।

 

उन्होंने बताया कि मधुमक्खी एक उडान मे डेढ से दो किलोमीटर तक जाती है। कुनबे की मुखिया रानी मक्खी एक योजना के तहत शहद चाटने के बाद पूरे परिवार के साथ स्थान छोडती हैं। उनका कहना था कि एक छत्ते मे कम से कम साठ हजार मधुमक्खियां होती है और गर्मी मे प्रतिदिन एक हजार पांच सौ अंडे देती है । साल डेढ साल मे इनकी संख्या 15 लाख हो जाती है।




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