जानें क्या है LGBT का मतलब और कैसे होती है इसकी पहचान

By  , ओन्‍ली माई हैल्‍थ सम्पादकीय विभाग
Sep 07, 2018
Quick Bites

  • समलिंगी, गे या फिर होमोसेक्सुअल होना बेहद निजी मामला है।
  • चीफ जस्टिस ने रूढ़िवादी धारणाओं को अलविदा कहने को कहा है।
  • समलैंगिक रिश्ते वाले लोग 95 प्रतिशत बीमारी की गिरफ्त में अधिक आते हैं। 

समलिंगी, गे या फिर होमोसेक्सुअल होना बेहद निजी मामला है। दुनिया भर के कई देशों में इनके अध‍िकारों को लेकर आंदोलन होते आए हैं। भारत में भारतीय दण्ड संहिता के अनुच्छेद 377 के अंतर्गत समलैंगिक संबंधों को आज तक अपराध की श्रेणी में रखा गया था। लेकिन 6 सितंबर 2018 को सुप्रीम कोर्ट के चीफ जस्टिस दीपक मिश्रा की अध्यक्षता वाली संविधान पीठ ने एतिहासिक फैसला सुनाते हुए इसे सर्वसम्मति देते हुए कहा है कि समलैंगिकता अपराध नहीं है। चीफ जस्टिस ने कहा कि अब वक्त आ गया है जब हमें रूढ़िवादी धारणाओं को अलविदा कहना होगा। ऐसे में आज से इस रिश्ते को कानूनी दर्जा प्राप्त होगा।

हम लोग अपने समाज के समलैंगिकता पर अलग-अलग राय सुनते आए हैं। लेकिन, इन सबके बावजूद यह सवाल अहम है कि आख‍िर समलैंगिक होना क्या है? आखिर इसे अपराध क्यों माना जाता है? क्या यह समाज के लिए सही नही है या एलजीबीट के स्वास्थ्य के लिए सही नहीं है? आज हम आपको समलैंगिकता से संबंधित 5 ऐसी बातें बता रहे हैं जिन्हें आपको भी मानना पड़ेगा।

क्या है होमोसेक्सुअल या समलैंगिकता?

जब पुरूष को पुरूष की तरफ और महिला का महिला की तरफ झुकाव हो तो उसे होमोसेक्सुअल/लेस्बियन कहते हैं। इस स्थिति में लोग सेम सेक्स की तरफ आकर्षित होते हैं। लेकिन कुछ लोग ऐसे भी हैं जो महिलाओं और पुरूषों दोनों की तरफ आकर्षित होते हैं उनको हेक्ट्रोसेक्सुअल और होमोसेक्सुअल भी कहा जाता है। इन्हेन बाई-सेक्सुअल भी कहा जाता है। किसी को अपोजिट सेक्स, किसी को सेम सेक्स और किसी को महिला और पुरूष दोनों की तरफ आकर्षण होता है। तीनों ही प्रकार के लोग नार्मल हैं। हालांकि सेक्सुअलिटी एक बीमारी है। आइए हम आपको होमोसेक्सुअलिटी से संबंधी तथ्यों को बताते हैं।

कैसे पता लगाए कि आप गे हैं?

क्या आप वाकई गे हैं यह पता लगाने के लिए अपनी सेक्सुअले‍टी को परखें। अपने आकर्षणों की पहचान करें। जब आप किसी महिला के बजाय पुरुष के साथ होते हैं, तो आपको कैसा लगता है। क्या आप दोनों के साथ भावनात्मक और सेक्सुअल स्तर पर आकर्ष‍ित महसूस करते हैं। या फिर किसी एक की ओर ही आपका दिल खिंचता है। इस तरह का अवलोकन एक नितांत निजी मामला है। अपने अवलोकन के बारे में किसी दूसरे को न बतायें। इसे खुद महसूस करें। लेकिन यदि आपकी मानसिक दुविधा समाप्त होने का नाम न ले रही हो, तो आप किसी विशेषज्ञ की सहायता भी ले सकते हैं। यदि आप केवल जिज्ञासावश ऐसा कर रहे हैं, तो वह आपकी इस जिज्ञासा को शांत करने के उपाय सुझा सकता है। साथ ही वह आपको आपकी सेक्सुअलिटी के बारे में सटीक जानकारी दे सकता है।

क्या होता है लेस्बियन?

लेस्बियन शब्द फीमेल के लिए इस्तेमाल होता है, लेस्बियन वो औरतें या लड़कियां होती हैं, जो आपस में एक दूसरे की और आकर्षित होती हैं, इनमें प्यार भी होता है और एक दूसरे के साथ एक ही छत के नीचे पति-पत्नी की तरह से भी रह सकती हैं। हालांकि इस तरह के लोग बहुत कम होते हैं।

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एलजीबीटी युवाओं में कई रोगों का खतरा

सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद अब देश के नागरिकों को भी मान लेनी चाहिए कि एलजीबीटी होना कोई अपराध नहीं है। अब वक्त आ गया है कि जिस नजर से एक आम आदमी के संबंधों को देखा जाता है उसी तरह इस समुदाय के लोगों को भी दिया जाए। हमारा यह छोटा सा कदम एलजीबीटी वर्ग के लोगों को भयंकर मानसिक बीमारियों से बचा सकता है। क्योंकि बिना किसी गलती के भी इन लोगों को हर तरह से मिलने वाले नकारात्मक कमेंट्स, प्रताड़ना और गाली गलौच कई तरह की मानसिक समस्याओं का कारण बन जाती है। जो कभी कभी बड़ी बीमारी का रूप ले लेती है। एलजीबीटी समदाये के बुजुर्ग इससे सबसे अधिक प्रभावित होते हैं। अलगाव और सामाजिक सेवाओं की कमी के कारण उन्हें कई स्वास्थ्य समस्याओं का सामना करना पड़ता है। एक्सपर्ट्स बताते हैं कि प्रताड़ना के चलते एलजीबीटी युवाओं में बेघर होने, तम्बाकू, शराब और ड्रग्स का इस्तेमाल करने के मामले भी अधिक पाए जाते हैं। इतना ही नहीं समाज द्धारा न अपनाए जाने के चलते एलजीबीटी युवाओं में आत्महत्या करने की संभावना 2 से 3 गुना अधिक हो जाती है।

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