क्‍यों होते है बच्‍चे स्‍पैलिंग में कमजोर

By  , ओन्‍ली माई हैल्‍थ सम्पादकीय विभाग
May 02, 2013

kyu hote hai bacche sappling me kamjhor

जिन बच्‍चों को मां के गर्भ में आयोडीन की पर्याप्‍त मात्रा नहीं मिलती, उनका शैक्षिक स्‍तर कमजोर होता है विशेषकर स्‍पैलिंग में। एक नए अध्‍ययन में यह बात सामने आई है। ब्रिटिश अखबार डेली मेल में प्रकाशित खबर के अनुसार आयोडीन का बच्‍चों के मानसिक विकास पर जन्‍म से पहले ही असर पड़ना शुरू हो जाता है।

लेकिन, आयोडीन की इस कमी का असर बच्‍चों के गणितीय क्षमता पर नहीं पड़ता। इसका यह अर्थ निकाला जा सकता है कि आयोडीन की कम मात्रा से गर्भस्‍थ शिशु की सुनने की जरिए प्राप्‍त होने वाले स्‍मरण शक्ति पर ही नकारात्‍मक प्रभाव पड़ता है।

वैज्ञानिकों का कहना है कि गर्भवती महिलाएं अपने रोजमर्रा के आहार में बदलाव कर इसके दूरगामी प्रभावों को कम कर सकती हैं।

आयोडीन भोजन से प्राप्‍त होता है और मानसिक विकास में इसकी महती भ‍ूमिका होती है। लेकिन, गर्भावस्‍था के दौरान इसकी मात्रा में जरा सा असंतुलन बच्‍चे के मानसिक विकास को बुरी  तरह प्रभावित कर सकता है।

यह पौष्टिक पदार्थ कई तरह के खाद्य पदार्थों में‍ मिल सकता है, खासतौर पर शेलफिश में, लेकिन गर्भवती महिलाओं के लिए यह खाना मुफीद नहीं होता।

 

इस स्‍टडी में 228 बच्‍चों के टेस्‍ट स्‍कोर का अध्‍ययन किया गया। इन बच्‍चों की मांओं ने वर्ष 1999 से 2001 के बीच ऑस्‍ट्रेलिया के तस्‍मानिया स्थित रॉयल हॉबर्ट हॉस्पिटल की एंटी नेटल क्‍लास में भाग लिया था।


इस दौरान बच्‍चे आयोडीन की कमी के साथ पैदा हुए थे, लेकिन इसके बाद हालात में सुधार आने लगा, जब ब्रेड निर्माताओं ने अक्‍टूबर 2001 के बाद आयोडीन युक्‍त नमक का इस्‍तेमाल शुरू किया।


परिणाम में आया कि वे बच्‍चे जिन्‍हें गर्भ में आयोडीन की प्रचुर मात्रा नहीं मिली थी, उन पर इसके दूरगामी असर पड़े। नौ साल बाद जिन बच्‍चों की मांओं ने गर्भावस्‍था के दौरान कम मात्रा में ओयाडीन का सेवन किया था, उनका शैक्षिक स्‍तर कमजोर रहा। विशेष रूप से वर्तनी से जुड़े मामलों में।

 

हालांकि तस्‍मानिया विश्वविद्यालय के शोधकर्ताओं ने पाया कि कम मात्रा में आयोडीन का बच्‍चों की गणितीय क्षमता पर कोई नकारात्‍मक असर नहीं पड़ा। इससे यह पता चलता है कि आयोडीन की कम मात्रा से गर्भस्‍थ शिशु की सुनने की जरिए प्राप्‍त होने वाले स्‍मरण शक्ति पर ही नकारात्‍मक प्रभाव पड़ता है।

 

मुख्‍य शोधकर्ता डॉक्‍टर क्रिस्‍टन हेंस ने कहा, ' हमारी रिसर्च में यह पता चला है कि बच्‍चों में आयोडीन की कमी का असर काफी सालों बाद भी नजर आ सकता है। हालांकि बच्‍चों को उनके जन्‍म के बाद पर्याप्‍त मात्रा में आयोडीन दिया गया, लेकिन जन्‍म से पहले हुई आयोडीन की कमी को दूर करने के लिए काफी नहीं था।

 

अच्‍छी बाद यह है कि गर्भावस्‍था के दौरान आयोडीन डिफिशियंसी को नियंत्रित कर इसके प्रभावों को टाला जा सकता है। गर्भवती महिलाओं को अपने डॉक्‍टर की सलाह पर संतुलित आहार लेना चाहिए।

 

यह नतीजे जर्नल ऑफ क्‍लीनिकल एंडोक्रिनोलॉजी एंड मेटाबॉलिज्‍म में प्रकाशित हुए हैं।

 

 

 

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