रेक्टल कैंसर (मलाशय का कैंसर) क्यों होता है? डॉक्टर से जानें इसके लक्षण, कारण, इलाज और बचाव के टिप्स

कईयों को रेक्टल कैंसर या फिर मलाशय का कैंसर हो सकता है। यह जानलेवा है। बीमारी के लक्षण दिखते ही डॉक्टरी सलाह लेना चाहिए ताकि बीमारी से बचाव करें। 

Satish Singh
Written by: Satish SinghPublished at: Oct 01, 2021
रेक्टल कैंसर (मलाशय का कैंसर) क्यों होता है? डॉक्टर से जानें इसके लक्षण, कारण, इलाज और बचाव के टिप्स

रेक्टल कैंसर या फिर मलाशय का कैंसर आज के समय में आम बीमारी है। यह बीमारी काफी गंभीर होने के साथ कई मामलों में जानलेवा भी साबित हो सकती है। इसलिए इस बीमारी से बचाव के लिए लोगों को कई एहतियात बरतना चाहिए। जमशेदपुर के बिष्टुपुर के कैंसर अस्पताल के कैंसर स्पेशलिस्ट डॉ. आशीश कुमार से जानेंगे कि ये बीमारी क्या है, क्यों होती है और इससे कैसे बचाव किया जाए। इसके बारे में अधिक जानने के लिए पढ़ें ये आर्टिकल।

शरीर के किस अंग में होता है ये कैंसर

डॉक्टर बताते हैं कि कोलोन या रेक्टल इंटेस्टाइन का आखिरी हिस्सा होता है। इसका मुख्य काम मल को रखने के साथ मल त्यागने की प्रक्रिया को पूरा करता है। ये लंबी ट्यूब होती है। करीब 2.5 मीटर लंबी होती है। रेक्टल का कैंसर आज के समय में काफी सामान्य है। कई लोगों में ये बीमारी देखने को मिलती है। 

Rectal Cancer

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जानें इस बीमारी के लक्षण

डॉक्टर बताते हैं कि इस बीमारी के लक्षणों की बात करें तो बॉवेल हेबिट में बदलाव आता है, वैसे व्यक्ति जो दिनभर में बार-बार मल त्याग करते हैं वो शिकायत करते हैं कि उनमें कब्जियत की समस्या रहती है। ये लक्षण भी दिखते हैं

  • मरीज मल में खून की शिकायत कर सकते हैं
  • अच्छे से मल त्याग न कर पाना
  • मल त्याग करने के बाद भी मल त्याग करने की इच्छा होना
  • कैंसर के एडवांस स्टेज में मरीज वजन का घटना, एनोरेक्सिया (वेट बढ़ने के डर से मरीज खुद को भूखा रखता है)
  • गंभीर स्थिति में पीठ के पीछे दर्द की शिकायत करता है
Colon Cancer

जानें क्यों होता है इस प्रकार का कैंसर

डॉक्टर बताते हैं कि ये बीमारी अनुवांशिक कारणों से लोगों को हो सकती है। वहीं बीमारी के कुछ रिस्क फैक्टर हैं। जैसे ये बीमारी उन लोगों को ज्यादा देखने को मिलती है जो धूम्रपान का सेवन करते हैं, फास्ट फूड का सेवन करते हैं, मोटापा से ग्रस्त लोगों में ये बीमारी होती है। 

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जानें कब लेनी चाहिए डॉक्टरी सलाह

लोगों को डॉक्टरी सलाह उस वक्त लेनी चाहिए जब उन्हें ऊपर बताए गए लक्षण दिखाई दें। इस बीमारी का पता लगाने के लिए आपके डॉक्टर कुछ जांच करवाने की सलाह दे सकते हैं। जिसमें मरीज को एब्डॉमिन की जांच,  सीईए जांच, एब्डॉमिन का सीटी स्कैन, कोलोनोस्कोपी जांच करवाकर बीमारी का पता किया जाता है। कोलोनोस्कोपी की जांच करने में मरीज के मल द्वार से यंत्र डालकर ट्यूमर की बायोप्सी लेकर उसकी जांच की जाती है और कैंसर का पता किया जाता है। 

जानें इस बीमारी का कैसे किया जाता है उपचार

डॉक्टर बताते हैं कि इस बीमारी का इलाज सर्जरी के द्वारा भी किया जाता है। इसमें मरीज की रेडिकल सर्जरी कर ट्यूमर को निकाला जाता है। लेप्रोस्कोपिक या फिर रोबोटिक सर्जरी की प्रक्रिया से मरीज का ऑपरेशन किया जाता है। इसके तहत मरीज के पेट में होल कर सर्जरी की जाती है। इसमें लंबा चीरा नहीं लगाया जाता है। इससे मरीज जल्दी ठीक होता है, कम दर्द होता है और कम चीरा लगाया जाता है। ये मरीज को जल्दी ठीक करने में मदद करता है। मरीज को कुछ स्थिति में कीमोथेरेपी या फिर रेडियोथेरेपी की जरुरत पड़ सकती है। 

सही समय पर इलाज करवाएं तो बीमारी से निजात

डॉक्टर बताते हैं कि इस बीमारी के केस में लक्षणों को देख लोगों को सही समय पर इलाज करवाना चाहिए। ताकि बीमारी से बचाव किया जा सके। दवा व बताई गई इलाज की प्रक्रिया से मरीज का इलाज संभव है। इसलिए हमेशा यदि आप भी इस बीमारी से जुड़े लक्षणों को महसूस कर रहे हैं तो डॉक्टरी सलाह लेकर इलाज करवाएं। 

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