बोन मैरो कैंसर के कारण

By  , ओन्‍ली माई हैल्‍थ सम्पादकीय विभाग
Oct 21, 2015
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Quick Bites

  • अस्थि मज्जा में होता है बोन मैरो कैंसर।
  • संक्रमण से ग्रसित होने पर होता है ये।
  • सर्जरी कीमोथेरेपी आदि से होता है इलाज।
  • रेडिएशन थेरेपी की हाई डोज भी कारगर।

 

बोन मैरो यानि अस्थि मज्जा मुख्य हड्डियों के बीच में एक मुलायम व स्पॉंजी टिशू है। इसमें रक्त बनाने वाली अपरिपक्व कोशिकाएं होती हैं जिन्हें स्टेम सेल्स कहते हैं। स्टेम सेल्स लाल रक्त कोशिकाओं (जो पूरे शरीर में ऑक्सीजन पहुंचाती है), सफेद कोशिकाएं (जो संक्रमण से लड़ती हैं) और प्लेटलेट्स( जो ब्लड क्लॉटिंग से मदद करती है) में विकसित होती हैं।



बोन मैरो कैंसर के प्रकार

जब कैंसर बोन मैरो की रक्त बनाने वाली कोशिकाओं में होता है तो उसे बोन मैरो कैंसर कहते हैं। बोन मैरो कैंसर के ज्यादातर मामलों में अस्थि मज्जा से कैंसर के सेल्स शरीर के अन्य भागों में भी फैल जाते हैं। इसे सेकेंडरी बोन कैंसर कहते हैं। इन कैंसर के सेल्स को माइक्रोस्कोप से देखा जा सकता है।बोन मैरो कैंसर के तीन प्रकार होते हैं जो अस्थि मज्जा के रक्त बनाने वाली कोशिकाओं में होते हैं। ल्यूकेमिया में अस्थि मज्जा में असमान्य सफेद रक्त कोशिकाएं बनने लगती हैं। लिंफोमाज ज्यादातर लिंफ नोड्स में होता है लेकिन कभी कभी बोन मैरो में भी हो सकता है। मल्टीपल मायलोमा अस्थि मज्जा के प्लाजमा सेल्स में कैंसर सेल्स बनने लगते हैं।


बोन मैरो कैंसर के कारण

बोन मैरो कैंसर के कारणों का पता अभी तक नहीं लगया जा सका है लेकिन बोन मैरो कैंसर का खतरा किससे होता है इसका पता लगाने में वैज्ञानिक सफल रहे हैं। कैंसर कोई संक्रामक रोग नहीं है यह किसी कैंसर रोगी को छूने व साथ रहने से नहीं फैलता है। बोन मैरो कैंसर का खतरा वृद्धावस्था के साथ-साथ हृदय रोगी व बच्चों में होता है। वैज्ञानिकों के मुताबिक कुछ कारणों से शरीर में बोन मैरो कैंसर होने का खतरा होता है। आईए जानें क्या है वे। शरीर की प्रतिरोधक क्षमता कमजोर होने से बोन मैरो कैंसर हो सकता है। किसी विशेष प्रकार के संक्रमण से ग्रसित होने पर बोन मैरो कैंसर होने की संभावना हो सकती है।


बोन मैरो कैंसर के  ईलाज

बोन मैरो कैंसर के इलाज का विकल्प चुनते समय कई बातों का ख्याल रखना होता है। रोगी की उम्र, कैंसर का स्तर व रोगी के स्वास्थ्य पर ईलाज निर्भर करता है।बोन मैरो कैंसर के ईलाज के लिए सर्जरी, इंटेनसिटी मॉड्यूलेटेड रेडिएशन थेरेपी व कीमोथेरपी का प्रयोग किया जाता है। इसके अलवा बोन मैरो ट्रांसप्लांट के जरिए भी इसका ईलाज संभव है। स्टेम सेल ट्रांसप्लांट में रेडिएशन थेरेपी, कीमोथेरेपी व बीमारी से क्षतिग्रस्त हुई बोन मैरो को स्थानतंरित किया जाता है।


ल्यूकेमिया, लिंफोमा और मल्टीपल मायलोमा के ईलाज के लिए स्टेम सेल ट्रांसप्लांट का प्रयोग किया जाता है। कैंसर के इलाज के लिए इस्तेमाल की जाने वाली रेडिएशन थेरेपी की हाई डोज से बोन मैरो कैंसर हो सकता है।

 

Image Source-Getty

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