महिलाओं में ब्लड प्रेशर बढ़ने के पीछे छिपे हैं ये कारण, जानें कैसे पहचानें इसके लक्षण

उच्च रक्तचाप को अक्सर पुरुषों की स्वास्थ्य समस्या माना जाता है, लेकिन वास्तव में महिलाओं में भी यह समस्या हो सकती है। आप इसके कारण व संकेतों को पहचानकर कुछ आसान उपायों के जरिए इसे आसानी से नियमित कर सकती हैं।

मिताली जैन
अन्य़ बीमारियांWritten by: मिताली जैनPublished at: Aug 26, 2019
महिलाओं में ब्लड प्रेशर बढ़ने के पीछे छिपे हैं ये कारण, जानें कैसे पहचानें इसके लक्षण

उच्च रक्तचाप को बढ़े हुए रक्तचाप या हाइपरटेंशन के नाम से भी जाना जाता है। इस स्थिति में रक्त वाहिकाओं में लगातार दबाव बढ़ जाता है और जब रक्तवाहिकाओं पर दबाव अधिक होता है, तो हृदय को रक्त पंप में अधिक काम करना पड़ता है। यह एक बेहद गंभीर स्थिति है क्योंकि इससे गुर्दे, धमनियों और हृदय पर नकारात्मक प्रभाव पड़ता है। रक्त वाहिकाओं में दबाव के कारण मस्तिष्क में रक्त का रिसाव भी हो सकता है और इसके कारण स्ट्रोक हो सकता है। इतना ही नहीं, उच्च रक्तचाप के कारण गुर्दे की विफलता, अंधापन, रक्त वाहिकाओं का टूटना और व्यक्ति की मृत्यु भी हो सकती है। उच्च रक्तचाप की समस्या पुरूष या स्त्री किसी को भी हो सकती है। खासतौर से चालीस के बाद तो पुरूष व स्त्री दोनों में ही इस समस्या के होने की संभावनाएं लगभग समान होती हैं। तो चलिए जानते हैं महिलाओं में उच्च रक्तचाप के कारण, लक्षणों व उपचार के बारे में-

अलग-अलग होते हैं कारण

महिलाओं में उच्च रक्तचाप के कई कारण होते हैं। जीवन के विभिन्न पड़ावों में उनके शरीर में कई तरह के बदलाव होते हैं, जिसके कारण उन्हें कई तरह की स्वास्थ्य समस्याओं का सामना करना पड़ता है। उच्च रक्तचाप इनमें से एक है। खासतौर से, गर्भावस्था, बर्थ कण्ट्रोल व मेनोपॉज़ जैसी स्थितियां उच्च रक्तचाप होने के रिस्क को कई गुना बढ़ा देती हैं।

कुछ रिसर्च में यह पाया गया है कि जो महिलाएं बर्थ कण्ट्रोल पिल्स का सहारा लेती हैं, उनमें उच्च रक्तचाप होने की समस्या अधिक देखी जाती है। यह उन महिलाओं में अधिक होता है, जो ओवरवेट है या जिन्हें पहली प्रेग्नेंसी में उच्च रक्तचाप की समस्या का सामना करना पड़ा था या फिर जिनकी हाई ब्लड प्रेशर व किडनी समस्या की फैमिली हिस्ट्री रही है। वहीं अगर आप बर्थ कण्ट्रोल पिल्स लेने के साथ-साथ स्मोक भी करती हैं तो इससे उच्च रक्तचाप की संभावना भी कई गुना बढ़ जाती है।

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जिन महिलाओं को कभी उच्च रक्तचाप की समस्या नहीं होती, उन्हें भी गर्भावस्था में इस स्वास्थ्य समस्या का सामना करना पड़ता है। अगर यह गर्भावस्था में 20 सप्ताह के बाद होता है तो इसे गेस्टेशनल हाइपरटेंशन कहा जाता है, जो प्रसव के बाद खुद ब खुद खत्म हो जाती है। हालांकि गर्भावस्था में इसका उपचार करना बेहद जरूरी होता है, अन्यथा यह मां और बच्चे दोनों के लिए खतरनाक साबित हो सकता है।

प्रीक्लेम्पसिया भी एक ऐसी स्थिति है, जो गेस्टेशनल हाइपरटेंशन से रिलेटिड है। यह आमतौर पर उच्च रक्तचाप और यूरिन में प्रोटीन के बढी हुई मात्रा से मापी जाती है। इसके लक्षणों में उच्च रक्तचाप, सिरदर्द, यकृत या गुर्दे की समस्याएं और कभी-कभी अचानक वजन बढ़ना और सूजन शामिल हैं। प्रीक्लेम्पसिया के लिए शिशु की डिलीवरी ही एकमात्र इलाज है क्योंकि बच्चे के जन्म के कुछ समय बाद यह समस्या स्वतः खत्म हो जाती है।

महिलाओं में मेनोपॉज़ के शुरूआती चरण में या रजोनिवृत्ति के बाद भी उच्च रक्तचाप की समस्या हो सकती है, भले ही पूरे जीवन आपका रक्तचाप सामान्य रहा हो। इसलिए चालीस के बाद जब  मेनोपॉज़ की शुरूआत हो तो ब्लड प्रेशर को समय-समय पर मॉनिटर करती रहें।

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ऐसे करें नियंत्रित

  • अगर आपको उच्च रक्तचाप की समस्या है या फिर आप चाहती हैं कि आपको यह समस्या न हो, इसके लिए आप कुछ प्रभावी कदम उठा सकती हैं जैसे-
  • अधिक वजन होने पर उसे कम करने की कोशिश करें।
  • सप्ताह में पाँच दिन प्रतिदिन करीबन आधे से एक घंटा व्यायाम करें। इसके अतिरिक्त भी खुद को एक्टिव रखने का प्रयास करें।
  • ऐसा आहार लें जिसमें कैलोरी लिमिटेड हो और पोषक तत्वों से भरपूर हो। साथ ही उसमें सैचुरेटिड फैट कम हो। भोजन में नमक और सोडियम की मात्रा कम ही रखें। 
  • एल्कोहल व धूम्रपान से भी दूरी बनाएं।
  • अगर आपको उच्च रक्तचाप है तो उसे हमेशा मॉनिटर करती रहें। वहीं डॉक्टर की सलाह पर उच्च रक्तचाप को नियंत्रित करने वाली कुछ दवाओं का सेवन भी किया जा सकता है। डाॅक्टर के संपर्क में रहें और उनसे हाइपरटेंशन के जोखिम कारकों के बारे में बात करें।

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