एनीमिया का कारण भी बन सकती है किशोर गर्भावस्था

By  , ओन्‍ली माई हैल्‍थ सम्पादकीय विभाग
Oct 26, 2012
Quick Bites

  • कम उम्र में शिशु को जन्‍म देने से विटामिन की कमी हो सकती है।
  • प्रीमेच्‍योर बेबी के जन्‍म की आशंका को बढ़ाती है किशोर गर्भावस्‍था।
  • डिप्रेशन का शिकार हो सकती है किशोरावस्‍था में मां बनने वाली महिला।
  • किशोर गर्भावस्‍था से शारीरिक विकास पर भी पड़ता है असर।

किशोर गर्भावस्था के दौरान युवती को शारीरिक और मानसिक परेशानियां होती हैं। कम उम्र में बच्चे को जन्म देने के लिए युवती पूरी तरह से तैयार नहीं होती। ऐसे में नवजात पर भी इसका असर पड़ सकता है।

teenage pregnancy

अधिकतर किशोरियां इस उम्र में आर्थिक रूप से भी बच्चे की देखभाल के लिए तैयार सक्षम नहीं होती। जिसके चलते जच्‍चा और बच्‍चा दोनों को ही कई तरह की स्वास्थ्य समस्याओं का सामना करना पड़ता है। साथ ही सामाजिक दिक्‍कतों के चलते भी परेशानी होती है। किशोर गर्भावस्था में युवती व उसके बच्चे को परिवार की ज्‍यादा जरूरत होती है। परिवार के सहयोग और समर्थन के बिना दोनों का जीवन परेशानी भरा हो जाता है।


देश में कम उम्र में मां बनने वाली युवतियों की मृत्यु दर सामान्य उम्र में मां बनने वाली महिलाओं के तुलना में ज्‍यादा है। कम उम्र में शादी और फिर गर्भधारण का विपरीत असर महिलाओं की शिक्षा पर भी पड़ता है। उच्‍च शिक्षा की कमी या तकनीकी जानकारी न होने पर महिला आर्थिक रुप से अपने पति या परिवार पर निर्भर होती है। पर्याप्‍त शिक्षा की कमी से महिला को अच्‍छी नौकरी भी नहीं मिल पाती। लेख के जरिए हम आपको बताते हैं किशोर गर्भावस्‍था से जुड़ी स्‍वास्‍थ्‍य जटिलताओं के बारे में।

 

एनीमिया की समस्या

सामान्‍य महिलाओं के मुकाबले कम उम्र में मां बनने वाली महिलाओं में स्वास्थ्य संबंधी कई समस्याएं होती हैं। इसमें एनीमिया की समस्या प्रमुख है। कम उम्र में बच्‍चे को जन्‍म देने से हाई ब्लड प्रेशर की समस्या भी हो सकती है, जिससे प्रीक्लेम्पसिया होने की आशंका भी बनी रहती है।

 

विटामिन की कमी

पूर्ण रूप से शारीरिक विकास होने से पहले ही बच्‍चे को जन्‍म देने से महिला के शरीर में विटामिन की कमी हो सकती है। विटामिन की कमी आगे चलकर कई बीमारियों का कारण भी बन सकती है। पर्याप्‍त पोषण नहीं मिलने से महिला के साथ ही बच्‍चे के शारीरिक विकास पर भी असर पड़ता है।

 

समय पूर्व शिशु का जन्म

किशोर गर्भावस्था में समय से पहले शिशु का जन्म होने का खतरा बना रहता है। कुछ मामलों में प्रीमेच्योर लेबर पेन भी होने लगता है, जिसे बेड रेस्ट व दवाओं के जरिए रोका जा सकता है। समय से पहले शिशु का जन्म होने से वजन कम होने, पाचन संबंधी समस्या और दृष्टि दोष आदि की समस्या हो सकती है।


पोस्टपार्टम डिप्रेशन

कम उम्र में मां बनने वाली महिलाओं के पोस्टपार्टम डिप्रेशन के शिकार होने की आशंका रहती है। यह समस्‍या प्रसव के बाद शुरू होता है। किशोर गर्भावस्था में महिलाएं अपनी समस्याएं घर वालों या किसी और से नहीं कह पातीं, ऐसे में वे डिप्रेशन का शिकार हो जाती हैं। पोस्‍टपार्टम डिप्रेशन से उचित चिकित्‍सीय सलाह और इलाज से निजात पाई जा सकती है।

 

 

 

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