खाने की लत कहीं आपकी मजबूरी तो नहीं

By  , ओन्‍ली माई हैल्‍थ सम्पादकीय विभाग
May 06, 2013

khaane ki lat kahi aapki majboori to nahi

दुनिया भर में ज्‍यादा खाने की वजह से लोग मोटापे का शिकार हो रहे हैं। इस मुद्दे को लेकर दुनिया भर के वैज्ञानिक भी अलग-अलग राय रखते हैं। कुछ लोग मानते हैं कि यह लत है, जबकि कुछ खाने की लत जैसी किसी चीज के होने से ही इंकार करते हैं।

 

अब वैज्ञानिक इस सवाल का जवाब तलाशने में लगे हैं कि क्‍या ज्‍यादा खाने जैसी कोई लत होती भी है या नहीं। और अगर वाकई ऐसी कोई चीज होती है, तो फिर उससे बचने का उपचार क्‍या है।

 

लत से छुटकारा पाने का एक जांचा-परखा तरीका है कि नशे वाली वस्तु का सेवन नहीं करना। जैसे शराब पीने वाले पब में जाने और सिगरेट पीने वाले घर में इसके इस्तेमाल से बचते हैं। लेकिन इस तरह के उपायों को आजमाने में लोगों को बहुत परेशानी होती है। और अक्‍सर इसे लेकर लोग बार-बार नाकाम ही होते हैं।

 

मान लीजिए आपको जिस चीज़ की लत है, वह आसानी से आपके घर में उपलब्ध है तो आप क्या करेंगे? मसलन खाने-पीने की वस्तुएं। इन हालात में खुद पर काबू रख पाना आसान नहीं होता। वैश्विक स्तर पर मोटापे एक महामारी का रूप ले चुका है। इसलिए अब वैज्ञानिक मोटापे ओर खाने की आदतों के बीच संबंध तलाशने में जुटे हैं।

 

यूरोपीय यूनियन इस तरह के न्यूरो फास्ट नाम के प्रोजेक्ट को आर्थिक मदद दे रही है। इसमें कोशिश हो रही है कि सारे साक्ष्यों को एकसाथ जुटाकर उनके विश्लेषण से कोई निष्कर्ष निकाला जा सके।

 

अभी तक केवल एक तरह के खाने का विकार शोध में सामने आया है, जिसमें बार-बार खाना एक लत का रुप ले लेता है। जिसका साइड एफेक्ट मोटापे के रुप में सामने आता है।

 

शोधकर्ता ने अपनी टीम के एक सदस्य माइकल से पूछा तो उन्होंने बताया, "मोटापे का कारण समझना काफी कठिन है। हर कोई ज्यादा खाता है और वे सोचते हैं कि बस थोड़ा सा ज्यादा खा रहे हैं। दिन में हर मिनट पर कुछ न कुछ खाते रहना बेहद अलग तरीके का अनुभव है।"

 

शोध करने वाली टीम की एक अन्य सदस्य लुइस ने खाने की आदतों के बारे में काफी रोचक जानकारी दी। उन्होंने बताया कि "किसी लत के शिकार लोगों के व्यवहार में काफी समानताएं होती हैं।"

 

लुइस के अनुसार, "एक शराबी अपनी पहचान छिपाने के लिए अलग-अलग दुकानों से शराब खरीदता है। उसी तरह मैं भी चॉकलेट के लिए दुकानें बदलती हूं। घरों में शराबी शराब छिपाते हैं, उसी तरह से चॉकलेट के लती लोग चॉकलेट छिपाने की कोशिश करते हैं।"

 

डॉक्टर नोरा वोल्को नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ ड्रग एब्यूज की प्रमुख और प्रसिद्ध न्यूरोसाइंटिस्ट हैं। उनका मानना है, "माइकल और लुइस जो बात कह रही हैं दरअसल वह एक जैविक प्रक्रिया है।"

 

उन्होंने शोध में पाया, "डोपामाइन नाम का एक न्यूरो ट्रांसमीटर खाने की लत को बढ़ाना देता है। यह मस्तिष्क में ड्रग की लत के समान काम करता है। जो खाने की लत के मौजूदगी की पुष्टि करता है।"

 

किसी चीज़ की लत छुड़ाने के दौरान यह प्रयास किया जाता है कि या तो व्यक्ति पूरी तरह से लत छुटकारा पा जाए या फिर उससे होने वाला नुकसान कम हो जाए। शोधकर्ता यह भी कहते हैं कि खाने से परहेज मुश्किल है, लेकिन ज्यादा खाने से बचना संभव है।

 

 

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