कैसे बढ़ता है सरवाइकल कैंसर

By  , ओन्‍ली माई हैल्‍थ सम्पादकीय विभाग
Aug 29, 2012

सरवाइकल कैंसर सर्विक्स (यूटरस माउथ) का कैंसर है। आमतौर पर फिजिकल रिलेशनशिप के दौरान लापरवाही बरतना इसकी सबसे बड़ी वजह होती है। इस कैंसर के बारे में अक्सर आखिरी चरण में ही पता चलता है।

kaise badata hai Cervical cancer

पूरी दुनिया में प्रति वर्ष 2,70,000 महिलाएं सरवाइकल कैंसर (गर्भाशय के मुख का कैंसर) की शिकार होती हैं। इसमें 88 फीसदी मौतें विकासशील देशों में होती है। भारत में जागरूकता की कमी, स्क्रीनिंग व इलाज की कमी की वजह से यह बीमारी जानलेवा बनती जा रही है। इसके इलाज (एचपीवी वैक्सीन) के बारे में भी महिलाओं को अधिक जानकारी नहीं होती।

 

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सरवाइकल कैंसर कैसे बढ़ता है-

एचपीवी वायरस

सरवाइकल कैंसर उन महिलाओं में ज्यादा देखा गया है, जो कम उम्र से यौन संबंध बनाना शुरू कर देती हैं, एक से अधिक साथियों के साथ असुरक्षित सेक्स करती हैं और सेक्स के प्रति बहुत अधिक सक्रिय होती हैं। सरवाइकल कैंसर हुमन पेपिलोमा वायरस की वजह से होता है। एचपीवी वायरस पुरुषों के वीर्य में होता है। सेक्स के दौरान एचपीवी वायरस पुरूषों से महिलाओं की योनि में पहुंच जाता है। सामान्य सेक्स संबंध में एचपीवी वायरस अधिक सक्रिय नहीं होता। लेकिन जो महिलाएं बहुत अधिक सेक्स संबंध बनाती है, उनमें एचपीवी का प्रसार हो जाता है और यही सरवाइकल कैंसर का कारण बन जाता है।

उम्र का खास रोल

अक्सर सर्वाइकल सेल्स में असामान्य बदलाव से बीमारी के लक्षण साफ नहीं दिखते। लेकिन सेल्स में बदलाव अगर कैंसर का रूप ले ले, तब इसके लक्षण साफ हो जाते हैं। वैसे, सरवाइकल कैंसर में उम्र की खास भूमिका होती है। इसके ज्यादातर केसेज 40 से ऊपर की महिलाओं में देखे जाते हैं, जबकि 15 से कम उम्र की किशोरियों में इसके कम केसेज पाए जाते हैं। ऐज बढ़ने के साथ यह प्रॉब्लम ज्यादा सीरियस हो जाती है। इसकी वजह यह है कि पीरियड के रुकने के बाद महिलाएं मान लेती हैं कि उन्हें अब पैप स्मियर टेस्ट की जरूरत नहीं रही।

 

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लाइफस्टाइल ऐडजस्टमेंट्स

मेडिकल केयर के साथ कुछ लाइफ स्टाइल ऐडजस्टमेंट्स करके सर्वाकल कैंसर से बचा जा सकता है। अगर आपको स्मोकिंग की हैबिट है, तो इसे छोड़ दें। स्टडीज बताती हैं कि एचपीवी के चलते होनेवाले सर्विक्स डैमेज के प्रॉसेस को स्मोकिंग से स्पीड मिल सकती है।

सरवाइकल कैंसर के कारण-

•       एक से अधिक पुरुष के साथ शारीरिक संबंध बनाने वाली महिलाओं में सरवाइकल कैंसर का खतरा ज्यादा रहता है। इसीलिए इस संक्रमण को एसटीडी यानी सेक्सुअल ट्रांसमिटेड डिजीज भी कहते है।

•       कई बार ये बीमारी जेनेटिक कारणों से भी होती है।

•       गर्भनिरोधक गोलियों के अधिक इस्तेमाल से यह बीमारी हो सकती है।

•       एल्कोहल और सिगरेट का सेवन भी इसका कारण हो सकता है।

•       गांवों में अधिक प्रसव और बार-बार गर्भधारण के कारण एचपीवी संक्रमण होता है।


•       जबकि शहरों में बीमारी की जानकारी होने पर भी जागरूकता की कमी इसका कारण बनती है।

लक्षण-

•       वैजाइना से ब्लड डिस्चार्ज होना।

•       पीरियड्स में इरेग्युलर चेंज आना।

•       सेक्सुअल इंटकोर्स के दौरान दर्द होना।

•       पेल्विक मशल्स में दर्द होना।

 

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इन बातों का ध्यान रखें-

•       पर्सनल हाईजीन का खास ख्याल रखें।

•       ऐसे पार्टनर से रिलेशन न बनाएं, जिसके कई लोगों से रिलेशन रहे हों।

•       सेक्सुअल इंटरकोर्स के दौरान कंडोम का इस्तमाल करें। इससे एचपीवी इंफेक्शन का रिस्क 70 प्रतिशत कम हो जाता है।

•       पैप स्मियर टेस्ट, एचपीवी टेस्ट और कोल्पोस्कोपी टेस्ट कराते रहें।

•       बार-बार प्रेग्नेंसी से बचें।

•       पांच साल या इससे अधिक समय तक गर्भ निरोधक गोलियां न लें।

 

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