International Yoga Day: शरीर की नाड़ियों को शुद्ध करता है नाड़ीशोधन प्राणायाम, पीएम मोदी ने बताए इसके फायदे

अंतर्राष्‍ट्रीय योग दिवस 2020 (International Yoga Day 2020) के मौके पर प्रधानमंत्री मोदी से जानिए नाड़ीशोधन प्राणायाम के फायदे और करने का तरीका।

Atul Modi
Written by: Atul ModiPublished at: Jun 20, 2019
International Yoga Day: शरीर की नाड़ियों को शुद्ध करता है नाड़ीशोधन प्राणायाम, पीएम मोदी ने बताए इसके फायदे

21 जून को छठां अंतर्राष्‍ट्रीय योग दिवस 2020 (International Yoga Day 2020) मनाया जाएगा। इससे पहले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपने सोशल मीडिया अकाउंट के जरिए नाड़ीशोधन प्राणायाम के बारे में विस्‍तृत जानकारी दी है। इस एनिमेटेड वीडियो में उन्‍होंने विस्‍तार से नाड़ीशोधन प्राणायाम के फायदे और करने की विधि के बारे में बताया है। अगर आप योग और प्राणयाम में रूचि रखते हैं तो नाड़ीशोधन प्राणयाम बहुत फायदेमंद हो सकता है। 

नाड़ीशोधन प्राणायाम क्‍या है?

 

नाड़ीशोधन को अनुलोम-विलोम प्राणायाम (Anulom Vilom Pranayam) के तौर पर भी जाना जाता है। इस प्राणायाम की खास बात यह है कि दाएं और बाएं नासिका क्षेत्रों से क्रमवार श्‍वास-प्रश्‍वास को रोक कर या बिना रोके किया जाता है। 

नाड़ीशोधन प्राणायाम या अनुलोम-विलोम करने की विधि 

  • नाड़ीशोधन को करने के लिए सबसे पहले आप सुखासन में बैठ जाएं। जोकि एक ध्‍यानात्‍मक आसन है। 
  • सुखासन के अलावा नाड़ीशोधन दूसरे ध्‍यानात्मक आसन जैसे- पद्मासन, स्‍वस्‍तिकासन और वज्रासन में भी किया जा सकता है। 
  • जो जमीन पर बैठने में असमर्थ हैं वह कुर्सी पर बैठकर भी इस आसन को कर सकते हैं। 
  • सुखासन में बैठते समय यह सुनिश्चित करें कि आपका मेरूदण्‍ड सीधा हो, सिर ऊंचा, दोनों हथेलियां घुटनों पर और आंखे बंद हो। 
  • अपने मेरूदण्‍ड को सीधा रखने में आप दीवार का सहारा ले सकते हैं। 
  • अब कुछ गहरी सांसे लेकर शरीर को आराम की स्थिति में लाएं। 
  • नाड़ीशोधन का अभ्‍यास शुरू करने से पहले अपनी ऊंगलियों के बारे में समझना जरूरी है। इसे आप चित्र में देख सकते हैं। 
  • अब अपनी बांयी हथेली को ध्‍यान मुद्रा में लाने के लिए अपनी तर्जनी और अंगूठे को जोड़ते हुए एक गोल आकार दें। और बाकी ऊंगलियों को खुली रखें। 
  • अब दांयी हथेली को नासाग्र मुद्रा में लाने के लिए मध्‍यमा और तर्जनी ऊंगली को मोड़कर बंद करें। बाकी ऊंगलियां खुली रखें। 
  • अब अपने दाएं हथेली के अंगूठे को जो कि नासाग्र मु्द्रा में है, अपनी दांयी नासिक छिद्र पर रखकर नासिका छिद्र बंद कर लें। और बांयी नासिका छिद्र से सांस भीतर लें। 
  • अब बांयी नासिका छिद्र अनामिका और कनिष्‍ठा उंगलियों से बंद कर लें और दांयी नासिका छिद्र से सांस बाहर छोडें। 
  • अब अपनी दांयी नासिक छिद्र से सांस भीतर ले और उसे अंगूठे बंद कर बांयी नासिका छिद्र खोलकर सांस बाहर छोड़ें।
  • यह नाड़ीशोधन प्राणायाम या अनुलोम-विलोम का एक चक्र है। ऐसे पांच चक्र दोहराएं। 

सावधानी

जो लोग नाड़ीशोधन का अभ्‍यास पहली बार कर रहे हैं उनके सांस लेने और छोड़ने का समय सामान्‍य होना चाहिए। और धीरे-धीरे इसका अनुपात बढ़ाकर 1:2 करना चाहिए। 

नाड़ीशोधन प्राणायाम के लाभ 

  • सांस धीमी, स्थिर और नियंत्रित अनुपात में बनाए रखें। 
  • नाड़ीशोधन का मुख्‍य उद्देश्‍य शरीर में उर्जा वहन करने वाली सारी नाडियों का शुद्धिकरण करके पूरे शरीर का पोषण करना है। 
  • नाड़ीशोधन हृदय रोगियों के लिए बहुत लाभदायक है। 
  • नाड़ीशोधन कफ संबंधी विकारों को दूर करता है। 
  • नियमित रूप से नाड़ीशोधन का अभ्‍यास, जीवनशक्ति और एकाग्रता बढ़ाता है, यह तनाव और व्‍यग्रता के स्‍तर को कम करके जीवन स्‍तर को बेहतर बनाता है। 

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