इंसुलिन से संभव है ग्लूकोमा का इलाज, जानें कैसे

By  , ओन्‍ली माई हैल्‍थ सम्पादकीय विभाग
Nov 01, 2017
Quick Bites

  • देश में मधुमेह टाइप-1 और टाइप-2 की बीमारी तेजी से बढ़ रही हैं।
  • मधुमेह की इन दोनों बीमारियों से लोग अवगत हैं।
  • शोध में मधुमेह टाइप-4 का भी पता लगाने का दावा किया है।

देश में मधुमेह टाइप-1 और टाइप-2 की बीमारी तेजी से बढ़ रही हैं। मधुमेह की इन दोनों बीमारियों से लोग अवगत हैं। एम्स के आरपी सेंटर के डॉक्टरों ने शोध में मधुमेह टाइप-4 का भी पता लगाने का दावा किया है। इसका संबंध शरीर के रक्त में मौजूद शुगर स्तर से नहीं है। शोध में यह पाया गया है कि मधुमेह टाइप-4 मस्तिष्क से जुड़ी आंखों की तंत्रिका को प्रभावित करता है, जो ग्लूकोमा (काला मोतिया) जैसी बीमारी का कारण हो सकता है।

हाल ही में एम्स का यह शोध एक अंतरराष्ट्रीय मेडिकल जर्नल (करेंट मॉलिक्यूलर मेडिसिन) में प्रकाशित हुआ है। इस शोध का सकारात्मक पक्ष यह है कि डॉक्टरों को ग्लूकोमा पीड़ितों के इलाज के लिए उम्मीद की एक नई किरण दिखाई पड़ी है। आने वाले दिनों में इंसुलिन से ग्लूकोमा का इलाज संभव हो सकेगा। हालांकि, अभी इसका क्लीनिकल शोध बाकी है।

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एक्‍सपर्ट की राय

शोध में शामिल एम्स के डॉक्टर कहते हैं कि ग्लूकोमा दुनिया भर में अंधेपन का दूसरा सबसे बड़ा कारण है। इसके कारण दुनिया भर में करीब आठ करोड़ लोग अंधेपन के शिकार है, जबकि देश में यह आंकड़ा करीब 1.20 करोड़ है। शुरुआत में इस बीमारी का पता नहीं लगने पर धीरे-धीरे आंखों की रोशनी चली जाती है। इस बीमारी का अब तक ऐसा प्रामाणिक इलाज नहीं है, जिससे रोशनी वापस आ सके।

एम्स में आरपी सेंटर के प्रोफेसर डॉ. तनुज दादा और डॉ. मुनीब फैक ने अपने शोध में मस्तिष्क की तंत्रिकाओं द्वारा उत्पन्न मधुमेह का पता लगाया, जिसे मधुमेह टाइप-4 नाम दिया है। क्या है मधुमेह टाइप-4: डॉ. मुनीब ने बताया कि अग्नाशय में इंसुलिन हार्मोन नहीं बनने से मधुमेह टाइप-1 की बीमारी होती है।

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टाइप-2 से पीड़ित लोगों में अग्नाशय से इंसुलिन बनता तो है, लेकिन कारगर नहीं होता है या कम मात्रा में बनता है। इससे रक्त में शुगर की मात्रा बढ़ जाती है। आंखों की तंत्रिकाओं पर शोध करने पर पाया गया कि मस्तिष्क में जिस जगह आंखों की तंत्रिका जुड़ी होती है, वहां भी इंसुलिन की मौजूदगी होती है। उसके ठीक से कार्य नहीं करने आंखों की तंत्रिकाओं की कोशिकाएं खराब होने लगती हैं, जो ग्लूकोमा का कारण हो सकता है।

शोध से यह सोच मजबूत हुई है कि यदि मस्तिष्क में आंख से जुड़ी तंत्रिका में इंसुलिन की कार्यक्षमता सामान्य कर दी जाए तो ग्लूकोमा ठीक हो सकता है। इसलिए आगे भी शोध किया जाएगा ताकि ऐसी दवा विकसित हो, जिससे ग्लूकोमा का इलाज हो सके। उन्होंने कहा कि अल्जाइमर के मरीजों में मस्तिष्क के ऊपरी हिस्से में इंसुलिन के कार्यक्षमता में गड़बड़ी पाई गई थी, जिसे मधुमेह टाइप-3 नाम दिया गया था।
रणविजय सिंह

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