हाइड्रोसील के उपचार के तरीके

By  , ओन्‍ली माई हैल्‍थ सम्पादकीय विभाग
Jan 25, 2013
Quick Bites

  • हाइड्रोसील की शिकायत एक अंडकोष या दोनों में हो सकती है।
  • हाइडोसील होने पर अंडकोष में सूजन और दर्द हो सकता है।
  • सर्जरी के जरिये आसानी से हाइड्रोसील का उपचार संभव है।
  • एस्‍पीरेशन और हाइड्रोसीलोक्टोमी भी आजमा सकते हैं।

हाइड्रोसील एक बीमारी है जो पुरुषों को होती है, यह एक अंडकोष में भी हो सकती है और दोनों अंडकोषों में भी हो सकती है। जब किसी कारण से अंडकोष में पानी जमा हो जाता है तब अंडकोष की थैली फूल जाती है, तो इसे हाइड्रोसील इसे प्रोसेसस वजायनेलिस या पेटेन्ट प्रोसेसस वजायनलिस भी कहते हैं।

जब अंडकोष में अधिक पानी भर जाता है तो अंडकोष गुब्बारे की तरह फुला हुआ दिखाई देता है। हाइड्रोसील की चिकित्‍सा में पानी निकालने की आवश्‍यकता होती है, अंडकोष में अधिक पानी भर जाने से सूजन और दर्द की शिकायत हो सकती है।

अंडकोष में सूजन या पानी भरना कई कारणों से होता है। अंडकोष पर चोट लगना, नसों का सूज जाना, स्वास्‍थ्‍य समस्‍याओं के कारण भी अंडकोष में सूजन आ सकती है।

कुछ लोगों में हाइड्रोसील की समस्‍या वंशानुगत या जन्मजात भी हो सकती है। जन्मजात हाइड्रोसील नवजात बच्चे में होता है और जन्‍म पहले वर्ष में समाप्त हो सकता है। वैसे तो यह समस्‍या किसी भी उम्र में हो सकती है लेकिन 40 वर्ष के बाद इसकी शिकायत अक्‍सर देखी जाती है। कभी-कभी अंडकोष की सूजन में दर्द बिल्कुल भी नही होता और कभी होता है और वह बढ़ता रहता है।

 

हाइड्रोसील के उपचार के तरीके

 

अंडकोष की जांच

  • अक्सर, आसपास के तरल पदार्थ की वजह से अंडकोष को महसूस नहीं किया जा सकता।
  • हाइड्रोसील में तरल पदार्थ का आकार पेट या अंडकोश की थैली के दबाव की वजह से कम या ज्यादा होता जाता है।
  • अगर शरीर में द्रव के संग्रह का आकार बदलता रहता है, तो यह अधिकतम वक्षण हर्निया के साथ जुड़े होने की संभावना भी होती है।
  • हाइड्रोसील को आसानी से पहचाना जा सकता है।
  • इसके निदान के लिए अल्‍ट्रासाउंड तकनीक भी प्रयोग कर सकते हैं। अल्‍ट्रासाउंड से अंडकोष में भरा द्रव साफ नजर आता है।

 

हाइड्रोसील की चिकित्सा

सर्जरी के जरिये

प्रायः हाइड्रोसील खतरनाक नहीं होते पर फिर भी इसमें सर्जरी की आवश्यकता हो सकती है। यदि हाइड्रोसील का परिमाण इतना बढ़ गया हो जिससे तकलीफ होती हो तो सर्जरी की जरूरत होती है। हाइड्रोसील के कारण रक्‍त संचार में समस्‍या हो सकती है। ऐसे में सर्जरी से इसका उपचार किया जाता है। यदि द्रव साफ हो या कोई इन्फेक्शन या रक्त का रिसाव हो तो इसके निकास के लिए सर्जरी का सहारा लिया जाता है।

 

एस्‍पीरेशन के जरिये

इस प्रक्रिया को सूची वेधन भी कहते हैं, इससे अंडकोष में जमा पानी को निकाला जाता है। एस्पिरेशन करने के बाद छिद्र बन्द करने के लिए स्क्लिरोजिंग औषधि को इंजेक्ट करते हैं। ऐसा करने से भविष्य में भी पानी जमा नहीं होता और हाइड्रोसील की शिकायत दोबारा होने की संभावना भी कम होती है। वैसे तो अंडकोष से पानी निकालने के लिए सर्जरी को प्राथमिकता दी जाती है पर जो सर्जरी का खतरा नही उठाना चाहते उनके लिए यह अच्‍छा तरीका है।

हाइड्रोसीलोक्टोमी

हाइड्रोसील इंग्वाइनल हार्निया होने पर इसे सर्जरी द्वारा शीघ्रातिशीघ्र ठीक किया जाना आवश्यक है। क्योंकि इस तरह का हाइड्रोसील महीनों और सालों तक स्वतः समाप्त नहीं होता। प्रायः हाइड्रोसिलोक्टोमी नामक सर्जरी से हाइड्रोसील ठीक किया जाता है।


वैसे तो हाइड्रोसील का इलाज एस्पिरेशन और स्क्लिरोजिंग से किया जाता है, पर इस तरह से इलाज करने से भी कुछ खतरे हो सकते है। इसकी वजह से अंडकोष के आसपास हल्का दर्द, इन्फेक्शन और फाइब्रोसिस की समस्‍या हो सकती है।

 

Image source : Getty

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