गर्भावस्‍था के दौरान शिशु को प्रभावित करता है तनाव

By  , ओन्‍ली माई हैल्‍थ सम्पादकीय विभाग
Oct 12, 2013
Quick Bites

  • गर्भ में पल रहे बच्चे का मानसिक विकास प्रभावित होता है तनाव से।
  • ‘फाइट टू फाइट’ मोड में शरीर में कोरटिसोल व तनाव संबंधी हार्मोन का स्राव।
  • कोरटिसोल के स्तर को कम करने में काफी मददगार साबित होता है संगीत।
  • गर्भावस्था के दौरान जितना हो सके तनाव से दूर रहने का प्रयास करें।

किसी नए जीवन को इस दुनिया में लेकर आना कोई आसान काम नहीं है। आपको कई बातों को लेकर फिक्रमंद होना पड़ता है। कौन सा भोजन आपके लिए सुरक्षित है। क्या आप अच्छा भोजन कर रही हैं। कौन से व्यायाम आपको सेहतमंद रखेंगे। और इसके बाद बच्चे के जन्म के बाद होने वाली चिंताए भी आपको पहले से ही सताने लगती हैं। आखिर आप कैसे उसका खयाल रखेंगी। अपने काम और मातृत्वो के बीच कैसे सही सामंजस्य बैठा पाएंगी। इस तरह के तमाम चुनौतीपूर्ण सवाल आपको परेशान करते हैं।

effects of stress on pregnancy

गर्भावस्था के दौरान कुछ तनाव होना लाजमी है। यह जीवन के किन्हीं भी अन्य पलों के दौरान होने वाली चिंताओं की ही तरह है। लेकिन, यह तनाव अगर लंबे समय तक बना रहे, तो इसका असर गर्भ में पल रहे आपके बच्चे पर भी पड़ता है। और बच्चे को भी इसका खामियाजा काफी लंबे समय तक भुगतना पड़ सकता है।

 

जब आप तनाव में होती हैं, तो आपका बच्चा ‘फाइट टू फाइट’ मोड में चला जाता है। इस दौरान आपके शरीर में कोरटिसोल व तनाव संबंधी अन्य हार्मोन का स्राव होने लगता है। ये हार्मोन तब अधिक स्रावित होते हैं जब आप खतरे में होते हैं। इससे आपकी मांसपेशियों को अधिक मात्रा में ईंधन यानी रक्त की आवश्यकता पड़ती है और इसे पूरा करने के लिए आपके शरीर को अधिक तेजी से धड़कना पड़ता है।

 

अगर आप अपने तनाव का सामना कर आगे बढ़ सकती हैं, तो कुछ ही देर में आपकी शारीरिक गतिविधियां सामान्य हो जाएंगी। लेकिन, वास्ताव में यह तनाव इतना अधिक खतरनाक नहीं है, असल खतरा उस तनाव से है, जो लंबे समय तक बना रहता है। यह तनाव कई बार इतना खतरनाक हो सकता है कि यह आपके शरीर के तनाव प्रबंधन सिस्टम को ही क्षति पहुंचाता है। इससे आपके भीतर अति प्रतिक्रियावादी रवैया पनपने लगता है। साथ ही इससे सूजन जैसी समस्या भी बढ़ जाती है।

 

सूजन का सीधा संबंध गर्भावस्था में आपकी सेहत से जुड़ा है। इससे गर्भ में पल रहे भ्रूण के विकास पर बुरा असर पड़ता है। कई आंकड़े इस बात की तस्दी क करते हैं कि महिलाओं में अधिक तनाव और समस्या से निपटने की कमजोर तकनीक से बच्चे को कई तरह की समस्यायें हो सकती हैं। इनमें कम वजन और समय पूर्व प्रसव भी शामिल है।


मानसिक तनाव और बच्चे के मस्तिष्क पर असर

क्रॉनिक तनाव न केवल मां के मस्तिष्क‍ पर बुरा असर डालता है, बल्कि इससे गर्भ में पल रहे बच्चे का मानसिक विकास भी प्रभावित होता है। इससे बच्चे को व्यवहारगत कई समस्या हो सकती हैं। हालांकि इस क्षेत्र में अभी काफी कम शोध हुए हैं और डॉक्टर अभी तक तनाव और गर्भावस्था की पेचीदगियों के बीच संबंध तलाशने में जुटे हैं, लेकिन गर्भवती महिलाओं को इस बारे में विचार करने की जरूरत है। गर्भावस्था के दौरान जितना हो सके तनाव से दूर रहने का प्रयास करें। ऐसी बातों के बारे में कम सोचें जो आपको चिंतित कर सकती हैं।

आखिर तनावग्रस्त रहना कौन चाहता है। लेकिन, यह हमारे जीवन का हिस्सा जो बन चुका है। लेकिन, फिर भी तनाव होने पर इससे कैसे छुटकारा पाया जाए, यह जानना ज्यादा जरूरी है। तनाव को लेकर आपको किसी प्रकार की बुरी भावना नहीं पालनी चाहिए। लेकिन, इससे निपटने के लिए हमेशा तैयार रहना चाहिए।

 

कैसे रहें तनाव से दूर

डॉक्टर से करें बात

अपने डॉक्टर से बेफिक्र होकर इस बारे में बात करें कि आखिर कौन सी ऐसी बातें हैं, जो आपको तनावग्रस्त कर रही हैं। आप दोनों मिलकर कोई समाधान खोज सकते हैं, वो ध्यान, योग और टॉक थेरेपी कुछ भी हो सकता है।


गाना गाएं संगीत सुनें

तो क्या हुआ अगर आप सुर में सुर नहीं मिला सकतीं, गुनगुना तो सकती हैं। तो इसे ही आजमा लीजिए। संगीत कोरटिसोल के स्तर को कम करने में काफी मददगार साबित होता है। मधुर संगीत तनावग्रस्त व्यक्ति के लिए किसी दवा से कम नहीं।


आराम करें

कुछ वक्त चिल मारें, गर्म पानी से नहायें, कॉफी का कप पियें, हो सके तो अपनी पसंदीदा किताब पढ़ें, इससे आपको काफी लाभ मिलेगा।

तनाव होना बुरी बात नहीं है, यह तो स्वाभाविक है। जरूरत इस बात की है कि तनाव को अपने ऊपर हावी न होने दिया जाए। जरूरत तनाव को अपने काबू में रखने की है, खुद तनाव के नियंत्रण में होने की नहीं।

 

 

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