हार्मोन्‍स भी हैं मधुमेह का कारण

By  , ओन्‍ली माई हैल्‍थ सम्पादकीय विभाग
Sep 23, 2015
Quick Bites

  • शरीर के विकास को प्रभावित करता है हार्मोंस।
  • हार्मोंस के बदलने से रहता है मधुमेह का खतरा।
  • खून में शक्कर की मात्रा को करता है प्रभावित।
  • गर्भावस्था के दौरान मधुमेह होने का कारण हार्मोंस।

 

हार्मोन्स का हमारे जीवन पर गहरा प्रभाव होता है। ये न सिर्फ शरीर के विकास को प्रभावित करते हैं, बल्कि शरीर के सभी तंत्रों की गतिविधियों को नियंत्रित भी करते हैं। जब हार्मोन्स में असंतुलन होता है तो शरीर के पूरे सिस्टम में गड़बड़ी आ जाती है। हार्मोंस के असंतुलन के कारण मधुमेह की बीमारी होने की आशंका भी बढ़ जाती है। तंदुरुस्त रहने के लिए जरूरी है कि हमारे शरीर में जरूरी हार्मोन्स का उचित मात्रा में स्राव होता रहे। हार्मोन्स का संतुलित ही शरीर को स्वस्थ रखता है।

 
क्या हैं हार्मोन

हार्मोन किसी कोशिका या ग्रंथि द्वारा प्रवाहित ऐसे रसायन होते हैं जो शरीर के दूसरे हिस्से में स्थित कोशिकाओं को प्रभावित करते हैं। शरीर की वृद्धि, मेटाबॉलिज्म और इम्यून सिस्टम पर हार्मोन्स का सीधा प्रभाव होता है। हमारे शरीर में कुल 230 हार्मोन होते हैं, जो शरीर की अलग-अलग क्रियाओं को नियंत्रित करते हैं। हार्मोन की छोटी-सी मात्रा ही कोशिका के मेटाबॉलिज्म को बदलने के लिए काफी होती है। ये एक कैमिकल मैसेंजर की तरह एक कोशिका से दूसरी कोशिका तक सिग्नल पहुंचाते हैं। अधिकतर हार्मोन्स का संचरण रक्त के द्वारा होता है। कई हार्मोन दूसरे हार्मोन्स के निर्माण और प्रवाह को नियंत्रित भी करते हैं।



हार्मोंस के कारण मधुमेह होना

इंसुलिन नामक हार्मोंस खून में शक्कर की मात्रा को नियंत्रित करता है। यह हार्मोंस पेट के पीछे की और स्थित पैनक्रियाज में आइलेट आफ लैंगरहान्स नामक' कोशिकाये होती है। इनमे कुछ अल्फा और कुछ बीटा कोशिकाये होती है। अल्फा कोशिकाओ में ग्लुकागन तथा बीटा में इंसुलिन हार्मोंस बनते है। यह यकृत में उपस्थित ग्लाइकोजन निर्माण पर नियंत्रण रखता है। यह हार्मोन्स शरीर की कोशिकाओ में ग्लूकोज के आक्सीकरण की प्रक्रिया में तेजी लाता हैं। तथा अतिरिक्त ग्लूकोज को यकृत तथा मांसपेशियों में ग्लायिकोजिन के रूप में निक्षेपित करता है। यदि पैनक्रियाज में इंसुलिन कम मात्रा में बनने लगे तो व्यक्ति मधुमेह से पीड़ित हो जाता है। साथ ही खून में शुगर की मात्रा सामान्य से अधिक बढ़ जाता है। मधुमेह के रोगी को बार-बार मूत्र त्यागने की प्रवृति होती है। मूत्र के द्वारा काफी मात्रा में शुगर निकल जाता है। रोगी को अत्यधिक भूख, प्यास लगता है, साथ ही शरीर में कमजोरी और शिथिलता आने लगती है।

 



गर्भावस्था के दौरान हार्मोंस के कारण मधुमेह

हार्मोंन इंसुलिन शुगर को खून से कोशिकाओं में ले जाने में मदद करता है। मधुमेह गर्भावस्था के दौरान भी हो सकता है, क्योंकि गर्भावस्था के समय हार्मोन्स में परिवर्तन होता है, वो शरीर में इंसुलिन के प्रभाव के प्रतिरोधी हैं। इन हार्मोंस में मानव विकास हार्मोन भी शामिल हैं। यह दोनों हार्मोन्स स्वस्थ गर्भावस्था और भ्रूण के लिए जरूरी है। पर यह आंशिक रूप से इंसुलिन की करवाई को रोकते हैं। कुछ महिलाओं में इस हालत में उनके अग्नाशय ज्यादा मात्रा में इंसुलिन पैदा करके इंसुलिन की प्रतिक्रिया से बाहर आने के लिए प्रतिरोध करते हैं। गर्भावधि मधुमेह से प्रभावित महिलाओं में अतिरिक्त इंसुलिन का यदि उत्पादन न हो तो शुगर खून में जम जाती है।

जैसे भ्रूण बड़ा होता जाता है, और हार्मोंस का भी बड़ी मात्रा में उत्पादन होता है, क्योंकि इस समय जब हार्मोंस का स्तर ऊंचा होता है। गर्भावधि मधुमेह आमतौर पर गर्भावस्था के आखिरी तिमाही में शुरू होता है।

 

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