होमोसेक्सुअलिटी से संबंधी तथ्य

By  , ओन्‍ली माई हैल्‍थ सम्पादकीय विभाग
Apr 21, 2012

homosexuality se sambandhi tathya

होमोसेक्सुअलिटी

जब पुरूष को पुरूष की तरफ और महिला का महिला की तरफ झुकाव हो तो उसे होमोसेक्सुअल/लेस्बियन कहते हैं। इस स्थिति में लोग सेम सेक्स की तरफ आकर्षित होते हैं। लेकिन कुछ लोग ऐसे भी हैं जो महिलाओं और पुरूषों दोनों की तरफ आकर्षित होते हैं उनको हेक्ट्रोसेक्सुअल और होमोसेक्सुअल भी कहा जाता है। इन्हेन बाई-सेक्सुअल भी कहा जाता है। किसी को अपोजिट सेक्स, किसी को सेम सेक्स और किसी को महिला और पुरूष दोनों की तरफ आकर्षण होता है। तीनों ही प्रकार के लोग नार्मल हैं। हालांकि सेक्सुअलिटी एक बीमारी है। आइए हम आपको होमोसेक्सुअलिटी से संबंधी तथ्यों को बताते हैं।

 

होमोसेक्सुअलिटी से संबंधी तथ्य  -

  • मॉडर्न साइंस के अनुसार समलैंगिकता की प्रवृत्ति पैदाइशी होती है। न तो इसमें ऐसे लोगों का कसूर होता है और न ही माता-पिता की परवरिश का। जहां मां पावरफुल और बाप दबे हुए होते हैं वहां पर अक्सर संतान के समलैंगिक होने की संभावना ज्यादा होती है।
  • होमोसेक्सुअलिटी एक मानसिक बीमारी की तरह है। दरअसल मेडिकल साइंस के अनुसार दिमाग के अंदर पाई जाने वाली पिट्यूटरी नामक ग्रंथि होती है जो सेक्स हार्मोंस के रिलीज को नियंत्रित करती है, कई बार ये हार्मोंस अधिक मात्रा में तो कभी कम मात्रा में रिलीज होते हैं जिसके कारण विपरीत सेक्स के प्रति आकर्षण होता है।
  • आदमी के दिमाग के अंदर किसी नयूरोंस में अगर कोई खराबी आ जाती है तब हार्मोन का संतुलन अपने-आप बिगड़ जाता है जिससे होमोसेक्सुअलिटी की भावना उत्पन्न हो जाती है।
  • समलैंगिक आदमी का बदलाव तभी मुमकिन है, जब वह अपनी मर्जी से अपने-आप को बदलना चाहे। लेकिन परिवार के दबाव में ऐसा कर पाना मुश्किल है। लडके का अगर लडकी के प्रति झुकाव न हो तो उसकी जबरदस्ती शादी नहीं करनी चाहिए।
  • होमोसेक्सुअलिटी के लिए परवरिश भी काफी हद तक जिम्मेदार होती है। मसलन बढती उम्र के दौरान बच्चे का को-एड स्कूल में न पढना। ऐसे में लडकों का लडकियों के प्रति सहज रूप से कम आकर्षण हो सकता है। लेकिन यह होमोसेक्सुअलिटी के लिए यह पूर्ण रूप से जिम्मेदार कारक नहीं है।
  • ऐसा नहीं है कि होमोसेक्सुअलिटी का इलाज संभव नहीं है इसका इलाज है, लेकिन हर परिस्थिति में ऐसा संभव नहीं। इसके वास्तविक कारणों का पता नही चल पाता है, लेकिन अगर होमोसेक्सुअलिटी के कारणों का पता लग जाए तो तभी इसका इलाज संभव हो सकता है।
  • होमोसेक्सुअलिटी को एड्स के लिए काफी हद तक जिमेदार माना जाता है। आमतौर पर यदि कोई लड़का किसी ऐसे लड़की के साथ सेक्स करे जिसे एड्स हो तो एड्स होने की संभावना लगभग 35 प्रतिशत तक होती है वहीं दूसरी तरफ यदि एक लडका किसी एड्स पीडित लडके के साथ सेक्स करे तो एड्स होने की संभावना 100 प्रतिशत तक होती है।  

हालांकि, होमोसेक्सुअलिटी या लेस्बियन होना कोई बुरी बात नहीं लेकिन इसे प्रकृति के विपरीत माना जाता है। अब भारत में भी इसके लिए कानून बन गए हैं। कई संस्थाएं समलैंगिक हितों के लिए काम कर रही हैं। फिर भी इसे सामाजिक मान्यता अभी तक नहीं मिली है।

 

 

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