गर्भावस्‍था में हाई ब्‍लड प्रेशर (Gestational Hypertension) बन सकता है दिल की बीमारियों का कारण: शोध

हाल में हुए अध्‍ययन में पाया गया है कि जेस्टेशनल हाइपरटेंशन के कारण महिलाओं में आने वाले समय में दिल की बीमारियों के खतरा बढ़ जाता है। 

Sheetal Bisht
Written by: Sheetal BishtPublished at: Jul 06, 2020Updated at: Jul 06, 2020
गर्भावस्‍था में हाई ब्‍लड प्रेशर (Gestational Hypertension) बन सकता है दिल की बीमारियों का कारण: शोध

हाइपरटेंशन या हाई ब्‍लड प्रेशर एक आम बीमारी है, जो किसी को भी हो सकती है। लेकिन गर्भावस्‍था यानि प्रेग्‍नेंसी के समय हाई ब्‍लड प्रेशर होना जच्‍चा-बच्‍चा दोनों के लिए खतरनाक हो सकता है। कहते हैं अगर मां स्‍वस्‍थ हो, तो बच्‍चा भी स्‍वस्‍थ पैदा होता है लेकिन यदि गर्भावस्‍था के दौरान मां बीमार हो, तो उसका असर उसके आने वाले बच्‍चे पर भी पड़ता है। ठीक इसी प्रकार, जेस्टेशनल डायबिटीज और जेस्टेशनल हाइपरटेंशन यानि प्रेग्‍नेंसी के समय हाई बीपी बच्‍चे के स्‍वास्‍थ्‍य पर असर डालने के साथ-साथ महिला के आने वाले जीवन को हृदय रोगों के खतरे में डालता है। ऐसा हम नहीं कह रहे, बल्कि हाल में हुए एक अध्‍ययन में पाया गया है। पूरी रिसर्च जानने के लिए लेख आगे पढ़ें। 

जेस्टेशनल हाइपरटेंशन 

Gestational Hypertension

गर्भावस्‍था के दौरान हाई ब्‍लड प्रेशर को जेस्टेशनल हाइपरटेंशन कहा जाता है। यह आमतौर पर गर्भकाल की आधी अवधि में होता है। जेस्टेशनल हाइपरटेंशन महिलओं के लिए कितना खतरनाक हो सकता है, यह हाल में हुए एक अध्‍ययन से पता चलता है। इस अध्‍ययन में पाया गया है कि गर्भावस्था के दौरान हाई ब्‍लड प्रेशर का अनुभव करने वाली महिलाओं में बाद के जीवन में हृदय रोग और हार्ट फेल्‍योर विकसित होने की संभावना अधिक होती है।

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क्‍या कहती है रिसर्च?

अमेरिकन हार्ट एसोसिएशन के जर्नल में प्रकाशित अध्‍ययन के अनुसार, जेस्टेशनल हाइपरटेंशन और हृदय रोगों के बीच के संबंधों को जांचने के लिए शोधकर्ताओं की एक अंतरराष्ट्रीय टीम ने 21 अध्ययनों की व्यवस्थित समीक्षा और मेटा-विश्लेषण किया। जिसमें कुल 3.6 मिलियन महिलाएं शामिल थीं और इसमें 1,28,000 महिलाएं ऐसी थी जो पहले से जेस्टेशनल हाइपरटेंशन से पीडि़त थी।

शोधकर्ताओं ने पाया कि जिन महिलाओं ने अपनी पहली गर्भावस्था के दौरान हाई ब्‍लड प्रेशर का अनुभव किया था, उनमें हृदय रोग का खतरा 45% अधिक था और गर्भावस्था में सामान्‍य बीपी वाली महिलओं की तुलना में कोरोनरी हार्टर डिजीज का खतरा 46% अधिक था। वहीं एक गर्भावस्‍था से अधिक गर्भावस्‍था में हाई बीपी महसूस करने वाली महिलाओं में हृदय रोग का खतरा 81% अधिक था, जबकि कोरोनरी हार्ट डिजीज का खतरा 83% अधिक था और अनियमित दिल की धड़कन का 77% अधिक जोखिम होता है।

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heart Problem

शोधकर्ताओं का कहना है कि यह पूरी तरह से स्पष्ट नहीं है कि गर्भावधि उच्च रक्तचाप यानि जेस्टेशनल हाइपरटेंशन से बाद के जीवन में हृदय रोग से क्यों जुड़ा है। हालांकि, वे सुझाव देते हैं कि यह हो सकता है क्योंकि जेस्टेशनल हाइपरटेंशन स्थायी क्षति का कारण बनता है, जो हृदय रोग में योगदान देता है। उन्‍होंने कहा है, गर्भावस्‍था में स्‍वस्‍थ खानपान, आदतों और व्‍यायाम के जरिए स्‍वस्‍थ रहा जा सकता है। 

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