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घुटने बदलने या नी रिप्‍लेसमेंट सर्जरी क्‍या है

Onlymyhealth Editorial Team, Date:2016-10-06

घुटनों में आर्थराइटिस होने से कई बार विकलांगता की स्थिति तक आ जाती है। जैसे जैसे घुटने जवाब देने लगते हैं, चलना-फिरना, उठना-बैठना, यहां तक कि बिस्तर से उठ पाना भी मुश्किल हो जाता है। ऐसी स्थिति में नी रिप्लेसमैंट यानी घुटनों का प्रत्यारोपण एक विकल्प के तौर पर मौजूद है। यदि एक्सरे में आप को घुटना या उस के अंदर के भाग अधिक विकार ग्रस्त होते दिख रहे हों या आप घुटनों से लाचार महसूस कर रहे हों, जैसे बेपनाह दर्द, उठने बैठने में तकलीफ, चलने में दिक्कत, घुटने में कड़ापन, सूजन, लाल होना, तो आप घुटना प्रत्यारोपण के लिए उपयुक्त हैं। हर वर्ष पूरे विश्व में लगभग 6.5 लाख लोग अपना घुटना बदलवाते हैं. वैसे, घुटना बदलवाने की उम्र 65 से 70 की उपयुक्त मानी गई है लेकिन यह व्यक्तिगत तौर पर भिन्न भी हो सकती है। घुटने के प्रत्यारोपण के औपरेशन में जांघ वाली हड्डी, जो घुटने के पास जुड़ती है और घुटने को जोड़ने वाली पैर वाली हड्डी, इन दोनों के कार्टिलेज काट कर उच्च स्तरीय तकनीक से प्लास्टिक फिट किया जाता है। कुछ समय में ही दोनों हड्डियों की ऊपरी परत एकदम चिकनी हो जाती है और मरीज चलना फिरना शुरू कर देता है। साधारणतया मरीज ऑपरेशन के 2 दिनों के भीतर ही किसी सहारे से चलने लगता है। फिर 20-25 दिन में सीढ़ी भी चढ़ना शुरू कर देता है। घुटना प्रत्यारोपण के द्वारा ग्रसित भाग को या फिर पूरे घुटने को बदलना संभव है। आइए इस विडियो में पार्क अस्‍पताल के डॉक्‍टर देबाशीष चंदा विस्‍तार से बता रहें है नी रप्‍लेसमेंट सर्जरी के बारे में...

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