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डिप्रेशन के मरीज को कैसे पहचाने

Onlymyhealth Editorial Team, Date:2016-05-24T00:00:00+5:30
एक अनुमान के मुताबिक भारत में लगभग एक मिलियन लोग डिप्रेशन (अवसाद) के शिकार हैं। यह मानव जीवन को किसी भी प्रकार से प्रभावित कर सकता है। वो लोग जो डिप्रेशन से परेशान होते हैं उनके व्‍यक्तिगत और व्‍यावसायिक रिश्ते भी इस बीमारी के प्रभाव से नहीं बच पाते हैं। लेकिन सबसे बड़ी समस्या होती है अवसादग्रस्त लोगों की पहचान करना। पुरूषों की तुलना में महिलाओं में ज्यादा अवसाद की समस्या होती है। जरूरी नहीं है कि अवसाद से पीड़ित मरीजों को समान लक्षणों का अनुभव हो। रोग के लक्षणों की तीव्रता, बारंबारता और अवधि उस व्यक्ति और उसकी बीमारी पर निर्भर होते हुए अलग अलग होती है। अवसाद के लक्षणों के बारे में जानकारी रखना बहुत जरूरी होता है। अक्सर अवसाद के लक्षणों की पहचान के अभाव में इसके इलाज की प्रक्रिया बहुत देर से शुरू करते है जिससे ठीक होने में भी समय लगा है। अवसाद ग्रस्त लोगों के व्यवहार में बदलाव देखा जा सकता है। हमेशा खुश और सामान्य रहने वाले लोग अचानक ही दुखी और परेशान से दिखने लगते है। अचानक ही खाना कम या ज्यादा खाने लगते है। हमेशा थके-थके से लगना व किसी भी काम को करने में मन नहीं करना। यहां तक कि कुछ लोगों की चाल में भी अंतर आ जाता है। ठीक से ना सोना, दोस्तों परिजनों के साथ घूमना-फिरना व बातें करना पंसद नहीं आता व यौन संबंधों आदि में भी दिलचस्पी खो देते है। अक्सर अकेले रहना पंसद करते है। ऐसा जरूरी नहीं कि हर अवसाद ग्रस्त वयक्ति आपको रोते हुए ही मिले। वो आपके बीच सामान्य तरीके से काम करने वाला भी हो सकता है।
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