तन मनBy Onlymyhealth editorial teamSep 16, 2016

बरसात के मौसम में वातावरण में ह्युमिडिटी बढ़ जाती है, जो सांस के जरिए हमारे फेफड़ों में भी चली जाती है। इससे हवा मे मौजूद एलर्जी फैलाने वाले कण और बैक्टीटिया भी फेफड़ों में चले जाते है। जो फेफड़ को संवेदनशील बना देते है। इसी कारण मानसून में संक्रामक बीमारिया व एलर्जी आदि की समस्या बढ़ जाती है। ऐसे में अपने आसपास सफाई रखना चाहिए। मानसून में कूलर का प्रयोग करने से बचे। अगर संभव हो तो एसी में रहे वरना बिना कूलर के रहना ज्यादा बेहतर होता है। ये ह्युमिडिटी को बढ़ा देता है। मानसून के मौसम में घरो में सीलन की जगह पर लगने वाला काले रंग का फंफूद एलर्जी का बहुत बड़ा कारण होता है। ये हमारी सांस की नली में सूजन को पैदा कर देता है। घर में नमी से बचे। जिन लोगो को सांस या अस्थमा संबंधी रोग से पीडित है वो लोग अपने आसपास की सामान को साफ रखें। बेडशीट, चादर, तकिया कालीन आदि को समय समय पर धूप दिखाएं।  घर अंदर के वातावरण को भी ड्राई रखने की कोशिस करे। घर में ठीक तरह से धूप में आने देना चाहिए। नमी के दिनों में कीड़े, संक्रमण आदि का ज्यादा डर होता है और इस वजह से डेंगू, मलेरिया, वायरल बुखार, जुकाम, फ्लू, निमोनिया, आदि जैसी बीमारिया होने की सम्भावना बढ़ जाती है।गीली दीवार के पास सोने से शरीर के अंदर कवक के विकास को बढ़ावा मिलता है, जो कि स्वास्थ्य के लिए बहुत ही हानिकारक साबित हो सकता है।

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