इन 6 योगासनों को अक्सर गलत मुद्रा में करते हैं लोग, जानें सही तरीका

By:Rashmi Upadhyay, Onlymyhealth Editorial Team,Date:Nov 12, 2018
योग में आसन ही नहीं मुद्राएं भी शामिल होती हैं। इन योग मुद्राओं से आप कई प्रकार के स्‍वास्‍थ्‍य लाभ प्राप्‍त कर सकते हैं। आइए कुछ योग मुद्राओं की जानकारी लेते हैं।
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    योग मुद्राएं

    योगा खुद को फिट रखने वाले व्‍यायाम से ज्‍यादा एक प्राचीन कला है। आमतौर पर योग में रिलैक्‍स और शांत रहने के स्‍ट्रेचिंग और सांस की तकनीक का इस्‍तेमाल किया जाता है। लेकिन योग में  आसन ही नहीं मुद्राएं भी शामिल हैं। इन योग मुद्राओं से आप कई प्रकार के स्‍वास्‍थ्‍य लाभ प्राप्‍त कर सकते हैं। हर योग मुद्रा अपने आप में विशिष्ट है और इनका नियमित रूप से सही अभ्‍यास करना चाहिए। योग में मुद्राओं को आसन और प्राणायाम से भी बढ़कर माना जाता है। आसन से शरीर की हडि्डयां लचीली और मजबूत होती है जबकि मुद्राओं से शारीरिक और मानसिक शक्तियों का विकास होता है। आइए कुछ योग मुद्राओं के बारे में जानकारी लेते हैं।

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    योग मुद्राएं
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    ज्ञान मुद्रा

    यह मुद्रा ज्ञान और ध्यान के लिये जानी जाती है। यह मुद्रा सुबह के समय पद्मासन में बैठ कर करनी चाहिये। इसे करने के लिए हाथ की तर्जनी अंगुली के आगे के सिरे को अंगूठे के अग्रभाग के साथ मिलाकर रखने और हल्का-सा दबाव देने से ज्ञान मुद्रा बनती है। इस मुद्रा में दबाना जरूरी नहीं है। बाकी उंगलियां सहज रूप से सीधी रखें। इससे ध्यान केंद्रित करने, अनिद्रा दूर करने तथा गुस्से को कंट्रोल करने में सहायता मिलती है। ज्ञान मुद्रा विद्यार्थियों के लिए किसी वरदान से कम नहीं है। इसके अभ्यास से स्मरण शक्ति और बुद्धि तेज होती है।

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    ज्ञान मुद्रा
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    पृथ्वी मुद्रा

    यह मुद्रा शरीर में खून के दौरे को ठीक रखता है और साथ ही यह हड्डियों को और मासपेशियों में मजबूती लाता है। इसके अलावा शरीर में स्फूर्ति, कान्ति एवं तेज आता है। वजन बढ़ता है, पाचन क्रिया दुरुस्‍त होती है और विटामिन की कमी दूर होती है। पृथ्‍वी मुद्रा को करने के लिए आपको अनामिका (छोटी उंगली के पास वाली) उंगली तथा अंगूठे के सिरे को परस्पर मिलाना होता है। इस मुद्रा को करने से शरीर में पृथ्वी तत्व बढ़ जाते है जिससे सभी प्रकार की शारीरिक कमजोरियां दूर होती हैं। इसे किसी भी आसन या स्थिति में बैठकर अधिकाधिक समय तक इच्छानुसार किया जा सकता है।

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    पृथ्वी मुद्रा
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    वायु मुद्रा

    यह मुद्रा शरीर में वायु को नियंत्रित करने के लिये की जानी चाहिये। यह मुद्रा बैठ कर, खडे़ हो कर या फिर लेट कर दिन में किसी भी समय कर सकते हैं। इसे करने के लिए आपको तर्जनी (अंगूठे के साथ वाली) अंगुली को मोड़कर अंगूठी की जड़ में लगाकर उसे अंगूठे से हल्का-सा दबाना है। इस मुद्रा से रोगी के शरीर में वायु तत्व शीघ्रता से घटने लगते है। अतः शरीर में वायु से होने वाले सभी रोग इस मुद्रा से शांत हो जाते हैं। इसके अलावा लकवा, साइटिका, अर्थराइटिस, घुटने के दर्द ठीक होता हैं।

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    वायु मुद्रा
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    सूर्य मुद्रा

    यह मुद्रा सुबह के समय की जानी चाहिए, ताकी सूर्य की ऊर्जा आपके शरीर में समा सके। सूर्य मुद्रा को करने के लिए अनामिका (सबसे छोटी उंगली के पास वाली) अंगुली को अंगूठे की जड़ में लगाकर अंगूठे से हल्का-सा दबाएं। इस मुद्रा को पद्मासन में बैठकर दोनों हाथों से करना अच्छा रहता है। सूर्य मुद्रा को प्रतिदिन सुबह 5 मिनट के लिए करना चाहिए। इस मुद्रा से अनामिका द्वारा हथेली में थाइरॉइड ग्रंथि का केंद्र दबता है। इस योग मुद्रा से शरीर संतुलित होता है, वजन घटता है और मोटापा कम होता है। साथ ही तनाव में कमी, शक्ति का विकास, कोलस्ट्रॉल को नियंत्रित करने के साथ  डायबिटीज, लीवर आदि की समस्‍याअें को दूर करता है।

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    सूर्य मुद्रा
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    अपान-मुद्रा

    मध्यमा तथा अनामिका, दोनों उंगलियों के अग्रभाग को अंगूठे के अग्रभाग से मिला देने से अपान मुद्रा बनती है। इस मुद्रा में कनिष्ठिका और तर्जनी उंगलियां सहज एवं सीधी रहती हैं। स्वास्थ्य की रक्षा के लिए अपान मुद्रा बहुत महत्वपूर्ण क्रिया है। इसे करने से शरीर से विषैले तत्‍व बाहर निकल जाते हें। यह मुद्रा मूत्र संबंधि समस्या को दूर करती है और पाचन क्रिया को दुरुस्त बनाती है।

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    अपान-मुद्रा
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