महिलाओं को अधिक प्रभावित करते हैं कैंसर के कुछ प्रकार

By:Bharat Malhotra, Onlymyhealth Editorial Team,Date:Nov 24, 2014
यूं तो कैंसर किसी को भी हो सकता है, लेकिन कैंसर के कुछ प्रकार ऐसे होते हैं जो केवल महिलाओं को ही अधिक परेशान करते हैं। यानी महिलायें कैंसर के इस रूप से अधिक प्रभावित होती हैंं।
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    महिलाओं को होने वाले कैंसर

    कैंसर किसी को भी हो सकता है, लेकिन कुछ कैंसर ऐसे हैं जो खासतौर पर महिलाओं को अधिक प्रभावित करते हैं। आइये जानते हैं कौन से हैं ऐसे कैंसर जो केवल महिलाओं को ही अपना शिकार बनाते हैं। image Courtesy- Getty Imges

    महिलाओं को होने वाले कैंसर
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    स्‍तन कैंसर

    महिलाओं को होने वाले कैंसर में सबसे सामान्‍य स्‍तन कैंसर ही है। कैंसर से पीडि़त होने वाली 26 फीसदी महिलाओं को स्‍तन कैंसर की शिकायत होती है। हर आठ में से एक महिला को स्‍तन कैंसर होने की आशंका होती है। इसके साथ ही महिलाओं में कैंसर से होने वाली मौतों में 15 फीसदी का कारण स्‍तन कैंसर होता है। आमतौर पर 50 वर्ष से अधिक आयु की महिलाओं को यह कैंसर होने की आशंका होती है। नियमित रूप से मैमोग्राफी और स्‍व परीक्षण से इस बीमारी का समय रहते पता लगाया जा सकता है।

    स्‍तन कैंसर
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    कोलोन कैंसर

    हालांकि यह स्‍तन कैंसर की तरह खतरनाक नहीं है, लेकिन कोलोन कैंसर भी एक गंभीर समस्‍या है। कैंसर से पीडि़त होने वाली दस फीसदी महिलाओं में कोलोन कैंसर होता है और वहीं कैंसर से मरने वाली महिलाओं में नौ फीसदी कोलोन कैंसर से पीडि़त होती हैं। कोलोन कैंसर से पीडि़त होने वाली करीब 90 फीसदी महिलाओं की उम्र 50 वर्ष से अधिक होती है। मोटापा, शारीरिक सक्रियता का अभाव और साथ ही पारिवारिक इतिहास इस बीमारी के संभावित कारण हो सकते हैं।

    कोलोन कैंसर
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    यूटेराइन कैंसर

    महिलाओं में तीसरा सबसे सामान्‍य कैंसर यूट्रेराइन कैंसर है। कैंसर पीडि़त महिलाओं में लगभग छह फीसदी यूटेराइन कैंसर से पीडि़त होती हैं। वहीं तीन फीसदी कैंसर पीडि़त महिलायें इसके कारण मौत का ग्रास बनती हैं। एस्‍ट्रोजन प्रत्‍यारोपण और बांझपन की शिकार महिलाओं को इस तरह की समस्‍या अधिक होती हैं। तो ऐसी महिलाओं को 35 वर्ष की आयु के बाद नियमित जांच करवानी चाहिये।

    यूटेराइन कैंसर
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    नॉन-हॉडग्‍किंन लिम्‍फोमा

    नॉन-हॉडग्‍किंन लिम्‍फोमा कैंसर पीडि़त चार फीसदी महिलाओं को होता है। और महिलाओं में कैंसर से होने वाली तीन फीसदी मौतें इस बीमारी के कारण होती है। आमतौर पर यह 60 वर्ष की आयु से अधिक की महिलाओं को होता है। यह बीमारी इम्‍यून सिस्‍टम में होकर उसे कमजोर बना देती है। जिससे कोशिकाओं मंे कैंसर होने का खतर बढ़ जाता है। इसके अलावा कुछ कैमिकल्‍स के संपर्क में आने के कारण भी नॉन-हॉडग्‍किंन लिम्‍फोमा
    हो सकता है।

    नॉन-हॉडग्‍किंन लिम्‍फोमा
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    लंग/ब्रोन्‍चस कैंसर

    इस कैंसर के कारण काफी महिलायें अपनी जान गंवाती हैं। इस मामले में यह दूसरे पायदान पर है। हालांकि इस प्रकार के कैंसर के मामले केवल 14 फीसदी होते हैं, लेकिन कैंसर से होने वाली मौतों में यह आंकड़ा 26 फीसदी होता है। इस बीमारी के कारणों में प्रत्‍यक्ष या परोक्ष धूम्रपान, रेडान और अनुवांशिक कारक उत्‍तरदायी हो सकते हैं। फेफड़ों का कैंसर आमतौर पर अधिक उम्र में असर दिखाता है।

    लंग/ब्रोन्‍चस कैंसर
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    ओवेरियन कैंसर

    हर वर्ष करीब 22 हजार महिलायें इस कैंसर का इलाज करवाती हैं जिनमें से करीब 14 हजार जिंदगी की जंग हार जाती हैं। मोनोपॉसल हॉर्मोन थेरेपी करवाने वाली महिलाओं में यह रोग हो सकता है। कुछ जानकार यह भी मानते हैं अधिक समय तक गर्भनिरोधक गोलियों का सेवन करने से भी यह बीमारी हो सकती है।

    ओवेरियन कैंसर
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    सरवाइकल कैंसर

    सरवाइकल कैंसर के लक्षण आमतौर पर नजर नहीं आते और ऐसे में इसका पता लगाना आसान नहीं होता। एक अनुमान के अनुसार अमेरिका में 12 हजार से अधिक महिलायें कैंसर के इस रूप का निदान करवाती हैं। और साल में करीब चार हजार महिलायें कैंसर के सरवाइकल कैंसर के कारण मौत का ग्रास बनती हैं। यह कैंसर अनुवांशिक हो सकता है। ह्यूमन पेपिलोमावयरस भी इसका एक मुख्‍य कारण है। नियमित जांच से इस कैंसर का समय रहते इलाज किया जा सकता है।

    सरवाइकल कैंसर
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    वेगिनल कैंसर

    वेगिनल कैंसर गर्भाशय के आसपास होता है। यह कैंसर अधिक व्‍यापक नहीं है। इसके कारण होने वाली सालाना मौतों का आंकड़ा भी हजार के लगभग ही है। आमतौर पर यह 60 वर्ष से अधिक की आयु की महिलाओं में देखा जाता है। यह डीईएस और एचपीवी संक्रमण के कारण भी हो सकता है।

    वेगिनल कैंसर
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