क्या आप जानते हैं कि क्यों नहीं खाना चाहिये किसी का झूठा भोजन

हिन्दू धर्म में भोजन को केवल खाद्य पदार्थ ना मानकर पूजनीय माना गया है। अन्न अर्थात अनाज को देवता का दर्जा दिया जाता है, शाष्त्रों के अनुसार किसी का झूठा भोजन कर आप किसी का दुर्भाग्य अपने नाम कर लेते हैं।

Rahul Sharma
Written by:Rahul SharmaPublished at: Feb 24, 2016

क्यों नहीं खाना चाहिये किसी का झूठा

क्यों नहीं खाना चाहिये किसी का झूठा
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लोगों के बीच ऐसी मान्यता है कि किसी का जूठा खाने से प्यार बढ़ता है, लेकिन शाष्त्रों के अनुसार किसी का झूठा भोजन कर आप किसी का दुर्भाग्य अपने नाम कर लेते हैं। दरअसल हिन्दू धर्म में भोजन को केवल खाद्य पदार्थ ना मानकर पूजनीय माना गया है। अन्न अर्थात अनाज को देवता का दर्जा दिया जाता है, ऐसी मान्यता है कि अन्न को ग्रहण करने से ही हमें जीवन दान मिलता है इसलिए अन्न से ऊपर कुछ नहीं होता है। तो चलिये विस्तार से जानें कि किसी का झूठा खाने के पीछे हिन्दू धर्म और शाष्त्रों में क्या मान्यताएं हैं। Images source : © Getty Images

भोजन और भजन को रखा जाता है गुप्त

भोजन और भजन को रखा जाता है गुप्त
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शास्त्रों में भोजन और भजन दोनों को गुप्त रखकर करना को बताया गया है। दरअसल भोजन हमारे शरीर को ऊर्जा प्रदान कर हमारे प्राणों का संचार करता है। भोजन से ही वात, पित्त और रक्त आदि में ऊर्जा का संचार होता है। वहीं पंच कर्म पद्धति में जीवन शैली को निर्वाह करने के कुछ नियम बताएं गए हैं, जिनमें से भोजन करना सबसे ऊपर नियम है। शास्त्रों के अनुसार भोजन हमेशा शांत रहते हुए, सुखासन में बैठकर और सात्विक सुविचारों के साथ ही  करना चाहिए। साथ ही शास्त्रों में किसी का जूठा खाने पर भी बड़ा प्रतिबंध है। शाष्त्रों के अनुसार झूठा खाने से तन और मन पर बहुत सारे दुष्प्रभाव पड़ते हैं।Images source : © Getty Images

ज्योतिषशास्त्र के अनुसार

ज्योतिषशास्त्र के अनुसार
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ज्योतिषशास्त्र के अनुसार किसी भी व्यक्ति की कुण्डली का दूसरा भाव जुबान, वाणी सुख, कलत्र, धन की बचत और जीवन में मिलने वाले सुखों को संबोधिक करता है। तो यदि दूसरे भाव में व्यक्ति की वाणी और भाषा पर नकारात्मक असर पड़ता है तो भाषा में कर्कशता का भाव आता है और कई दुष्प्रभाव पड़ते हैं। Images source : © Getty Images

सुख कम हो जाते हैं

सुख कम हो जाते हैं
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ऐसी मान्यता है कि किसी का झूठा खाने से घर-परिवार में कलह बढ़ती है। साथ ही ऐसा भी माना जाता है कि झूठा खाने से भोग-विलासिता में भी कमी आती है।Images source : © Getty Images

अशुद्ध विचार और निर्धनता आती है

अशुद्ध विचार और निर्धनता आती है
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ऐसा माना जाता है कि जिसका जूठा खाते हैं, उसके अशुद्ध विचार आपके मन में भी घर कर जाते हैं। इसके अलावा यह भी माना जाता है कि झूठा खाने से धन संचय नहीं हो पाता है और निर्धनता आती है। Images source : © Getty Images

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