आप हमेशा अपने बच्चों के दोस्त नहीं हो सकते

आप हमेशा अपने बच्चों के दोस्त बनकर नहीं रह सकते और ऐसा होना भी चाहिए। मां-बाप..., मां-बाप होते हैं इसलिए उन जैसा दूसरा इस दुनिया में कोई नहीं होता।

Gayatree Verma
Written by: Gayatree Verma Published at: May 05, 2016

बच्चों के दोस्त

बच्चों के दोस्त
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मां-बाप केवल बच्चों के दोस्त बनकर नहीं रह सकते और उन्हें रहना भी नहीं चाहिए। बच्चों कs पहले गुरू और इंस्पिरेशन उनके मां-बाप ही होते हैं। ऐसे में अभिभावकों का अपने बच्चों का केवल दोस्त बनकर रहना काफी नहीं होता। इक्कसवीं सदी में ये रीत चली है कि बच्चों की दिल की बात जाननी है तो अभिभावकों को उनका दोस्त बनना चाहिए। लेकिन हमेशा नहीं...? और अभिभावक कितना भी चाह लें वो बच्चों के दोस्त नहीं बन सकते हैं और ना बच्चे उन्हें दोस्त के रुप में देख सकते हैं। अभिभावक फ्रैंडली हैं तो अच्छी बात है लेकिन दोस्त होना काफी नहीं।

सीरियस नहीं लेते

सीरियस नहीं लेते
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अगर आप अपने बच्चों के दोस्त बन जाओगे तो आपके प्रति उनका डर खत्म हो जाएगा। इज्जत करना अलग बात है लेकिन डर भी जरूरी है और हर इंसान को किसी ना किसी का तो डर होना चाहिए। खासकर बच्चों को तो जरूर ही होना चाहिए। अगर ये नहीं होगा तो वो आपके कंट्रोल से निकल जाएंगे औऱ आपको किसी भी चीज के लिए सीरियस नहीं लेंगे।

दोस्त बनने के अन्य नुकसान

दोस्त बनने के अन्य नुकसान
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आपकी बात नहीं मानेंगे। दोस्तों की तरह आपको भी टेक इट फॉर ग्रांटेड ले लेंगे। आप फिर उनके साथ चाहकर भी स्ट्रीक्ट नहीं हो पाएंगे। फिर आपसे डरेंगे नहीं।

उन्हें सीखाना

उन्हें सीखाना
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जीवन का पाठ हो या करियर का लेखा-जोखा... बच्चों को सबकुछ उनके मां-बाप ही सिखाते हैं। ऐसे में आप केवल उसके दोस्त बनकर उसे जीवन के पाठ नहीं सीखा सकते। आपको उनके साथ स्ट्रीक्ट होना पड़ेगा। ये उनके लिए ही अच्छा है। क्योंकि आपके स्ट्रीक्ट होने से वो आपसे डरेंगे और आपके डर का सामना करने के लिए अपना हर काम बेस्ट तरीके से करने की कोशिश करेंगे।

उनका विश्वास जीतें

उनका विश्वास जीतें
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आप गलत हैं अगर आप ये सोच रहे हैं कि आप उनके दोस्त नहीं बनें तो वो आपको अपनी कोई भी बात नहीं बताएंगे। आप एक बार उनका विश्वास जीतें। वो आपको हर बात बताएंगे। वैसे भी आपको एक बात बता दें कि बच्चे कभी भी अपनी बातें अपने दोस्तों के साथ शेयर नहीं करते। वे अपनी बातें केवल दो तरह के लोगों से शेयर करते हैं। पहला अनजान लोगों के साथ और दूसरे फिर उनके साथ जिनको देखकर उन्हें लगता है कि वो उन्हें समझेंगे।

अच्छे अभिभावक बनें

अच्छे अभिभावक बनें
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भले ही आपके अभिभावक आपके साथ अच्छे से पेश नहीं आए होंगे। या फिर आपके साथ कुछ ज्यादा ही स्ट्रीक्ट हुए होंगे। लेकिन आप अपने बच्चों के साथ ऐसा ना करें। स्ट्रीक्ट वहीं हों, जहां स्ट्रीक्ट होने की जरूरत है। दोस्त बनने से मना किया है। लेकिन इसका मतलब ये नहीं कि आप अपने दोनों के बीच के रिश्तों की कम्फर्टेबिलिटी ही खत्म कर दें।

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