दुनिया की भीड़ में भी अकेलापन महसूस होना कहीं बीमारी तो नहीं

कई लोगों को तो भीड़ में होने के बावजूद भी अकेलापन महसूस होता है, यह एक समस्‍या है, लेकिन इससे निपटा जा सकता है, आखिर ऐसा क्‍यों होता है इसके बारे में जानते हैं।

Rahul Sharma
Written by: Rahul SharmaPublished at: Oct 19, 2015

भीड़ में अकेलेपन का एहसास

भीड़ में अकेलेपन का एहसास
1/5

लोग कई कारणों से अकेलापन महसूस करते हैं, जैसे कि सामाजिक परेशानी व चुनौतियां। कई लोगों को तो भीड़ में होने के बावजूद भी अकेलापन महसूस होता है, क्योंकि वे लोगों से अर्थपूर्ण संबंध ही नहीं जोड़ पाते हैं। सभी को जीवन में कभी न कभी अकेलेपन का एहसास होता है, लेकिन इसकी आदत बन जाना बिल्कुल अच्छा नहीं होता है। समय के साथ ये आदत एक बीमारी बनती जाती है। अकेलेपन से कई तरह से निबटा जा सकता है, लेकिन इससे निपटने के लिये पहले इसके कारणों की सही जानकारी होनी चाहिये। तो चलिये जानें दुनिया की भीड़ में भी अकेलापन महसूस होने के क्या कारण हैं - Images source : © Getty Images

हम लोगों को दूसरा मौका नहीं देते

हम लोगों को दूसरा मौका नहीं देते
2/5

एक बार ब्रेकअप या विश्वासघात हो जाने के बाद आमतौर पर हम लोगों को एक दूसरा मौका देने के खिलाफ से हो जाते हैं। ऐसी किसी घटना के बाद लड़कियों को लगता है कि सभी लड़के एक से होते हैं, वहीं लड़के मानने लगते हैं कि सभी लडकियां स्वार्थी और मौकापरस्त होती हैं। और फिर इस मानसिकता के चलते लोगों से मिलने व नए संबंध बनाने से बचने की आदत डाल लेते हैं। लेकिन हमें समझना होगा कि पांचों उंगलियां बराबर नहीं होती, और सभी लोग खराब नहीं होते हैं।   Images source : © Getty Image

डर में जीने को आदत बना लेते हैं

डर में जीने को आदत बना लेते हैं
3/5

कई बार हम समाज की रिती या खुद की बनाई सीमाओं के जर के तले रहने को ही अपनी नियति माल लेते हैं और इसी डर के तले जीवन बिताने लगते हैं। कई बार लोग इसी डर के चलते लोगों के सामने खुद को नहीं लाना चाहते और न ही उनसे नज़दीकियां बढ़ाना चाहते हैं। लेकिन क्या जीवन में इतने डर और सीमाओं के साथ रहना सही है। सतर्क रहने में कोई हर्ज़ नहीं, लेकिन सतर्कता और डर के बीच के फर्क को भी समझना जरूरी है।  Images source : © Getty Images

आलोचना बर्दाश्त नहीं कर सकते

आलोचना बर्दाश्त नहीं कर सकते
4/5

आलोचना व्यक्तित्व को को और तराशती है। हम यदि जीवन में तरीफ सुनना चाहते हैं तो आलोचना के लिये भी खुद को तैयार करना होगा। कई बार अलोचना के डर या इसे बर्दाश्त न कर पाने की आदत के चलते हम  खुद को लोगों से दूर कर लेते हैं।  Images source : © Getty Images

लोगों से न मिलने की आदत बना लेना

लोगों से न मिलने की आदत बना लेना
5/5

कई बार हम व्यस्थ नहीं भी होते हैं तब भी दिमाग को ये विश्वास दिला देते हैं कि हम बहुत व्यस्थता में जी रहे हैं। इस तरह हम लोगों से मिलना-जुलना कर देते हैं और ये भविष्य में हमारी एख आदत बन जाता है। सामाजिक होना मानसिक स्वसाथ्य की दृष्टी से बेहद जरूरी होता है। Images source : © Getty Images

Disclaimer