ऐसी स्थितियां जिनमें चुप रहना ही बेहतर

हर बार पलट कर जवाब देना जरूरी नहीं होता है। कभी-कभी यह आपके लिए समस्या भी पैदा कर सकता है। कुछ स्थितियां ऐसी होती है जिनमें चुप रहना ही ज्यादा अच्छा होता है। जानिए उन स्थितियों के बारे में।

Anubha Tripathi
Written by: Anubha TripathiPublished at: Jul 11, 2014

कब रहें चुप

कब रहें चुप
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ऐसा कई बार होता है कि हम गुस्से, तनाव और दबाव की स्थितियों में अपने दोस्तों को चुप रहने के लिए कहते हैं। कई बार खुद भी यह कामना करते हैं कि काश उस समय पर हम चुप रह गए होते। यहां हम कुछ ऐसे ही स्थितियों के बारे में बात कर रहे हैं जिनमें चुप रहना आपके अपने लिए अच्छा रहता है।

बॉस के सामने

बॉस के सामने
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यह जरूरी नहीं कि आपका बॉस हर समय सही हो पर उसके बावजूद बॉस के कहने के तरीकों को समझकर कई बार चुप रहना बेहतर होता है। ऐसी स्थिति में कुछ समय बाद बॉस के मूड को देखकर आप विषय को चतुराई के साथ पेश कर सकते हैं।

बातूनी सहकर्मी

बातूनी सहकर्मी
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आपके आसपास कई ऐसे सहकर्मी हैं जो कि बहुत बोलते हैं। दूसरों की सुविधा के बारे में बिना सोचे अपनी ही बात बोलते रहते हैं। मीटिंग के बीच या व्यस्त समय में उनका यह स्वभाव कई बार झुंझलाहट उत्पन्न करने वाला होता है तो उन्हें इग्नोर कर चुप रहें।

जब नहीं से काम न हो

जब नहीं से काम न हो
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कुछ लोग एक बार न कहने पर वह नहीं समझते। वह अपनी ही बात पर लगातार टिके रहते हैं। ऐसी स्थिति में दूसरे तरीके अपनाना बेहतर होता है। बजाय इसके कि आप उन्हें न कहें, बेहतर होगा कि आप विषय बदल दें। इससे आपको व्यर्थ बातचीत में ऊर्जा खर्च नहीं करना होगा।

गुस्सा आने पर

गुस्सा आने पर
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गुस्सा आने पर चुप रहना सबसे बड़ा संयम है। किसी को भी गुस्सा आना स्वाभाविक है लेकिन इस गुस्से के कारण आप कई बार अपना ही नुकसान कर बैठते हैं। ऐसे में क्रोध नियंत्रण करना जरूरी है। गुस्सा जाहिर करने की जगह गुस्सा को नियंत्रण कर चुप रहना सीखें।

कमेंट करने पर

कमेंट करने पर
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अगर कोई आप पर कमेंट करता है तो आप गुस्से में जवाब न दें। अगर आप गुस्से में कुछ भी बोल देंगे, तो प्रॉब्लम ज्यादा बढ़ सकती है। ऐसे समय में चुप रहना ही बेहतर रहेगा। समय आने पर उससे कूल होकर करारा जवाब दें।  

साथी से बहस के दौरान

साथी से बहस के दौरान
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वैवाहिक जीवन में कई बार ऐसी स्थितियां पैदा होती हैं जब आपको सही होते हुए भी अपने पार्टनर के मूड को समझकर चुप ही रहना चाहिए। वो जो भी बोलता है या बोलती हैं उन्हें पलट कर जवाब ना दें। इससे स्थिति और बिगड़ जाती है।

आरोप-प्रत्यारोप के दौरान

आरोप-प्रत्यारोप के दौरान
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कई बार ऑफिस, घर या दोस्तों के साथ आरोप-प्रत्यारोप की स्थिति पैदा हो जाती है। ऐसे में चिल्ला-चिल्ला कर ओक दूसरे पर आरोप लगाने से अच्छा है कि आप चुप्पी साध लें। इसके अलावा जो लोग ऐसा समझते हैं कि आप डर कर ऐसा कर रहें वो बिल्कुल गलत सोचते हैं।  

नापसंद लोगों से बात करने पर

नापसंद लोगों से बात करने पर
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कई बार ऐसा होता है कि कोई इंसान आपको काफी पंसद करता है लेकिन आपको उसमें कोई दिलचस्पी नहीं होती है। हो सकता है कि वो आपके साथ कहीं बाहर जाने के लिए पूछे या अपनी जिंदगी से जुड़ी कुछ बातें शेयर करना चाहे। ऐसे में उसे पलट कर जवाब देने की जगह चुप रहना ही बेहतर है क्योंकि इसे उसकी भावनाओं को ठेस पहुंचेगी।

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