थूक के बारे में जानें कुछ अहम बातें

रक्त की तरह ही लार में रोग-खुलासा करने वाले अणु समाहित होते हैं। मानव लार में आरएनए अणुओं के समायोजन पर किया गया यह सबसे व्यापक विश्लेषण है। लार से जुड़े रोचक तथ्यों को जानने के लिए ये स्लाइडशो पढ़े।

Aditi Singh
Written by: Aditi Singh Published at: Mar 10, 2016

लार से जाने रोग

लार से जाने रोग
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लार में पाए जाने वाले आरएनए को सैल्युलर मैसेंजर कहा जाता है, जो प्रोटीन बनाते हैं और निर्देशों को कोशिका या सेल के अन्य भागों तक ले जाते हैं। अध्ययन से पता चला है कि यह जटिल रासायनिक प्रतिक्रियायों को प्रदर्शित करता है। इससे मस्तिष्क संबंधी (न्यूरोलॉजिकल) विकार और स्व-प्रतिरक्षित (ऑटो-इम्यून) बीमारियों का जल्दी पता लगा सकता है। Image Source-getty

डायबिटीज व दिल के रोग

डायबिटीज व दिल के रोग
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किसी भी स्वस्थ व्यक्ति के मुंह में प्रतिदिन 1000 से 1500 मिलीलीटर लार बनती है जो मुंह में मौजूद कैविटी, हानिकारक बैक्टीरिया और बारीक भोजन के कणों को साफ करने में मदद करती है।जिस तरह किसी शारारिक समस्या का पता लगाने के लिए ब्लड टेस्ट किया जाता है, उसी तरह लार के टेस्ट से भी सेहत का हाल पता चल सकता है। खासतौर पर एचआईवी के इलाज में लार के टेस्ट का बहुत महत्व है। अब ‍वैज्ञानिक डायबिटीज, दिल के रोग और कैंसर जैसे रोगों का लार से परीक्षण करने की कोशिश कर रहे हैं। Image Source-getty

मुंह का कैंसर

मुंह का कैंसर
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कैलीफोर्निया विश्वविद्यालय के लांस एंजेलिस स्कूल ऑफ डेंटीस्ट्री (एलएएसडी) की शोध के अनुसार लार मुंह के कैंसर का पता लगाने में उपयोगी हो सकती है। मुंह के कैंसर से पीड़ित मरीजों की लार में प्रोटीन के स्तर की जांच की जाती है।  लार को इकट्ठा करना और उसका परीक्षण काफी आसान प्रक्रिया है और एलएएसडी द्वारा जारी रिपोर्ट में कहा गया है कि भविष्य में मुंह के कैंसर के मामलों का पता इसी प्रक्रिया से लगाया जाना संभव हो सकेगा। Image Source-getty

गर्भाधारण का नतीजा

गर्भाधारण का नतीजा
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इटली स्थित ट्यूरिन यूनिवर्सिटी के वैज्ञानिकों ने एक ऐसा उपकरण बनाया है जिससे गर्भाधारण के 98 फीसदी सटीक नतीजे मिल सकते हैं। मेबी बेबी टेस्टर नाम का यह उपकरण महिलाओं के शरीर में ऑइस्ट्रोजन हार्मोन का स्तर आंकेगा, जिसमें तब इजाफा होने लगता है, जब महिला के गर्भधारण करने की गुंजाइश ज्यादा होती है। Image Source-getty

मृत्यु का समय

मृत्यु का समय
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बरमिंघम यूनिवर्सिटी की शोध के मुताबिक लार से पता चल जाएगा कि कोई व्‍यक्ति कितने समय तक जिंदा रहेगा। शोध के अनुसार जो व्‍यक्ति मृत्‍यु के जितना करीब होता है, उसके शरीर में एक खास एंटीबॉडी की संख्‍या काफी कम हो जाती है।लार की जांच करके मनुष्‍य के कुल स्‍वास्‍थ्‍य के बारे में जानकारी हासिल की जा सकती है।Image Source-getty

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