जानें क्‍या है जीका वायरस और कैसे करें इससे बचाव

मच्छर से फैलने वाले इस वायरस का नाम जीका है। यह सीधे नवजात को अपना शिकार बनाता है। इस वायरस से प्रभावित होने वाले बच्चे की सारी जिंदगी विशेष देखभाल करनी पड़ती है, आइए इस वायरस के बारे में जानें।

Pooja Sinha
Written by: Pooja SinhaPublished at: Jan 22, 2016

जीका वायरस

जीका वायरस
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इबोला के बाद एक और खतरनाक वायरस सामने आया है जो धीरे-धीरे मुसीबत बनता जा रहा है। मच्छर से फैलने वाले इस वायरस का नाम जीका है। यह सीधे नवजात को अपना शिकार बनाता है। इस वायरस से प्रभावित होने वाले बच्चे की सारी जिंदगी विशेष देखभाल करनी पड़ती है, क्‍योंकि विषाणुओं के प्रभाव से वहां के नवजात छोटे सिर के साथ पैदा हो रहे हैं। इस साल ऐसे 2400 मामले सामने चुके हैं। जबकि पिछले साल केवल 147 मामले थे। ब्राजील सरकार को डर है कि अभी जन्म लेने वाली पूरी पीढ़ी ही कहीं शारीरिक और मानसिक रूप से विकलांग न हो जाए। Image Source : ticotimes.net

क्‍या है जीका वायरस और इसके लक्षण

क्‍या है जीका वायरस और इसके लक्षण
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जीका वायरस एंडीज इजिप्टी नामक मच्छर से फैलता है। यह वही मच्‍छर है जो पीला बुख़ार, डेंगू और चिकुनगुनिया जैसे विषाणुओं को फैलाने के लिए जिम्मेदार होती हैं। संक्रमित मां से यह नवजात में फैलती है। यह ब्लड ट्रांसफ्यूजन और यौन सम्बन्धों से भी फैलती है। हालांकि, अब तक यौन सम्बन्धों से इस विषाणु के प्रसार का केवल एक ही मामला सामने आया है। जीका को पहचानना बहुत मुश्किल है क्योंकि इसके कोई विशेष लक्षण नहीं हैं। लेकिन मच्छरों के काटने के तीन से बारह दिनों के बीच चार में से तीन व्यक्तियों में तेज बुखार, रैशेज, सिर दर्द और जोड़ों में दर्द के लक्षण देखे गये हैं। Image Source : elitereaders.com

जीका वायरस का इतिहास

 जीका वायरस का इतिहास
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जीका वायरस 1940 में सबसे पहले युगांडा में पाया गया था। उसके बाद यह महामारी की तरह अफ्रीका के कई हिस्सों में फैला। इसके बाद दक्षिण प्रशांत और एशिया के कुछ देशों में भी फैला। कुछ समय पहले यह लैटिन अमेरिका पहुंचा है। इस साल के शुरू में यह ब्राजील में दिखा। कुछ डॉक्टरों का मानना है कि यह 2014 के फुटबॉल विश्व कप के दौरान एशिया या दक्षिण प्रशांत से आया होगा।

जीका वायरस का असर

जीका वायरस का असर
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इससे माइक्रोसेफली नाम की बीमारी का खतरा रहता है। माइक्रोसेफली एक न्यूरोलॉजिकल समस्या है। इसमें बच्चे का सिर छोटा रह जाता है और उसके दिमाग का भी पूरा विकास नहीं हो पाता। इससे बच्चों की जान को भी खतरा होता है। इसके प्रकोप से बच जाने वाले बच्चे ताउम्र बुद्धि सम्बन्धी दोषों से जूझते रहेंगे। Image Source : telegraph.co.uk

बचाव ही है बेहतर उपाय

बचाव ही है बेहतर उपाय
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इसकी रोकथाम के लिये अब तक दवाई नहीं बनी और न ही इसके उपचार का कोई सटीक तरीका सामने आया है। ब्राजील के स्वास्थ्य मंत्रालय ने इसे अप्रत्याशित बताया और कहा कि विज्ञान ने अभी इसे रोकने में सफलता हासिल नहीं की है। इसलिए बचना ही बेहतर है। अमेरिका की सेंटर्स फॉर डिजीज कंट्रोल के अनुसार समूचे विश्व में इस तरह के मच्छरों के पाये जाने के कारण इस विषाणु का प्रसार दूसरे देशों में भी हो सकता है। भारत भी इससे अछूता नहीं रह सकता।Image Source : nyt.com

बचाव के तरीके

बचाव के तरीके
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जीका वायरस का कोई इलाज नहीं है, इससे बचने का एकमात्र विकल्‍प इसके जोखिम को कम करना है। इसके लिए स्वास्थ्य अधिकारी कीट नाशकों का उपयोग, पूरी बाजू के कपड़े जिससे शरीर कवर हो और खिड़कियों और दरवाजों को बंद करने की सलाह देते हैं। इसके साथ ही उनका कहना है कि ऐसे मच्‍छर रूके पानी में अपने अंडे देते हैं इसलिए पानी को इकट्ठा होने से रोकें। इसके अलावा यूएस सेंट्रर ऑफ डिजीज कंट्रोल गर्भवती महिलाओं को प्रभावित क्षेत्रों में यात्रा न करने की सलाह देते हैं। Image Source : Getty

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