जानें क्‍या है लिप बॉम एडिक्‍शन और कैसे करें इससे बचाव

सर्द मौसम में होठों का रूखापन दूर करने के लिए लोग लिप बॉम का प्रयोग करते हैं, लेकिन सामान्‍य से अधिक प्रयोग नुकसानदेह होता है, इस स्‍लाइडशो में जानें क्‍या है लिप बॉम एडिक्‍शन और कैसे करें इससे बचाव।

Meera Roy
Written by: Meera RoyPublished at: Nov 30, 2015

लिप बाम लगाने की आदत

लिप बाम लगाने की आदत
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सर्दी आती नहीं है कि हम अपने होंठों के प्रति सजग होने लगते हैं। सबके बैग या पर्स में एक लिप बाम अवश्य मिल जाता है। यह कोई बुरी बात नहीं है। लिप बाम के जरिये होंठ मुलायम रहते हैं। सबसे बड़ी बात यह है कि फटने के दर्द से रूबरू नहीं होना पड़ता है। लेकिन शायद आपको यह पता नहीं है कि कई लोगों को लिप बाम लगाने का नशा है। हद तो यह है कि उन्हें इस बात का पता ही नहीं है। लिप बाम एडिक्शन सामान्य रूप में शुरु होता है। जैसे कि होंठ फटना, होंठों का सूखना आदि। निःसंदेह लिप बाम आवश्यक है। लेकिन इसे नशा बनाने से बचना भी जरूरी है। सो, इस सर्दी लिप बाम एडिक्शन से बचने के उपाय पर गौर करते हैं।Image Source-Getty

लेबल पढ़ें

लेबल पढ़ें
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अब आप सोचेंगे कि लिप बाम के लेबल कौन पढ़ता है? लेकिन जिस तरह आप अपनी त्वचा के प्रति सजग हैं, उसी प्रकार होंठों के प्रति भी सचेत होना जरूरी है। कई लिप बाप में पुदीना, कपूर आदि चीजों का इस्तेमाल किया जाता है। असल में ये पदार्थ हमारे होंठों को जितना गीला और मुलायम रखते हैं, होंठों को सुखाए रखने के लिए भी उतने ही जिम्मेदार हैं। यही कारण है कि जब हम एक बार लिप बाम लगाना शुरु करते हैं तो उसकी आदत और फिर नशा होने लगता है। अतः लेबल का ध्यान रखें। इसके अलावा शराब के कारण भी होंठ सूखते हैं। शराब कम पीयें।Image Source-Getty

लिप बाम की लत

लिप बाम की लत
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आश्चर्य होता है यह सुनकर कि हमें लिप बाम की लत लग गई है। कई लोग इस पर विश्वास ही नहीं करते। लेकिन आपको बता दें कि नशा शारीरिक और मानसिक दोनों रूपों का होता है। फिजीकल या कहें भौतिक नशे दिखते हैं जैसे कि सिगरेट के जरिये निकोटिन का सेवन करना। मानसिक नशा वेा होता है जिसमें एक ही गतिविधि को बार बार दोहराना और उसमें आनंद आना। लिप बाम ऐसी ही गतिविधि का हिस्सा है। यही कारण है कि यह कब नशा बन जाए पता ही नहीं चलता।Image Source-Getty

होंठों पर लिप बाम का प्रभाव

होंठों पर लिप बाम का प्रभाव
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यूं तो लिप बाम इसलिए लगाया जाता है ताकि होंठ मुलायम रहें और फटे नहीं। लेकिन शायद आपको यह ज्ञात न हो कि बार बार लिप बाम लगाने से होंठ अपने प्राकृतिक वजूद खोने लगते हैं। होंठ प्राकृति रूप से मुलायम होते हैं। लेकिन लिप बाम की लत के चलते हम इसे खो बैठते हैं।Image Source-Getty

होंठों के रंग पर प्रभाव

होंठों के रंग पर प्रभाव
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आजकल बाजार में विभिन्न रंगों के लिप बाम उपलब्ध हैं। यह कहने की जरूरत नहीं है कि इन्हें अलग अलग रसायनों से बनाया जाता है। यदि आप नए नए लिप बाम ब्रांड को इस्तेमाल करने के शौकीन हैं तो फिर अपने होंठों के रंग को भी एक बार नोटिस कर लीजिए। कहीं ऐसा तो नहीं है कि नकली रंग के नीचे असली रंग खो गया है। जी, हां! अकसर ऐसा होता है कि नकली रंग के चलते हमारे होंठों का असली रंग धुंधला पड़ जाता है यानी वह लालीमा खो बैठता है।Image Source-Getty

लिप बाम न छोड़ें

लिप बाम न छोड़ें
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आपको यह सलाह अवश्य दी जा रही है कि लिप बाम की अति बुरी है। लेकिन इसका मतलब यह नहीं है कि लिप बाम को पूरी तरह से टाटा बाय बाय कर दिया जाए। आप लिप बाम अवश्य लगाएं। मगर ध्यान रखें कि कहीं लत न हो जाए। लिप बाम के कुछ विकल्प यानी मलाई, मक्खन आदि को भी इस्तेमाल किया जा सकता है।Image Source-Getty

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