जानें अभ्रक के प्रकार और इनके फायदे

अभ्रक भस्म आयुर्वेद में प्रयोग की जानी वाली एक प्रचीन दवा है। इसे अकेले या फिर अन्य घटकों के साथ लेने पर कई तरह के रोगों का नाश होता है। विशेषकर कफ रोगों, उदर रोगों, नसों की कमजोरी, पुरुषों के विकारों आदि में यह भस्म बहुत लाभप्रद होती है।

Rahul Sharma
Written by: Rahul SharmaPublished at: Jun 17, 2016

अभ्रक भस्म

अभ्रक भस्म
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अभ्रक भस्म आयुर्वेद में प्रयोग की जानी वाली एक प्रचीन दवा है। इसे अकेले या फिर अन्य घटकों के साथ लेने पर कई तरह के रोगों का नाश होता है। विशेषकर कफ रोगों, उदर रोगों, नसों की कमजोरी, पुरुषों के विकारों आदि में यह भस्म बहुत लाभप्रद होती है। यह त्रिदोष के रोगों, प्रमेह, कुष्ठ, टीबी, लीवर-स्पलीन रोगों, बुखार, गुल्म, ग्रन्थि, कमजोरी, हृदय रोग, उन्माद, वीर्यपात, नपुंसकता, नसों की कमजोरी, आदि में भी असरदार काम करती है। इसके सेवन से शरीर में लोहे की कमी भी दूर होती है।

अभ्रक भस्म के गुण

अभ्रक भस्म के गुण
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अभ्रक भस्म में लोहा प्रचुर मात्रा में होता है इसके अलावा इसमें मैग्नीशियम, पोटासियम, कैल्शियम, एल्युमीनियम भी होते हैं। यह यौन दुर्बलता को दूर करने वाली औषधि है। अभ्रक भस्म प्रसूत रोगों में भी प्रयोग की जाती है। अभ्रक भस्म यह त्रिदोष, घाव, प्रमेह, पेट रोग, कफ रोग, वीर्य विकार, गांठ, विष और कृमि को दूर करने वाली होती है।

अभ्रक के बारे में सामान्य जानकारी

अभ्रक के बारे में सामान्य जानकारी
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 अभ्रक के आयुर्वेदिक नाम गगन, भृंग, अभ्र, व्योम, वज्र, घन, गिरिज, बहुपत्र, अनन्तक, आकाश, अम्बर, मेघ आदि होते हैं। यह भारत के कई प्रदेशों जैसे बंगाल के रानीगंज, बिहार में हजारी बाग़, गिरीडीह, राजस्थान के चित्तौड़ और भीलवाड़ा आदि में पाया जाता है। वज्राभ्रक, हिमालय, हिमाचल, भूटान आदि में पाया जाता है। आयुर्वेद में हिमालय से मिलने वाला अभ्रक उत्तम जबकि पूर्वीय देशों से प्राप्त मध्यम और दक्षिण पर्वतों से प्राप्त निषिद्ध माना जाता है।

अभ्रक के प्रकार

अभ्रक के प्रकार
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आयुर्वेद में अभ्रक के निम्न चार प्रकार माने जाते हैं -  पिनाक अभ्रकददूर्र अभ्रकनाग अभ्रक वज्राभ्रक

अभ्रक भस्म के फायदे

अभ्रक भस्म के फायदे
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अभ्रक के सेवन से शरीर सुदृढ़ और बलवान बनता है।अभ्रक बलकारक, त्रिदोषघ्न, यकृत की रक्षा करने वाली एक रसायन औषधि है। अभ्रक अनीमिया को दूर करती है और रक्त धातु को पोषित करती है। अभ्रक उत्तम वाजीकारक है और कामेच्छा को बढाती है। अभ्रक स्पर्म काउंट बढ़ाने में मदद करती है। लीवर के रोगों में इसका सेवन करने से रोग दूर होते हैं और लीवर मजबूत बनता है।  यह कफ रोगों को दूर करती है। यह त्वचा रोगों विशेषकर लेप्रोसी में लाभदायक होती है।

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