चिंता करना है स्‍वास्‍थ्‍य के लिए नुकसानदेह

चिंता स्वास्थ्य के लिए बेहद खतरनाक हो सकती हैं। इसके दुष्‍प्रभाव से शरीर का कोई भी अंग नहीं बच पाता। यह पेट, त्वचा, लीवर, फेफड़ों, दिल यहां तक की मांसपेशियों को भी प्रभावित करती है।

Pooja Sinha
Written by: Pooja SinhaPublished at: Jun 03, 2014

चिंता का असर

चिंता का असर
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हर चार में से लगभग एक भारतीय चिंता विकारों से प्रभावित रहता हैं। यह आधुनिक जीवन का एक हिस्सा बन गया है। अगर आप प्रभावित लोगों में से एक हैं तो आपको इसके नकारात्‍मक प्रभावों से परिचित होने की जरूरत हैं ताकी आप दैनिक जीवन में आने वाली चिंता का मुकाबला करने के लिए तैयार हो सकें। आइए खोजे कि चिंता आपके शरीर में कैसे प्रभावित करती हैं। image courtesy : getty images

गले की परेशानी

गले की परेशानी
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तनाव का असर सबसे पहले आपके गले पर दिखना शुरू हो जाता है। एक तनावपूर्ण स्थिति में आपके शरीर की तत्काल प्रतिक्रिया एक कर्कश और चरचरानेवाला वाली आवाज के रूप में होती है। ऐसा इसलिए होता है क्‍योंकि तनाव वाली स्थिति में तरल पदार्थ शरीर के दूसरे भाग की पूर्ति करने में लग जाते है। ऐसे में गले की मांसपेशियों में खिचाव आ जाता है और कुछ भी खाने में दिक्कत आती है। image courtesy : getty images

लीवर पर असर

लीवर पर असर
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चिंता की स्थिति में शरीर तनाव बढ़ाने वाले हार्मोन कोर्टिजोल का अत्‍यधिक मात्रा में उत्‍पादन करता है। और कोर्टिजोल की मात्रा बढ़ने से लीवर में ग्लूकोज का स्राव बढ़ जाता है। जिससे डायबिटीज से पीड़‍ित लोगों के ब्‍लड में ग्लूकोज बढ़ने से परेशानी बढ़ जाती है। image courtesy : getty images

त्वचा में परेशानी

त्वचा में परेशानी
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चिंता के दौरान शरीर की "लड़ने या उड़ान" की प्रणाली के कारण मांसपेशियों में रक्त का अधिक प्रवाह होने लगता है जिससे ठंड, चिपचिपा पसीना, गर्म गाल आदि की समस्‍या होने लगती है। और अगर आप क्रोनिक चिंता से पीड़‍ित है तो त्वचा पर तेजी से झुर्रियां पड़ने लगती है। मैरीलैंड मेडिकल सेंटर की यूनिवर्सिटी के अनुसार, तनाव और चिंता के कारण एक्जिमा का प्रकोप भी बढ़ने लगता है। image courtesy : getty images

तिल्ली की गतिविधि पर असर

तिल्ली की गतिविधि पर असर
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हमारे दिमाग और दिल के साथ चिंता तिल्‍ली और रक्त कोशिकाओं जैसे आंतरिक कार्यों को भी प्रभावित करती है। चिंता के दौरान हमारे ऑक्‍सीजन का स्‍तर कम होने लगता है, जिससे कारण तिल्ली अतिरिक्त लाल और सफेद रक्त कोशिकाओं का निर्वहन करने लगती है। image courtesy : getty images

मांसपेशियों में खिचाव

मांसपेशियों में खिचाव
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चिंता या तनाव होने पर मांसपेशियों में खिचाव आ जाता है। यह प्राकृतिक प्रकिया है जैसे ही आप तनाव महसूस करेंगे, आपको अपनी मांसपेशियों में एक अजीब सा खिंचाव महसूस होगा। मांसपेशी में खिंचाव और ऐंठन होने की वजह से सिर दर्द, कंधों में खिंचाव और माइग्रेन जैसी समस्या हो सकती है। इस‍के अलावा निरंतर रहता तनाव आपको मुस्कुलोस्केलेटल (मांसपेशियों और हड्डियों से संब‍ंधित) विकारों के उच्‍च जोखिम में डाल सकता है।  image courtesy : getty images

दिल की बीमारियों का उच्‍च जोखिम

दिल की बीमारियों का उच्‍च जोखिम
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चिंता और क्रोनिक तनाव के कारण हृदय गति, रक्तचाप और कोर्टिसोल में वृद्धि होने के कारण यह हृदय समस्याओं का जोखिम बढ़ा देता है। अमेरिकन साइकोलॉजिकल एसोसिएशन के अनुसार, लंबे समय तक तनाव उच्च रक्तचाप, एसिडिटी और स्ट्रोक के खतरे को भी बढ़ा देता है। image courtesy : getty images

फेफड़ों पर प्रभाव

फेफड़ों पर प्रभाव
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कुछ अध्ययनों के अनुसार, चिंता अस्थमा से संबंधित होता है। इसलिए चिंता के दौरान अस्‍थमा से ग्रस्‍त मरीजों को अटैक पड़ने की संभावना अधिक रहती है। साओ पाओलो यूनिवर्सिटी द्वारा चिंता पर किए गए एक शोध के अनुसार, अस्थमा, चिंता और संतुलन पर इसके प्रभाव के बीच एक संबंध होता है। image courtesy : getty images

ब्रेन में कठिनाइयां

ब्रेन में कठिनाइयां
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पुराने तनाव और चिंता के कारण ब्रेन दीर्घकालिक स्मृति, अल्पकालिक स्मृति और रासायनिक उत्पादन से प्रभावित रहता है, जिससे इन क्षेत्रों में असंतुलन बना रहता है। image courtesy : getty images

नींद की समस्‍या

नींद की समस्‍या
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तनाव और चिंता से पीड़ित लगभग 54 प्रतिशत लोगों को नींद आने में समस्‍या का अनुभव होता है। इसके अलावा, एंग्जायटी एंड डिप्रेशन एसोसिएशन ऑफ अमेरिका के अनुसार, 50 प्रतिशत से अधिक पुरुषों और 40 प्रतिशत से अधिक महिलाओं में अधिक अगले दिन एकाग्रता की परेशानी पाई जाती है। image courtesy : getty images

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