हार्मोनल असंतुलन के लक्षण और इलाज

हमारे शरीर में हार्मोन्स का काफी महत्व है। इसके असंतुलन से कई तरह की समस्याएं पैदा होती हैं। आइए जानें उन समस्याओं और इसके इलाज के बारे में।

Anubha Tripathi
Written by:Anubha TripathiPublished at: Aug 05, 2014

हॉर्मोंस के काम

हॉर्मोंस के काम
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हार्मोन्स शरीर की सभी गतिविधियों को नियंत्रित करते हैं। ये हमारे शरीर की वृद्घि और विकास के लिए जरूरी हैं। और जब हार्मोन के स्राव में असंतुलन होता है तो शरीर के पूरे सिस्टम में गड़बड़ी आ जाती है। स्वस्थ रहने के लिए जरूरी है कि हमारे शरीर में जरूरी हार्मोन्स का स्‍तर संतुलित रहे। हॉर्मोन की गड़बड़ी से कई स्वास्थ्य समस्याएं शुरू हो जाती हैं। जानिए उन समस्याओं के बारे में और उनसे निपटने के तरीकों के बारे में।  

लगातार वजन बढ़ना

लगातार वजन बढ़ना
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यह सच है कि लाइफस्टाइल, डाइट और शारीरिक गतिविधि के जरिए आप वजन पर काबू रख सकते हैं। लेकिन बात यहीं खत्म नहीं होती। कई महिलाओं के शरीर में हार्मोन का स्‍तर बिगड़ जाता है। इससे उनके लिए वजन काबू कर पाना मुश्किल हो जाता है। इनसुलिन के स्‍तर की अनेदखी और प्रतिरोधकता में बढ़ोत्‍तरी भी वजन बढ़ने का कारण हो सकती है। आहार में छोटे-मोटे बदलाव कर इस समस्‍या से बचा जा सकता है। प्रोसेस्‍ड फूड, चीनी और गेहूं से बने उत्‍पादों से दूरी रखकर आप सही दिशा में कदम बढ़ा सकते हैं।    

कामेच्‍छा में कमी

कामेच्‍छा में कमी
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हार्मोन के असंतुलन का एक बड़ा लक्षण कामेच्‍छा में कमी होना होता है। इसकी शुरुआत नींद में खलल से होती है। अच्‍छी और पूरी नींद के बिना हमारे सेक्स हॉर्मोन का उत्‍पादन मंद पड़ सकता है। अपनी दिनचर्या में बदलाव करें। पौष्टिक आहार को अपनी रोजमर्रा की जिंदगी का हिस्‍सा बनायें। इसके साथ ही रोजाना व्‍यायाम के लिए कुछ समय निकालें। व्‍यायाम से आपके शरीर में हॉर्मोन का स्‍तर संतुलित रहता और आपको बढ़िया नींद आती है।

थकान

थकान
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दोपहर होते-होते थकान आप पर पूरी तरह हावी हो चुकी होती है। कभी*कभी ऐसा होना कोई बड़ी परेशान करने वाली बात नहीं। लेकिन, रोज-रोज सुस्‍त, बिखरा रहना और मानसिक रूप से परेशान रहना अच्‍छे संकेत नहीं है। अपनी आहार योजना में बदलाव कीजिये। अपने आहार से गेंहूं और अनाज से बनी चीजों को बाहार कर दें। इससे आपको रक्‍त शर्करा को संतुलित करने में मदद मिलेगी। रक्‍त शर्करा नियंत्रित होने पर आप बेहतर ऊर्जा के साथ काम कर सकेंगे।

चिंता व तनाव और चिड़चिड़ापन

चिंता व तनाव और चिड़चिड़ापन
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आपका मूड सही नहीं है। यह दवा विक्रेता के पास जाने का वक्‍त नहीं है। चिंता और अवसाद इस बात का संकेत है कि आपके शरीर में कुछ हॉर्मोंस असंतुलित हैं। आपके शरीर में विषाक्‍ता बढ़ गई और आप पर काम का अधिक बोझ है। तनाव आपको शिथिल कर रहा है। और साथ ही आपके शरीर को उतना पोषण नहीं मिल रहा जिसकी उसे जरूरत है। अपने भीतर की आवाज सुनें। दिमाग को जरूरी आराम दीजिये। इसके साथ ही योग, ध्‍यान और व्‍यायाम से भी अपने मस्तिष्‍क को जरूरी पोषण दीजिये। अपने आहार में ओमेगा फैटी-3 एसिड युक्‍त आहार, जैसे मछली, बादाम और अखरोट जैसे खाद्य पदार्थों को शामिल कीजिये।

अनिद्रा या नींद की कमी

अनिद्रा या नींद की कमी
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हार्मोन बिगड़ने पर लोगों में शारीरिक तनाव और कार्टिसोल का स्तर बढ़ने लगता है। इससे आपको नींद ना आने की शिकायत होने लगती है। अनिद्रा आपके जीवन के हर हिस्‍से को बुरी तरह प्रभावित करती है। नींद न आने की समस्‍या से बचने के लिए आपको शांत रहने की कोशिश करनी चाहिये। अपने आहार में बदलाव कीजिये और शाम के समय हल्‍का भोजन कीजिये। व्‍यायाम, योग, ध्‍यान और पोषक आहार आपको अनिद्रा की समस्‍या से बचा सकते हैं।

पसीना आना

पसीना आना
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कई महिलाओं में रात को पसीना और हॉट फ्लेशज की शिकायत होती है। यह किसी गड़बड़ी की पहली आशंका होते हैं। यह हॉर्मोन रिप्‍लेसमेंट थेरेपी करवाने का वक्‍त नहीं होता। लेकिन अपने आहार में बदलाव करने का वक्‍त जरूर होता है। आपको अपने शारीरिक और मानसिक जरूरतों में संतुलन बनाकर रखना चाहिये। कई बार भावनायें भी भीतरी तापमान बढ़ा सकती हैं। अधिक तेल मसाले वाले खाने से बचने की कोशिश करें। साथ ही जब आपको हॉट फ्लैश की शिकायत होने लगे तो अपने मस्तिष्‍क में चल रहे विचारों को नियंत्रित करने का प्रयास करें।

पाचन संबंधी समस्या

पाचन संबंधी समस्या
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गैस, सूजन और धीमी पाचन क्रिया का संबंध हॉर्मोन से है, लेकिन आमतौर पर इसका संबंध हार्मोन असंतुलन से नहीं होता। गलत आहार का सेवन, भोजन को सही प्रकार से नहीं चबाना अथवा अधिक खाने से यह समस्‍या हो सकती है। जब आपका हाजमा सही नहीं होता, गलत आहार से शरीर को अधिक भूख लगती है। अपनी भूख का ध्‍यान रखें। भोजन को धीरे-धीरे चबाकर अच्‍छी तरह खायें। हमारे पेट से मस्तिष्‍क तक संदेश जाने में 20 मिनट लगते हैं। इसलिए भूख से कम ही खायें।  

तृष्णा

तृष्णा
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भोजन के बाद भी आपको कुछ न कुछ खाने की इच्‍छा होती है। इसके पीछे एड्रिनल ग्रंथि की थकान, इनसुलिन प्रतिरोधकता, और अन्‍य हॉर्मोन असंतुलन हो सकते हैं। शुगर, एल्कोहल, डेयरी उत्पाद और गेंहू कम मात्रा में लें। इससे आपकी तृष्‍णा भी नियंत्रित रहेगी साथ ही पाचन क्रिया भी सही रहेगी।  

पेट बढ़ना और मांसपेशियों का कम होना

पेट बढ़ना और मांसपेशियों का कम होना
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इंडोस्रीन (अंत: स्रावी) सिस्टम पर अधिक दबाव रहने पर हॉर्मोंस का उत्‍पादन गड़बड़ा जाता है। कुछ हॉर्मोंस आवश्‍यकता से कम उत्‍पादित होते हैं, तो कुछ का उत्‍पादन आवश्‍यकता से अधिक होने लगता है। इससे शरीर भविष्‍य में उपयोग के उद्देश्‍य से कुछ वसा को जमा करके रखने लगता है। जिससे आपके पेट पर अधिक चर्बी जमा होने लगती है। यह एड्रिनल ग्रंथि का पूरी क्षमता से काम कर पाने का भी संकेत होता है।

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