पुरुषों में इनफर्टिलिटी (बांझपन) से जुड़ी 10 बातें, जो आपको जरूर जाननी चाहिए

पुरुषों में इनफर्टिलिटी या बांझपन की समस्या खानपान और जीवनशैली के अलावा कई अन्य कारणों से हो सकती है, जानें इससे जुड़ी जरूरी बातें।

Prins Bahadur Singh
Written by: Prins Bahadur SinghPublished at: Dec 02, 2021

पुरुषों में इनफर्टिलिटी

पुरुषों में इनफर्टिलिटी
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पुरुषों में इनफर्टिलिटी या बांझपन एक ऐसी समस्या है जिसपर हमारे समाज में बहुत कम बात की जाती है। दरअसल इसे पुराने समय से ही महिलाओं से ही जोड़कर देखा जाता है। जबकि ऐसा बिलकुल भी नहीं है कि बांझपन की समस्या सिर्फ महिलाओं में ही होती है। आज के समय में खानपान से जुड़ी गलत आदतों और लाइफस्टाइल के कारण लाखों की संख्या में पुरुष बांझपन की समस्या का शिकार हो रहे हैं। आइये जानते हैं इस मुद्दे से जुड़ी कुछ जरूरी बातों के बारे में।

बायोलॉजिकल क्लॉक का भी रहता है रोल

बायोलॉजिकल क्लॉक का भी रहता है रोल
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बायोलॉजिकल क्लॉक पुरूषों के शरीर में मौजूद एक जैविक घड़ी होती है जिससे शरीर की मांसपेशियां दिन और रात के समय को समझने की कोशिश करती हैं। इसके सही ढंग से एक्टिव होने पर शरीर में हॉर्मोन का संतुलन बना रहता है। एक उम्र के बाद शरीर में बायोलॉजिकल क्लॉक पर भी असर पड़ता है जिसकी वजह से लगभग 40 साल की उम्र के बाद शरीर में शुक्राणुओं की संख्या और उनकी गुणवत्ता पर असर पड़ता है। पुरुषों की फर्टिलिटी के लिए 40 साल से पहले की उम्र अच्छी मानी जाती है।

स्मोकिंग करने वालों में बांझपन का खतरा

स्मोकिंग करने वालों में बांझपन का खतरा
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स्मोकिंग करने वाले लोगों में बांझपन का खतरा ज्यादा रहता है। ऐसे लोग जो ज्यादा स्मोकिंग करते हैं उनकी फर्टिलिटी कमजोर हो जाती है। स्मोकिंग या धूम्रपान की वजह से पुरुषों में शुक्राणुओं की संख्या कम होती है और इससे शुक्राणुओं की गुणवत्ता पर असर पड़ता है। स्मोकिंग बंद करने के कुछ समय बाद पुरुषों के शुक्राणुओं की संख्या बढ़ जाती है और पिता बनने में आसानी होती है।

फर्टिलिटी के लिए बॉक्सर पहनना लाभदायक

फर्टिलिटी के लिए बॉक्सर पहनना लाभदायक
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हार्वर्ड विश्वविद्यालय की एक स्टडी के मुताबिक तंग या टाइट अंडरवियर पहनने वाले लोगों में शुक्राणुओं की संख्या पर असर पड़ता है। इस स्टडी के मुताबिक जो लोग टाइट अंडरवियर पहनते हैं उनमें अंडकोष की गर्मी के कारण शुक्राणुओं का बनना कम हो सकता है। इसकी जगह जो लोग ढीले अंडरवियर या बॉक्सर पहनते हैं उनमें शुक्राणुओं का प्रोडक्शन सही रहता है।

शाकाहारी और वीगन डाइट का असर

शाकाहारी और वीगन डाइट का असर
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एक रिसर्च के मुताबिक शाकाहारी लोगों और वीगन डाइट का पालन करने वाले लोगों में शुक्राणुओं की संख्या कम हो सकती है। लोमा लिंडा यूनिवर्सिटी के मेडिकल स्कूल के शोध के मुताबिक जो पुरुष मांसाहार का सेवन नहीं करते हैं उनमें शुक्राणुओं की संख्या में कमी देखी जाती है। इसके अलावा कुछ ऐसे लोग जो वीगन डाइट का सेवन करते हैं उनमें भी इसका असर पड़ता है। लेकिन ऐसा हर किसी के साथ हो ये जरूरी नहीं है।

यौन संचारित रोग डालते हैं प्रभाव

यौन संचारित रोग डालते हैं प्रभाव
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पुरुषों में फर्टिलिटी के कमजोर होने का एक प्रमुख कारण यौन संचारित रोग भी है। यौन संचारित रोग (Sexually Transmitted Diseases) पुरुषों में बांझपन या इनफर्टिलिटी का सबसे प्रमुख कारण होती है। ऐसे में जिन पुरुषों को फर्टिलिटी से जुड़ी समस्या है उन्हें एसटीडी की जांच जरूर करवानी चाहिए।

मोटापे का प्रजनन क्षमता पर पड़ता है प्रभाव

मोटापे का प्रजनन क्षमता पर पड़ता है प्रभाव
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पुरुषों में इनफर्टिलिटी की समस्या का एक प्रमुख कारण मोटापा भी है। मोटापे की वजह से पुरुषों के शुक्राणुओं पर बुरा असर पड़ता है। अगर किसी भी व्यक्ति का बीएमआई 35 से अधिक है तो इसकी वजह से फर्टिलिटी और शुक्राणुओं की संख्या में गिरावट आती है। अगर आप नियमित रूप से एक्सरसाइज और डाइटिंग से वजन कम करते हैं तो आपके शुक्राणुओं की संख्या बढ़ सकती है।

लैपटॉप को गोद में रखकर काम करना नुकसानदायक

लैपटॉप को गोद में रखकर काम करना नुकसानदायक
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आज के समय में रेडिएशन की वजह से इंसान को कई समस्याएं हो रही हैं। रेडिएशन के कारण पुरुषों की फर्टिलिटी पर भी बुरा असर होता है। अगर आप लंबे समय तक लैपटॉप को गोद में रखकर काम करते हैं तो इसकी वजह से आपके शुक्राणुओं की संख्या पर असर पड़ सकता है। इसलिए इनफर्टिलिटी से बचने के लिए आपको लैपटॉप को गोद में रखकर ज्यादा देर तक काम करने से बचना चाहिए।

तनाव की वजह से पुरुषों में बांझपन

तनाव की वजह से पुरुषों में बांझपन
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तनाव भी पुरुषों में बांझपन या फर्टिलिटी की समस्या का प्रमुख कारण माना जाता है। तनाव की वजह से आपकी प्रजनन क्षमता और शुक्राणुओं की संख्या और गुणवत्ता पर बुरा असर पड़ता है। पुरुषों को पिता बनने के लिए और उनके शुक्राणुओं की गुणवत्ता को सुधारने के लिए इस बात का ध्यान जरूर रखना चाहिए। तनाव को कम करने के लिए स्वस्थ भोजन और योग आदि का सहारा लिया जा सकता है।

इनफर्टिलिटी केवल अधिक उम्र के लोगों में होती है

इनफर्टिलिटी केवल अधिक उम्र के लोगों में होती है
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ऐसा कहना बिलकुल ही गलत होता है कि इनफर्टिलिटी की समस्या केवल बड़े और अधिक उम्र के लोगों में ही होती है। चूंकि एक उम्र के बाद पुरुषों में फर्टिलिटी कमजोर हो जाती है लेकिन इसका यह मतलब नहीं है कि कम उम्र के लोगों को फर्टिलिटी से जुड़ी समस्या नहीं होती है। इनफर्टिलिटी की समस्या आज के समय में कम उम्र के लोगों में भी हो रही है और इसके लिए कई कारण जिम्मेदार माने जाते हैं।

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