एस्‍ट्रोजन बढ़ाने के लिए इन 9 आहारों का करें सेवन

एस्ट्रोजेन हमारे दैनिक जीवन का जरूरी हार्मोन है जो संभोग सम्बंधी चाहतों में भी वृद्धि करता है। अगर आप में कामुक क्षमता कम है तो जरूर आपमें एस्ट्रोजन हार्मोन की कमी है। ऐसे में इस हार्मोन को बढ़ाने के लिए इन आहारों का सेवन करें।

Meera Roy
Written by: Meera RoyPublished at: May 30, 2016

एस्ट्रोजन बढ़ाएं

एस्ट्रोजन बढ़ाएं
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एस्ट्रोजेन, स्टेरोएड हारमोन का एक प्राकृतिक समूह है। यह न सिर्फ विकास में सहायक है वरन महिलाओं में संभोग सम्बंधी चाहतों में भी वृद्धि करता है। इसके अलावा एस्ट्रोजेन महिला व पुरुष दोनों में पाया जाता है लेकिन महिलाओं में यह बहुतायत में मौजूद होता है जो कि उनकी प्रजनन क्षमता को भी प्रभावित करता है। बहरहाल एस्ट्रोजेन न सिर्फ सेक्सुअल चाहतों में वृद्धि के लिए आवश्यक है वरन एस्ट्रोजेन महिला और पुरुष में भिन्नता के लिए भी जिम्मेदार है। अतः यहां हम कुछ ऐसे आहार की सूची दे रहे हैं जिनके जरिये आप एस्ट्रोजेन बढ़ा सकती हैं।

फ्लैक्स सीड

फ्लैक्स सीड
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फ्लैक्स सीड को अलसी के रूप में भी जाना जाता है। फ्लैक्स सीड में फाइटोएस्ट्रोजेन पाया जाता है जो कि लिग्नान के तौर पर जाना जाता है। यह सीड सामान्यतः ब्रेड, दाल और सलाद में इस्तेमाल किया जाता है। यदि आप एस्ट्रोजेन की मात्रा बढ़ाने की चाह रखती हैं तो बिना किसी सोचे समझे फ्लैक्स सीड को अपनी डाइट चार्ट में शामिल कर लें। इसमें फाइबर भी काफी मात्रा में मौजूद होता है अतः इसे आप लंच या डिनर के पहले भी ले सकते हैं। बहरहाल फ्लैक्स सीड को सामान्यतः वजन कम करने हेतु सलाह के तौरपर दिया जाता है। इसके अलावा यह कोलेस्ट्रोल के स्तर को कम करने में भी सहायक है।

टोफू

टोफू
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टोफू को बीन कर्ड भी कहा जाता है। इसे सोया मिल्क से बनाया जाता है। इसका इस्तेमाल कुछ सूप में किया जाता है। कई बार इसे मुख्य आहार में भी शामिल किया जाता है। सोया मिल्क में फाइटोएस्ट्रोजेन काफी होता है।

तिल के दाने

तिल के दाने
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तिल में फाइटोएस्ट्रोजेन होता है। आप चाहें तो तिल का तेल भी इस्तेमाल कर सकती हैं। दोनों में ही लिग्नान बहुतायत में पाया जाता है। तिल फाइबर का अच्छा स्रोत है। साथ ही इसमें मिनरल की मात्रा भी काफी ज्यादा है। इसके छोटे आकार के कारण आप चाहें तो इसे किसी भी आहार विशेष में शामिल कर सकते हैं। आपको जानकर हैरानी हो सकती है कि महज एक चम्मच तिल के दाने से आइरन, मैग्नीशियम, कैल्शियम आदि सब कुछ हासिल किया जा सकता है।

छोले

छोले
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छोले फाइटोएस्ट्रोजेन के लिए प्राकृतिक स्रोत है। हालांकि छोले में प्रत्यक्ष रूप में एस्ट्रोजेन नहीं होता। लेकिन सहायक के रूप में महति भूमिका निभाता है। सामान्यतः छोलों की सब्जी बनाकर खायी जा सकती है। इसकी चटनी भी काफी लाभकर होती है। बहरहाल छोले में फाइबर, प्रोटीन भी काफी मात्रा में पाया जाता है। यदि आप मीट से तौबा करना चाहते हैं तो छोले को उसके विकल्प के तौर पर चुन सकते हैं।

बीन्स

बीन्स
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बीन्स स्वास्थ्य के लिहाज से बेहतरीन आहार है। इसमें भी फाइटोएस्ट्रोजेन काफी मात्रा में पायी जाती है। बीन्स में फाइबर और प्रोटीन भी बहुतायत है। लेकिन ध्यान रखें कि यह बहुत धीरे धीरे हजम होता है। अतः डायबिटीज के मरीजों के लिए यह बेहतरीन विकल्प हो सकता है।

मटर

मटर
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एस्ट्रोजेन की विद्ध हेतु मटर बेहतरीन आहार है। ऐसा इसलिए क्योंकि इसमें फाइटोएस्ट्रोजेन होता है और इसमें अन्य आहार की तरह कई अन्य लाभ भी मौजूद हैं। इसमें मिनरल, मैग्नीशियम, पोटाशियम और थोड़ा बहुत प्रोटीन भी होता है। इसे विटामिन सी का भी अच्छा स्रोत माना जाता है।

टेम्पे

टेम्पे
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टेम्पे वास्तव में सोयाबीन से बना एक विशेष आहार है। टेम्पे के रूप में आने के बावजूद यह अपना एस्ट्रोजेन स्तर नहीं खोता। यही नहीं टेम्पे मेनोपोज के लक्ष्णों को भी प्रभावित करता है। टेम्पे में मैग्नीशियम और आइरन तो होता ही है साथ ही इसमें दो महत्वपूर्ण मिनरल भी मौजूद होते हैं जिन्हें आसानी से हासिल नहीं किया जा सकता।

चोकर की दाल

चोकर की दाल
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चोकर की दाल भी अन्य तमाम आहार की तरह फाइटोएस्ट्रोजेन का स्रोत है। इसके अलावा भी इसमें कई विशेषताएं मौजूद हैं। यह फाइटोएस्ट्रोजेन के स्तर को भी बढ़ाने में सहायक है। इससे न सिर्फ हारमोन को नियंत्रित किया जा सकता है बल्कि घटते एस्ट्रोजेन के स्तर को भी संभाला जा सकता है।

सोया मिल्क

सोया मिल्क
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सोया मिल्क में टोफू, टेम्पे और सोयाबीन जैसे ही लाभ मौजूद हैं। इसे आसानी से हजम भी किया जा सकता है। अतः एस्ट्रोजेन के स्तर को बढ़ोन के लिए यह एक बेहतरीन विकल्प हो सकात है।

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