बहुत अधिक सोचने वाले में होते हैं ये खास लक्षण

अगर आप बहुत अधिक फालतू सोचते हैं तो जरूर ओवरथिंकर हैं। ओवरथिंकर के इन लक्षणों के बारे में विस्तार से जानिए और पता लगाइए कि आप ओवरथिंकर तो नहीं।

Meera Roy
Written by: Meera RoyPublished at: Aug 16, 2016

बहुत अधिक सोचना

बहुत अधिक सोचना
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हमारे आसपास एक बहुत प्यारी सी दुनिया बसी हुई है। इसमें सही-गलत, झूठ-फरेब, धोखा-ईमानदारी जैसी असंख्य चीजें हैं। कुछ इन्हें सहजता से लेते हैं। कुछ इन्हें सहजता से नहीं लेते। जो लोग इन्हें सहजता से लेते हैं, उनके लिए यह दुनिया प्यारी होती है। लेकिन समसया उन लोगों के लिए है जो लोग अपने आसपास माहौल से बोझिल रहते हैं। दरअसल ऐसे लोग ओवर थिंकर होते हैं। लेकिन ओवर थिंकर को अकसर लगता है कि पूरी दुनिया उसके जैसे ही सोचती है। अतः यह जानना आवश्यक है कि कहीं आप ओवर थिंकर तो नहीं। अगर आपको नहीं पता तो जानने के लिए इस लेख को आगे पढ़िये।

हर चीज के मायने

हर चीज के मायने
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पिछले दिनों अरूप ने अचानक रास्ते में अपने दोस्त अनूप को देखा। अनूप अरूप को देखकर अनदेखा कर गया जबकि अरूप उससे मिलना चाहता था। अनूप के चले जाने के अरूप काफी देर वहीं खड़ा रहा। वह यही सोचता रहा कि आखिर अनूप ने उसे इग्नोर क्यों किया? कहीं उसके दिल में कोई चोर तो नहीं? कहीं वह उससे कुछ छिपाना तो नहीं चाहता? कहीं वह उसे नापसंद तो नहीं करता? वगैरह-वगैरह। असल में अरूप जैसे लोग अकसर हर चीज के मायने निकालने लगते हैं। जो लोग इस तरह की सोच रखते हैं, वे लोग ओवर थिंकर होते हैं।

सोच में डूबे रहना

सोच में डूबे रहना
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जो लोग ओवर थिंकर होते हैं उन्हें अगर कहें कि एनालिसिस पैरालिसिस हो गया है तो गलत न होगा। असल में ऐसे लोग न सिर्फ सोच से ग्रस्त रहते है। बल्कि विश्लेषक बनने में उन्हें कोई परहेज नहीं होता। जब देखो कुछ न कुछ सोचते रहते हैं। वे इस हद तक सोचते हैं कि हर जगह झट से तुलनात्मक बन जाते हैं। किसका दोस्त अच्छा है, किसके ड्रेस अच्छे हैं, किसका घर अच्छा है आदि। अगर हम कहें कि ऐसे लोग सोच में डूबे रहने को इंज्वाय करते हो निरानिर सही है।

समस्या का साकार रूप

समस्या का साकार रूप
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अगर ओवर थिंकर किसी एक विषय पर कई सप्ताह से सोच रहे थे जो वास्तव में शायद थी ही नहीं। लेकिन किसी भी समस्या का ताल्लुक ओवर थिंकर की काल्पनिक समस्या से हो गया तो वे इतना खुश होते हैं और दुनिया को साबित करते हैं कि उन्हें हर चीज पहले से ही पता होती है। असल में ऐसे लोग खुद को ज्यादा समझदार समझते हैं। इसीलिए हर चीज को समस्या के रूप में लेते हैं और मन में गढ़ी हुई समस्या को वास्तविक चीजों से जोड़ने लगते हैं। एक समस्या का निदान होते ही ऐसे लोग दूसरी समस्या पर कूद पड़ते हैं।

चीजों को न छोड़ना

चीजों को न छोड़ना
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ओवर थिंकर आसानी से किसी चीज को नहीं छोड़ पाते। कहने का मतलब यह है कि वे न तो आसानी से किसी बात को भूल पाते हैं और न ही खुद से साथ घटे किसी वाकया को। अब दिव्या को ही लें। दिव्या पिछले दिनों अपने पति के साथ दोस्तों के घर गई। दिव्या किसी काम में व्यस्त होने के कारण उसके लिए आयी चाय ठण्डी हो गई। घर आने के बाद दिव्या अपने पति सौरभ पर इसलिए भड़क गई कि उसने उसे आकर चाय का प्याला क्यों नहीं दिया? सौरभ बड़ी सहजा से कहा कि वह बातों बातों में भूल गया। इस बात को दिव्या ने घुमाकर यह कहा कि तुम मेरी कहीं भी परवाह नहीं करते। मेरी चाय ठण्डी हो गई। जबकि तुम्हें मुझे चाय देनी चाहिए थी। उसका झगड़ा यहीं खत्म नहीं हुआ। इस छोटी सी बात पर दिव्या घंटों सौरभ से लड़ती रही और मुंह फुलाकर बैठी रही।

मरीज

मरीज
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थिंकर किसी मरीज से कम नहीं हैं। असल में वे समय के मरीज होते हैं। उन्हें हर चीज समय पर चाहिए। हर चीज अपने मन के मुताबिक चाहिए। हर चीज अपनी पसंद अनुसार चाहिए। असल में ओवर थिंकर अपने बुने हुए जाल में खुद तो रहना ही चाहते हैं और दूसरों को भी फसाना चाहते हैं। अगर उनके मन मुताबिक कुछ न हो तो वे तनावग्रस्त हो जाते हैं। दूसरों से लड़ने लगते हैं। इतना ही नहीं छोटी सी बात पर कई दिनों तक मुंह फुलाए रहते हैं। इसलिए ऐसे लोगों को मरीज कहा जाता है।

कुछ करने से कतराते हैं

कुछ करने से कतराते हैं
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ओवर थिंकर अकसर कुछ करने या कहने से पहले बार बार सोचते हैं। इतना ही नहीं पूरी तरह तैयार होने का इंतजार करते हैं और उसके बाद किसी काम को अमलीजामा पहनाते हैं। जबकि समस्या यह है कि वे कभी तैयार नहीं हो पाते। दरसअल ये लोग सिर्फ दूसरों को ताने देना जानते हैं, दूसरों की गलतियां निकालना जानते हैं। यही नहीं ओवर थिंकर इस हद तक परेशानी का सबब होते हैं कि इन्हें कोई महत्व दे तो भी इन्हें पसंद नहीं और कोई इग्नोर करे तो वो भी इन्हें गवारा नहीं।

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